विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: विस्थापन के दर्द से रूबरू हुए आगरा के लोग, डाकघर में लगी प्रदर्शनी

Updated at : 14 Aug 2023 4:26 PM (IST)
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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: विस्थापन के दर्द से रूबरू हुए आगरा के लोग, डाकघर में लगी प्रदर्शनी

आगरा के प्रमुख डाकघर में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. जिसमें विभाजन के समय के कुछ चित्र लगाए गए. जिससे लोगों को विभाजन के समय की घटनाओं के बारे में जानकारी हो सके.

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Agra: 14 अगस्त 1947 को भारत देश का विभाजन हुआ जिसमें तमाम लोगों ने अपनी जान गवाई. लोगों को अपना घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ा. इसी पूरे घटनाक्रम को और हर लम्हे को लोगों को बताने के लिए भारतीय जनता पार्टी विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में 14 अगस्त के दिन को मना रही है.

इस दौरान आगरा के प्रतापपुरा स्थित प्रमुख डाकघर में एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. जिसमें विभाजन के समय के कुछ चित्र लगाए गए. जिससे लोगों को विभाजन के समय की घटनाओं के बारे में जानकारी हो सके. आगरा के सांसद और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं कल्याण राज्य मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल ने इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया. उनके साथ खैरागढ़ के विधायक भगवान सिंह कुशवाहा और डाकघर प्रमुख राजीव उमराव मौजूद रहे.

डाकघर में आयोजित की गई प्रदर्शनी में सांसद एसपी सिंह बघेल ने बताया कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में इस प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है. जिसमें विभाजन के समय के कुछ चित्र हैं. जिससे लोगों को पता चले कि हमारी आजादी कितनी रक्त रंजित, लूट, हत्या और बलात्कार के साथ ली गई. कितने लोग बेघर हो गए, कितने लोगों की हत्याएं हुई. कितने लोग जो हवेली में रहते थे उन्हें झोपड़िया में और खुले में रहने को मजबूर होना पड़ा.

दो राष्ट्र के विभाजन का प्रस्ताव और कांग्रेस द्वारा देश के विभाजन का प्रस्ताव नेहरू जी को नहीं मानना चाहिए था अगर नेहरु जी नहीं मानते तो भारत-पाकिस्तान बांग्लादेश एक ही होते. ऐसे में चाहे खेल का मामला हो सेना का मामला हो. भारत विश्व में एक राष्ट्र विश्व गुरु के नाम से प्रसिद्ध होता.

डाकघर प्रमुख राजीव उमराव ने बताया कि देश में सभी को पता है कि 15 अगस्त और 26 जनवरी आजादी के उत्सव के रूप में मनाए जाते हैं. लेकिन अभी भी हमारे तमाम युवाओं और बच्चों को यह जानकारी नहीं है कि आजादी को पाने के लिए कितने लोगों ने अपने प्राण न्योछावर किए. कितने लोगों को विस्थापित होना पड़ा. कितनी माताएं बहने दर्द के मंजर से गुजरी. सभी लोग चाहेंगे कि यह सब कुछ दोबारा नहीं होना चाहिए.

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