अलीगढ़ का नाम हरिगढ़ रखने के प्रस्ताव पर छिड़ी बहस, किसी ने चुनावी एजेंडा बताया, किसी ने दिए समर्थन में तर्क
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 08 Nov 2023 3:06 PM
अलीगढ़ का नाम हरिगढ़ रखे जाने की फिर कवायद की जा रही है. नगर निगम कार्यकारिणी बोर्ड की पहली बैठक में यह प्रस्ताव रखा गया. बैठक में बिना शोर शराबे के सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास भी हो गया. इस बैठक में समाजवादी पार्टी के करीब 32 पार्षद मौजूद रहे, लेकिन किसी ने विरोध नहीं किया.
अलीगढ़ : नगर निगम कार्यकारिणी बोर्ड की पहली बैठक में अलीगढ़. शहर का नाम बदलकर ‘ हरिगढ़ ‘, करने
के लिए प्रस्ताव बिना शोर शराबे के सर्वसम्मति से पास हो गया. इस बैठक में समाजवादी पार्टी के करीब 32 पार्षद मौजूद रहे, लेकिन किसी ने विरोध नहीं किया. अब सपा कह रही है कि जिनको जिम्मेदारी सौपी गई थी. उन्होंने निभाया नही. जिला पंचायत की पहली बैठक में भी अलीगढ़ को हरिगढ़ बनाने का प्रस्तान 2021 में ही शासन को भेजा जा चुका है. अलीगढ़ के महापौर प्रशांत सिंघल कहते है कि अलीगढ़ में हिन्दुओं की संख्या बढ़ गई है, जनता की यह मांग रही है. ब्रजभूमि का महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है, स्वामी हरिदास की जन्मभूमि रही है. जिला पंचायत का प्रस्ताव लंबित पड़ा होने के सवाल पर कहा कि शासन की अपनी प्रक्रिया रहती है.अपने स्तर से इसे आगे बढ़ायेगी.
अलीगढ़ का नाम बदले जाने पर कुछ लोग इसे राजनीतिक एजेंडा बता रहे हैं. इससे जिले का भला नहीं होगा . हालांकि हरिगढ़ भगवान के नाम पर बनाया जा रहा हैं तो वही स्वामी हरिदास के नाम पर बदलाव की बात कही जा रही हैं. हरिगढ़ का मुद्दा उठाकर समस्याओं को ढकाने का प्रयास किया जा रहा है. 2024 में लोक सभा चुनाव है और भाजपा पर घटिया राजनीति करने का आरोप लग रह है. अलीगढ़ की पहचान ताला और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से है. इसके साथ ही यहां डिफेंस कॉरिडोर और राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय भी बन रहा है. लोगों का यह कहना है कि कागजों पर नाम बदले जा सकते हैं लेकिन लोगों के दिलों में अलीगढ़ जिंदा रहेगा.
व्यापारी थाइन्डा वत्स ने कहा कि यह राजनैतिक एजेंडा है इससे देश , राज्य या जिले का भला नहीं होता है.जनता को भ्रमित किया जा रहा है.शहर का भला नहीं होता है. इस तरह की गाशिप से बचना चाहिए.नाम बदलने पर विश्वास नहीं है केवल काम में विश्वास है. भाजपा पार्षद दल के मुख्य सचेतक पुष्पेन्द्र सिंह ने बताया कि बैठक में उपस्थित रहे थे. मेरे द्वारा पार्षदों को व्हिप जारी किया गया था.भाजपा के समस्त पार्षदों ने इसका समर्थन किया.निर्दलीय पार्षदों में भी समर्थन किया. बैठक की अध्यक्षता कर रहे महापौर ने इस पर सहमति जताते हुए पास किया और मिनट्स में लिखने के आदेश दिये. वही जिले का नाम बदलने के मुद्दे को सांप्रदायिक की राजनीति से जोड़ा जा रहा है. नगर निगम बोर्ड की बैठक 6 महीने बाद पहली बार हुई. जनता उम्मीद कर रही थी कि सड़क, नाली, सफाई व्यवस्था और विकास की समस्याओं को लेकर बात होगी और बजट जारी किया जायेगा. लेकिन बजट पास नहीं किया गया . खराब हैंड पंप, नालियों की फाइल , पानी की समस्या शहर में बरकरार है. कूड़े और गंदगी का अंबार है. इन पर कोई चर्चा अधिवेशन में नहीं की गई.
समाजसेवी आगा यूनुस खान ने कहा कि गुप चुप और प्रायोजित तरीके से भाजपा पार्षद ने प्रस्ताव पढ़ा और महापौर ने मोहर लगा दी. नगर निगम में इस पर न कोई चर्चा हुई, न बहस हुई और मीडिया के जरिए खबर फैला दी की अलीगढ़ का नाम हरिगढ़ हो रहा है.जो शासन को भेजा गया. उन्होंने कहा कि यह जनता का अपमान और धोखा है. मेयर और भाजपा पार्षद ने धोखा दिया है. एक पार्षद के प्रस्ताव पर कैसे अलीगढ़ का नाम बदला जा सकता है . अलीगढ़ की आबादी करीब 40 लाख है.
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नगर निगम का गठन सेवा के लिए हुआ है. इसमें जल आपूर्ति, जल निकासी , सड़क, सफाई व्यवस्था, पार्क पार्किंग, यातायात सुविधा, स्ट्रीट लाइट पर कोई चर्चा नहीं हुई ,जबकि हरिगढ़ बनाकर इन समस्याओं को ढका जाएगा. यह प्रस्ताव इसी कारण पास किया गया क्योंकि 2024 का इलेक्शन है और भाजपा के पास बताने के लिए कुछ नहीं है. यह ओछी और घटिया राजनीति मुजायरा है. आगा यूनुस खान ने कहा कि अगर मेयर को अलीगढ़ से इतनी नफरत थी, तो अलीगढ़ से इलेक्शन क्यों लड़ा. आप इंतजार करते कि जब हरिगढ़ हो जाता, तब चुनाव लड़ते. अलीगढ़ का नाम पूरी दुनिया में है. यहां की ताला फैक्ट्री उद्योग , AMU यह सब अलीगढ़ के नाम से ही जाना जाता है. अलीगढ़ गौरवान्वित नाम है . नाम कागज पर बदले जा सकते हैं, लेकिन लोगों के दिलों में अलीगढ़ का नाम जिंदा रहेगा.
हालांकि समाजवादी पार्टी के पार्षद मुशर्रफ हुसैन ने कहा कि पिछले कई सालों से भाजपा अलीगढ़ का नाम बदलने का प्रयास कर रही है. लेकिन सपा के लोग और मुस्लिम समाज के लोग इसका नाम अलीगढ़ ही रखेंगे. उन्होंने कहा कि सपा में जिनको पार्षद दल का नेता बनाया गया था उन्हें विरोध करना चाहिए था. लेकिन वह अपनी जिम्मेदारी से भागे हैं. उन्होंने कहा कि प्रस्ताव धोखे से पास कराया गया है. इसकी शिकायत सपा मुखिया अखिलेश यादव से करेंगे .
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