झारखंड: 10 लाख के इनामी नक्सली साहेबराम मांझी को मिली पारसनाथ जोन की कमान, संगठन की मजबूती में जुटा
Published by : Guru Swarup Mishra Updated At : 23 Feb 2024 4:12 PM
नक्सली
झारखंड के इनामी नक्सली साहेबराम मांझी का आतंक गिरिडीह, धनबाद, बोकारो समेत कई जिलों में है. उसके खिलाफ गिरिडीह के पीरटांड़, खुखरा, मधुबन, डुमरी, निमियाघाट के अलावा कई थानों में 50 से अधिक मामले दर्ज हैं.
गिरिडीह, मृणाल कुमार: नक्सलियों के लिए सेफ माने जाने वाले पारसनाथ जोन की कमान भाकपा (माओवादी) जोनल कमेटी के मेंबर और 10 लाख के इनामी साहेबराम मांझी को सौंप दी गयी है. साहेबराम मांझी को यह जिम्मेवारी एक करोड़ के इनामी सह नक्सली संगठन की सेंट्रल कमेटी के मेंबर प्रयाग मांझी उर्फ विवेक दा ने सौंपी है. पारसनाथ जोन की कमान संभालने के बाद साहेबराम मांझी इलाके में नक्सली संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ संगठन में नये सदस्यों को जोड़ने में जुटा हुआ है. पुलिस सूत्रों ने यह जानकारी दी है. गौरतलब है कि साहेबराम मांझी पीरटांड़ थाना क्षेत्र के करंदों का रहने वाला है. उस पर सरकार ने 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है.
15 लाख के इनामी नक्सली कृष्णा हांसदा की गिरफ्तारी के बाद पारसनाथ जोन था खाली
पारसनाथ जोन में कृष्णा हांसदा का काफी दबदबा था. पूरे इलाके में उसने अपना आतंक मचा रखा था. गिरिडीह पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए एक विशेष अभियान चलाया और 14 जनवरी 23 को 15 लाख के इनामी नक्सली कृष्णा हांसदा को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की. कृष्णा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने काफी राहत की सांस ली और नक्सलियों को भी तगड़ा झटका लगा. पूरा इलाका शांत हो गया. हालांकि बीच-बीच में नक्सली संगठन के कुछ नेताओं द्वारा इलाके में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास पोस्टरबाजी कर किया गया. लेकिन पुलिस की दबिश के कारण नक्सली संगठन पिछले एक साल से अधिक समय से पूरी तरह से बैकफुट पर चला गया. इसी को देखते हुए माओवादियों ने एक बार फिर से पारसनाथ जोन में संगठन को मजबूत करने के लिए साहेबराम मांझी को यह जिम्मेवारी सौंपी है.
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कौन है साहेबराम मांझी
साहेबराम मांझी का आतंक न सिर्फ गिरिडीह बल्कि धनबाद, बोकारो के अलावा अन्य कई जिलों में फैला हुआ है. उसके खिलाफ सिर्फ गिरिडीह के पीरटांड़, खुखरा, मधुबन, डुमरी, निमियाघाट के अलावा विभिन्न थानों में 50 से अधिक मामले दर्ज हैं. वह 25 लाख के इनामी नक्सली अजय महतो उर्फ टाईगर का सबसे करीबी है. साथ ही सेंट्रल कमेटी के मेंबर प्रयाग मांझी उर्फ विवेक दा का भी करीबी है.
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लेखक के बारे में
By Guru Swarup Mishra
मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.
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