कोडरमा में बाल विवाह की कोशिश: हाईकोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, चाईल्डलाइन ने बीडीओ को लिखी चिट्ठी

Koderma News: एक बच्ची की शादी उसके परिजन जबरन करवा रहे थे. बच्ची की सहेलियों ने इसकी सूचना पुलिस और चाइल्ड लाइन को दी. इसके बाद पुलिस अधिकारियों की मदद से उसकी शादी को रोका गया. मामला प्रकाश में आने के बाद हाईकोर्ट ने इसका संज्ञान लिया
झारखंड के कोडरमा जिले के कोडरमा थाना क्षेत्र के बरसोतियाबर आदर्श मोहल्ला में 12 वर्षीय नाबालिग की शादी कराने कोशिश के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है. कोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार कोडरमा को इस मामले में समुचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया. बच्ची का बयान दर्ज किया गया और चाइल्ड लाइन ने प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) को कानूनी कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है.
जिले में एक बच्ची की शादी उसके परिजन जबरन करवा रहे थे. बच्ची की सहेलियों ने इसकी सूचना पुलिस और चाइल्ड लाइन को दी. इसके बाद पुलिस अधिकारियों की मदद से उसकी शादी को रोका गया. मामला प्रकाश में आने के बाद हाईकोर्ट ने इसका संज्ञान लिया और जिला विधिक सेवा प्राधिकार कोडरमा को समुचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया.
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इसके बाद प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह प्राधिकार के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार तिवारी के मार्गदर्शन पर सचिव अभिषेक प्रसाद ने टीम का गठन कर आगे की कार्रवाई की और बच्ची को मदद पहुंचायी. प्राधिकार ने नाबालिग बच्ची का बयान दर्ज कर लिया है,जबकि रविवार को ही उसका नामांकन कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय कोडरमा में करा दिया गया.
नामांकन होने के बाद बच्ची चाइल्ड लाइन के संरक्षण से विद्यालय में पहुंच गयी है. अब वह वहीं पर रहकर पढ़ाई करेगी. इस बीच चाइल्ड लाइन ने बाल विवाह करवाने के मामले में कानूनी कार्रवाई करने के लिए प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) कोडरमा को पत्र लिखा है.
चाइल्ड लाइन के जिला समन्वयक अभिषेक कुमार ने बाल विवाह करवाने में शामिल रहे लोगों पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है. ज्ञात हो कि परिजनों ने बच्ची की शादी गिरिडीह के 22 वर्षीय युवक से कराने की पूरी तैयारी कर ली थी. इसी बीच मामले की जानकारी चाइल्ड लाइन को मिलने पर पुलिस प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर विवाह को रुकवाया.
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हालांकि, शुरुआत में परिजनों ने पुलिस प्रशासन की टीम को भी दिग्भ्रमित करने का प्रयास किया. पहले बताया गया कि लड़का नवादा बिहार का है. यही नहीं, टीम के सामने दूसरी बच्ची को प्रस्तुत कर दिया गया. बाद में कड़ाई से पूछताछ की गयी, तो मामला सामने आया.
इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार रांची के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने टीम का गठन किया. प्राधिकार के सचिव अभिषेक प्रसाद, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी नरेंद्र कुमार सिंह, प्राधिकार के कर्मी रंजीत कुमार सिंह, राज कुमार राउत, संतोष कुमार, पीएलवी नेहा सिन्हा ने बाल कल्याण समिति, चाइल्ड लाइन व कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन से सहयोग प्राप्त कर इस मामले की उचित छानबीन की.
प्राधिकार के निर्देश पर जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी ने एजुकेशन किट व कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन ने कपड़ा, कंबल व फूड पैकेट आदि बच्ची को दिया. प्राधिकार ने स्पांसरशिप स्कीम का लाभ दिलाने सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का भी निर्देश जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी को दिया है.
कोडरमा से विकास कुमार की रिपोर्ट
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