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75वें गणतंत्र दिवस पर आ गई देश की प्यारी सवारी काइनेटिक ई-लूना

Updated at : 26 Jan 2024 12:23 PM (IST)
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75वें गणतंत्र दिवस पर आ गई देश की प्यारी सवारी काइनेटिक ई-लूना

साल 1972 में काइनेटिक इंजीनियरिंग ने काइनेटिक लूना मोपेड की शुरुआत की थी. सिटी राइड के लिए तैयार की गई लूना एक हल्के वजन की आसानी से चलने वाली मोपेड के रूप में सामने आई. इसमें कॉम्पैक्ट इंजन, ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन और शहरवासियों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए साइकिल का पैडल भी दिया गया था.

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Kinetic E-Luna: 75वें गणतंत्र दिवस के मौके पर वर्ष 1970-80 के दशक के दौरान भारत की पहली हाइब्रिड काइनेटिक लूना को इलेक्ट्रिक अवतार में पेश कर दिया गया है. साइकिल और मोटरसाइकिल के मिश्रित वर्जन वाली यह बाइक देश के लोगों को इतनी पसंद आई कि यह कुछ ही सालों में काफी पॉपुलर हो गई. उस समय काइनेटिक लूना महज 2000 रुपये में मिल जाती थी. अब जबकि इसे इलेक्ट्रिक अवतार में पेश किया गया है, तो इसकी कीमत 72,000 रुपये से 75,000 रुपये के बीच रखा गया है. इसे आप 500 रुपये देकर बुक करा सकते हैं. काइनेटिक ग्रीन ने काइनेटिक ई-लूना की बुकिंग की शुरुआत कर दी है.

भारत की पहली हाइब्रिड सवारी थी लूना

बता दें कि साल 1972 में काइनेटिक इंजीनियरिंग ने काइनेटिक लूना मोपेड की शुरुआत की थी. सिटी राइड के लिए तैयार की गई लूना एक हल्के वजन वाली आसानी से चलने वाली मोपेड के रूप में सामने आई. इसमें एक कॉम्पैक्ट इंजन, ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन और शहरवासियों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए साइकिल का पैडल भी दिया गया था, ताकि पेट्रोल खत्म होने के बाद आप इसे साइकिल की तरह चलाकर अपने गंतव्य तक पहुंच सकें. इसीलिए इसे देश की पहली हाइब्रिड सवारी भी कहा जाता है.

लूना का डिजाइन

काइनेटिक लूना में विशेष रूप से एक ऑटो चोक प्रणाली शामिल है, जो वाहन की स्टार्टअप प्रक्रिया को सरल बनाती है. इसके अलावा, इसमें वैरियोमैटिक ट्रांसमिशन की सुविधा थी. यह एक अग्रणी प्रगति थी, जिसने मैन्युअल गियर शिफ्टिंग की आवश्यकता को हटा दिया. काइनेटिक लूना ने अपनी असाधारण ईंधन दक्षता, सामर्थ्य और ग्राहकों के अनुकूल डिजाइन के कारण तेजी से व्यापक लोकप्रियता हासिल की, जिससे खुद को उपभोक्ताओं के बीच एक पसंदीदा विकल्प के रूप में स्थापित किया.

इलेक्ट्रिक अवतार में आई ई-लूना

अब काइनेटिक लूना इलेक्ट्रिक अवतार के साथ अपना पहले वाला नेमप्लेट लेकर अब वापस आ गई है. काइनेटिक ने आधिकारिक तौर पर भारत में ई-लूना के लिए प्री-बुकिंग शुरू कर दी है और इसे बिक्री के लिए अमेजन जैसी वेबसाइटों पर भी सूचीबद्ध किया गया है. एक्स-शोरूम में इसकी शुरुआती कीमत 71,990 रुपये से 74,990 रुपये तक जाती है. मूल मॉडल की तरह काइनेटिक ई-लूना को एक बुनियादी डिजाइन मिलता है.

ई-लूना का डिजाइन

अतिरिक्त भंडारण के लिए पीछे की सीट को हटाया जा सकता है और इस प्रकार इसकी व्यावहारिकता और बढ़ सकती है. इलेक्ट्रिक मोपेड की सीट की ऊंचाई 760 मिमी है और इसका वजन सिर्फ 96 किलोग्राम है. यह शुरुआती और पहली बार यात्रा करने वालों सहित सवारियों की एक विस्तृत शृंखला को पूरा करेगी. यह एक डिजिटल डिस्प्ले, अतिरिक्त सुरक्षा के लिए एक साइड स्टैंड कट-ऑफ फ़ंक्शन और एक यूएसबी चार्जिंग सुविधा के साथ आता है.

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ई-लूना की लुक और बैटरी

काइनेटिक ई-लूना को फिलहाल दो पेंट स्कीम मलबेरी रेट और ओशन ब्लू में पेश किया गया है. इसके हब पर मोटर लगाई गई है. इसका पीक टॉर्क आउटपुट 22 एनएम है. इसमें 2 किलोवॉट बैटरी पैक का इस्तेमाल किया गया है, जिसे चार घंटे में 100 फीसदी तक रीचार्ज किया जा सकता है. दावा किया गया है कि एक बार चार्ज करने पर राइडिंग रेंज 110 किमी तक है.

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ई-लूना की टॉप स्पीड

काइनेटिक ई-लूना की टॉप स्पीड 52 किमी प्रति घंटे तक है और यह एक ट्यूबलर फ्रेम पर स्थित है. सस्पेंशन को सामने की तरफ साधारण टेलीस्कोपिक फोर्क्स और पीछे की तरफ ट्विन-साइडेड शॉक एब्जॉर्बर द्वारा नियंत्रित किया जाता है. ब्रेकिंग आगे और पीछे ड्रम ब्रेक द्वारा की जाती है और ई-मोपेड टीवीएस यूरोग्रिप टायरों में लिपटे 16 इंच के स्पोक पहियों पर चलती है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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