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पार्थ ने कोर्ट में कहा : ऐसा न्याय मिलने से क्या लाभ, जब मैं जीवित ही न रहूं

Updated at : 15 Mar 2023 12:58 PM (IST)
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पार्थ ने कोर्ट में कहा : ऐसा न्याय मिलने से क्या लाभ, जब मैं जीवित ही न रहूं

अर्पिता ने कहा : एक निर्दोष महिला को जेल में कैद कर उसे अपमानित करने की हो रही कोशिश. सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपियों को 21 तक न्यायिक हिरासत में भेजा

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शिक्षक भर्ती घोटाले में केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (इडी) के हाथों गिरफ्तार पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी महिला मित्र अर्पिता मुखर्जी को मंगलवार को बैंकशाल कोर्ट में वर्चुअली पेश किया गया. इधर, इसी मामले में प्राथमिक शिक्षा पर्षद के पूर्व अध्यक्ष माणिक भट्टाचार्य को सशरीर बैंकशाल कोर्ट की विशेष अदालत में पेश किया गया था. तीनों पक्षों की दलीलें व इडी के बयान को सुनकर अदालत ने तीनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत की अवधि 21 मार्च तक बढ़ाने का निर्देश दिया.

अदालत सूत्र बताते हैं कि इस दिन वर्चुअली पेशी के दौरान पार्थ चटर्जी ने न्यायाधीश के समक्ष खुद को निर्दोष और काफी बीमार बताया. पार्थ ने कहा : इस मामले में मुझे बेवजह गिरफ्तार किया गया है. मै निर्दोष हूं. मेरी तबीयत ठीक नहीं रहती. आठ महीने से जेल में हूं. जेल में इलाज सही से नहीं होता. इस मामले का निबटारा कब तक होगा, यह कोई नहीं बता सकता. ऐसा न्याय मिलने से क्या लाभ, जब इस मामले का फैसला हो, तब तक मैं जीवित ही न रहूं.

इधर, अर्पिता ने कहा : मुझे बेवजह इस मामले में फंसाया जा रहा है. एक निर्दोष महिला को इस तरह से गिरफ्तार कर उसके सामाजिक सम्मान हानि की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा : मेरी मां बीमार रहती है. मेरी भी तबीयत ठीक नहीं रहती. अदालत को इस तरफ भी ध्यान देने की जरूरत है.

इधर, प्राथमिक शिक्षा पर्षद के पूर्व अध्यक्ष माणिक भट्टाचार्य ने अदालत में कहा कि मुझे बिना किसी ठोस सबूत व वैध हस्ताक्षर के गिरफ्तार किया गया. मैं कानून की पढ़ाई कराने वाला प्रोफेसर रह चुका हूं. आज जिस कानून के तहत मेरी गिरफ्तारी हुई है, मैं उस कानून की पढ़ाई को भूलाता जा रहा हूं. सारे नियम-कानून को ताक पर रख कर मेरी गिरफ्तारी हुई है. मैं निर्दोष हूं. अदालत मुझे या तो जमानत दे, या फिर ऐसा कोई निर्देश दे कि मैं रात को सोऊं, तो सुबह आंख ही न खुले.

इधर, इडी की तरफ से अदालत में कहा गया कि इस मामले की जांच में अभी भी चौंकाने वालीं जानकारियां मिल रही हैं. जांच की गति को आगे बढ़ाने के लिए इन आरोपियों को जेल में रहने की जरूरत है, वरना न्याय प्रभावित होगी. अदालत ने सभी पक्षों की बातों को सुनने के बाद सभी आरोपियों की न्यायिक हिरासत की अवधि 21 मार्च तक बढ़ाने का निर्देश दिया.

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