ePaper

Durga Puja: सरायकेला राजघराने की दुर्गापूजा कई मायनों में है खास, 16 दिनों तक होती है मां की आराधना

Updated at : 22 Sep 2022 6:03 PM (IST)
विज्ञापन
Durga Puja: सरायकेला राजघराने की दुर्गापूजा कई मायनों में है खास, 16 दिनों तक होती है मां की आराधना

सरायकेला रजवाड़े की दुर्गापूजा काफी मायनों में खास है. यहां जिउतियाष्टमी से लेकर महाष्टमी तक यानी 16 दिनों तक माता की आराधना होती है. माता के दराबर में अखंड ज्योत जलती है. सदियों से चली आ रही परांपरा को आज भी राज परिवार के सदस्य उत्साह के साथ निभा रहे हैं.

विज्ञापन
undefined
कई मायनों में खास है रजवाड़े की दुर्गापूजा

सरायकेला के रजवाड़ी की दुर्गापूजा कई मायनों में खास है. इस रजवाड़े में 16 दिनों तक मां दुर्गा की पूजा करने की परंपरा है. रजवाड़े स्थित पाउड़ी मंदिर में मां दुर्गा की पूजा जिउतियाष्टमी से लेकर महाष्टमी तक होती है. इस दौरान 16 दिनों तक माता के मंदिर में अखंड ज्योत जलती रही. 17 सितंबर की रात जिउतिया पर शुरू हुई माता की पूजा दो अक्टूबर को नवरात्र के महाष्टमी के दिन संपन्न होगी.

undefined
राज परिवार के सदस्य खरकई नदी के तट पर करते हैं शस्त्र पूजा

दुर्गापूजा के पहले दिन षष्ठी के दिन राजा तथा राजपरिवार के सदस्य खरकई नदी के तट पर शस्त्र पूजा करते हैं. दुर्गा पूजा के दौरान रजवाड़े के भीतर में नवपत्रिका दुर्गा पूजा का भी आयोजन किया जाता है. सदियों से चली आ रही इस परंपरा को सरायकेला के राजा प्रताप आदित्य सिंहदेव के साथ-साथ राजपरिवार के सदस्य श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ निभाते हैं. इस दौरान पूजा में राजा प्रताप आदित्य सिंहदेव, रानी अरुणिमा सिंहदेव समेत राजपरिवार के सभी सदस्य शामिल होते हैं.

undefined
64 पीढ़ियों से मां दुर्गा की पूजा करते आ रहे हैं सरायकेला राजपरिवार

सरायकेला राजपरिवार की 64 पीढ़ियां निर्वाध रूप से मां दुर्गा की पूजा आराधना करते आ रहे हैं. सन् 1620 में राजा विक्रम सिंह द्वारा सरायकेला रियासत की स्थापना के बाद से ही राजमहल परिसर में मां दुर्गा की पूजा की शुरुआत हुई थी. सरायकेला रियासत के स्थापना से लेकर भारत की आजादी तक सिंह वंश के 61 पीढ़ियों ने राजा के रूप में राजपाट चलाया और माता दुर्गा की पूजा की. देश की आजादी के बाद सिंह वंशज के 62 पीढ़ी के राजा आदित्य प्रताप सिंहदेव एवं 63वें पीढ़ी के राजा सत्य भानु सिंहदेव ने मां दुर्गा के पूजा को आगे बढ़ाया. वर्तमान में सरायकेला रियासत के राजा और सिंह वंश के 64वें पीढ़ी के राजा प्रताप आदित्य सिंहदेव इस रियासती परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. यहां मां भगवती की पूजा आज भी उसी परंपरा के साथ होती है, जो कभी राजा-राजवाड़े के समय हुआ करती थी.

undefined
मां पाउडी मंदिर के दीवार में लिखा गया संदेश

शक्ति की देवी और राजघराने की इष्टदेवी मां पाउड़ी का मंदिर राजमहल के भीतर स्थित है. दुर्गापूजा में महाष्टमी पूजा के दूसरे दिन नुआखाई का आयोजन किया जाता है. नुआखाई के बाद राजपरिवार के सदस्य मां पाउड़ी मंदिर में जाते हैं. इस दिन साल के नये फसल से तैयार चावल का भोग देवी को समर्पित की जाती है. इसके बाद राजपरिवार के सदस्य नुआईखाई का प्रसाद सेवन करते हैं. इस मंदिर में स्त्री को केवल साड़ी पहनकर तथा पुरुष को केवल धोती और गमछा पहनकर जाने की परंपरा है.

रिपोर्ट : शचिंद्र कुमार दाश, सरायकेला.

विज्ञापन
Samir Ranjan

लेखक के बारे में

By Samir Ranjan

Senior Journalist with more than 20 years of reporting and desk work experience in print, tv and digital media

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola