धनबाद निचितपुर हादसा : मजदूरों ने कहा - ‘करंट ने मुझे दूर फेंका, हम तो बच गये, लेकिन...

धनबाद-गोमो रेलखंड पर स्थित झारखोर रेलवे फाटक के पास विस्फोट, आग की लपटें देख ग्रामीण सहम गये थे. हाइटेंशन तार की चपेट में आने के बाद विस्फोट इतना जबरदस्त हुआ कि वहां काम कर रहे मजदूरों का शव जमींदोज हो गया. रोते-रोते मजदूर ने कहा कि वह तो बच गया, मगर साथी जुदा हो गया.
धनबाद रेल मंडल का अति महत्वपूर्ण ग्रैंड कॉर्ड रेल खंड के धनबाद-गोमो रेलखंड पर स्थित झारखोर रेलवे फाटक के पास विस्फोट, आग की लपटें देख ग्रामीण सहम गये. सोमवार को यहां 11.22 बजे हुई घटना के बाद अफरातफरी मच गयी. चंद सेकेंड में यहां काम कर रहे छह मजदूर जिंदा जल गये. विस्फोट व आग की लपटों को देख झारखोर बस्ती के ग्रामीण घंटों दहशत में रहे. हाइटेंशन तार की चपेट में आने के बाद विस्फोट इतना जबरदस्त हुआ कि वहां काम कर रहे मजदूरों का शव जमींदोज हो गया.
लातेहार जिला के बरवाडीह थाना निवासी संदीप राम घटना में बाल-बाल बच गया. करंट ने उसे दूर जमीन पर पटक दिया. वह डरा-सहमा हुआ था. वह कांप रहा था. रामकनाली ओपी प्रभारी ने उसकी हौसला अफजाई करते हुए पानी पिलाया. इसके बाद उसने बताया कि संजय शिखा नामक कंपनी में ठेकादार के अंदर काम करते है. 14 हजार वेतन मिलता है. आज भी अपने सहयोगी मजदूरों के साथ काम कर रहे थे. तभी पोल बिजली तार में सट गया. देखते ही देखते साथी मजदूरों की मौत हो गयी. जबकि पलामू का एक मजदूर और हम बच गये. पलामू वाला मजदूर यहां से निकल गया. वह रोते-रोते कह रहा था कि वह तो बच गया, मगर साथी जुदा हो गये. घटना के बाद शव को निकालने के लिए रेलवे की रेस्क्यू टीम दो घंटे से अधिक देर तक मशक्कत करनी पड़ी.
ग्रामीणों ने बताया कि घटना के बाद रेलवे फाटक के पास आग लग गयी. सभी मजदूरों का शव धू-धू कर जल रहा था. बगले में 50 फीट की दूरी तक झाड़-झंकाड़ में भी आग लग गयी थी. मजदूरों का शव मिट्टी में जमींदोज हो गया. जहां शव धंसा था, वहां तीन घंटे बाद भी धुंआ निकल रहा था.
इस दुर्घटना में काल के गाल में समाये सभी मजदूरों का शव पूरी तरह गल गया था. मांस के टुकड़े-टुकड़े हो गये थे. मिट्टी खुदाई कर एक-एक शव को बाहर निकाला गया. कोई पहचान में नहीं आ रहा था. कपड़ा, जूता तक चिपक चुका था. जलने की बदबू आ रही थी. राहत व बचाव कर्मियों का दस्ताना भी पिघल जा रहा था.
इतनी बड़ी घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने संयम से काम लिया. हल्ला-हंगामा की बजाय राहत कार्य में लगी टीम को मदद कर रहे थे. कड़ी धूप में भी ग्रामीण डटे हुए थे. रास्ता भी साफ करा कर शवों को ले कर जा रही वाहनों को पास करा रहे थे.
पोल लगाने के लिए ना शटडाउन लिया गया और ना ही काम कराने के लिए टीआरडी का इंजीनियर मौजूद था, जबकि नियम है कि काम के दौरान टीआरडी का एक इंजीनियर वहां मौजूद रहेगा. शटडाउन लेकर काम कराया जाना है, काम पूरा होने के बाद इंजीनियर को शटडाउन वापस करना है. इसके बाद लाइन को चालू किया जाना चाहिए था. लेकिन रेलवे की ओर से इसका पालन नहीं किया गया इसका खामियाजा मजदूरों को भुगतना पड़ा.
हादसा में मृत छह मजदूरों का शव शाम को एसएनएमएमसीएच के पोस्टमार्टम हाउस लाया गया. शव के साथ ही कई अन्य मजदूर भी आये थे. सभी मृतकों का शव पोस्टमार्टम हाउस में रख दिया गया है. मंगलवार को शवों का पोस्टमार्टम किया जायेगा. वहीं शव लेकर आये मजदूर किसी से कोई बात नहीं कर रहे थे. सभी के चेहरे पर भय था. अपने साथी को खोने का गम उनके चेहरे पर साफ दिख रहा था.
जिला प्रशासन ने तेतुलमारी व निचितपुर के बीच हुई घटना को लेकर रेल प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. एसडीएम प्रेम तिवारी ने रेल प्रशासन को पत्र लिख कर कहा है कि पूरी घटना को ले कर जांच रिपोर्ट दें. दुर्घटना के लिए कौन जिम्मेदार हैं. उन पर क्या कार्रवाई हुई की जानकारी मांगी गयी है.
झारखोर में गेट नंबर 7/ए/इ पोल संख्या 283/16 के समीप घटी घटना के बाद रेलवे ने जांच टीम गठित कर दी. जांच का जिम्मा सीनियर डीएससी, सीनियर डीइइ टीआरडी, सीनियर डीएसओ एंड जीएम आरवीएनएल इलेक्ट्रिकल को सौंपी गयी है. जांच में दोषी पाए जाने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी.
फाटक के गैटमेन प्रफुल्ल मंडल ने बताया कि पोल को यहां गाड़ा जा रहा था. मजदूर काम पर लगे थे. सबकुछ ठीक चल रहा था.11 बजकर 22 मिनट हो रहा होगा.उसी समय डाउन लाइन में हो रहे कार्य के दौरान अचानक पोल रेलवे के 25 हजार वोल्ट के ओवरहेड तार में जा गिरा. ऐसी आवाज और आग की लपटे उठी कि उसे बयां नहीं कर सकते हैं. वह दौड़ा-दौड़ा फाटक से बाहर निकला और निचितपुर के स्टेशन मास्टर को सूचना देकर पावर को कट करवाया. तब-तक 6 मजदूरो की जान चली गयी. इस फाटक में 12-12 घंटे की दो गैटमेन की ड्यूटी है. इस घटना के बाद यहां रात को रहना मुश्किल हो जायेगा. विभाग से मांग करते है कि रात को दो लोगों की ड्यूटी दी जाये.
काम के लिए किसी प्रकार के सुरक्षा उपकरण का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था. जबकि पोल झुके नहीं या फिर ओवर हेड तार को नुकसान पहुंचाए बिना काम हो, इसके लिए किरान समेत अन्य संसाधन होना चाहिए था. लेकिन यहां सिर्फ मजदूरों के भरोसे ही काम हो रहा था.
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11.22 बजे पोल हाइटेंशन तार में सटा, विस्फोट के साथ छह मजदूर फेंका गये
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11.30 बजे गेटमैन ने रेलवे के हाइटेंशन तार का पावर कट करवाया
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11.32 बजे अप-डाउन लाइन बंद कराया गया
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11.35 बजे झारखोर बस्ती व अन्य जगह के लोग पहुंचे
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11.40 बजे स्थानीय रामकनाली पुलिस मौके पर पहुंची
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11.50 बजे धनबाद से डीआरएम व अन्य घटनास्थल पर पहुंचे
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12.30 बजे एसडीपीओ-सीओ घटनास्थल पर पहुंचे
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1.30 बजे अपलाइन चालू कर हावड़ा-बिकानेर एक्सप्रेस रवाना हुई
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2.00 बजे रामकनाली पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा
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2.50 बजे डाउन लाइन चालू कराया गया
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3.00 बजे डाउन लाइन से हावड़ा-कालका एक्सप्रेस रवाना हुई
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3.30 बजे जोरदार बारिश के साथ भीड़ छंट गयी
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By Prabhat Khabar News Desk
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