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पार्थ चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी से ईडी के अफसरों ने जेल में की पूछताछ

Updated at : 17 Aug 2022 6:43 PM (IST)
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पार्थ चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी से ईडी के अफसरों ने जेल में की पूछताछ

West Bengal News: अर्पिता के टाॅलीगंज स्थित फ्लैट में छापेमारी के दौरान ईडी के अधिकारियों को एक ब्लैक डायरी मिली थी. उक्त डायरी से मिले तथ्यों की जांच के बाद ही ईडी, अर्पिता से पूछताछ करना चाहती थी.

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पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग के जरिये स्कूलों में हुई नियुक्तियों के घोटाले में गिरफ्तार पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी फिलहाल न्यायिक हिरासत मेें हैं. उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी भी अलीपुर केंद्रीय महिला संशोधनागार में न्यायिक हिरासत की अवधि काट रही हैं. अर्पिता के ठिकानों से प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) ने करीब 50 करोड़ रुपये बरामद किये थे. उक्त मामले की जांच के तहत अदालत की अनुमति पर ईडी के अधिकारियों ने अर्पिता से जेल में ही पूछताछ की.

अर्पिता मुखर्जी के घर से मिली थी ब्लैक डायरी

अर्पिता के टाॅलीगंज स्थित फ्लैट में छापेमारी के दौरान ईडी के अधिकारियों को एक ब्लैक डायरी मिली थी. उक्त डायरी से मिले तथ्यों की जांच के बाद ही ईडी, अर्पिता से पूछताछ करना चाहती थी. मंगलवार को दोपहर करीब 12:30 बजे ईडी के तीन अधिकारी अलीपुर केंद्रीय महिला संशोधनागार पहुंचे. सूत्रों की मानें, तो वहां जेल अधीक्षक के कक्ष में अर्पिता से पूछताछ की गयी.

अर्पिता से ईडी ने पूछे ये सवाल

बताया जा रहा है कि अर्पिता से उनके फ्लैट में करोड़ों रुपये कहां से आये थे, उन्हें कहां भेजा जाना था, इन सब सवालों के जवाब जानने की कोशिश की गयी. यह भी पूछा गया कि उन रुपयों का पार्थ से क्या संबंध है. हालांकि, इस संबंध में ईडी की ओर से आधिकारिक रूप से कुछ भी नहीं बताया गया है. गौरतलब है कि ईडी की छापेमारी के दौरान अर्पिता के ठिकानों से करोड़ों के नगद के साथ ही पांच करोड़ रुपये मूल्य से ज्यादा के आभूषण, जमीन के कागजात व विदेशी मुद्रा बरामद हुई थी.

उम्रकैद की सजा काट रहे 99 बंदी हुए रिहा

स्वतंत्रता दिवस पर पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के जेलों से आजीवन कारावास की सजा काट रहे 99 कैदियों को रिहा करने की घोषणा की थी. उसके अनुरूप मंगलवार सुबह विभिन्न जेलों से कैदियों को रिहा कर दिया गया. रिहा होने वालों में ज्यादातर कैदी उम्रकैद की सजा काट रहे अपराधी हैं. इस दौरान किसी ने अपने माता-पिता को खो दिया, तो किसी का कोई नहीं रहा. किसी के परिजन कभी नहीं मिले. कारागार के गेट से बाहर निकलने के बाद कैदियों ने आसपास देखा, तो किसी के रिश्तेदार आये थे, तो किसी का कोई नहीं था.

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