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Maa Durga Ji Ki Aarti: जय अम्बे गौरी . . . माता की इस आरती को गाकर करें दुर्गा मां को प्रसन्न

Updated at : 07 Oct 2021 7:51 AM (IST)
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Maa Durga Ji Ki Aarti: माना जाता है कि माता अम्बे गौरी की आरती करने से मनुष्य के सभी दुख दूर हो जाते हैं, साथ ही घर में धन, वैभव और सुख-समृद्धि का वास होता है.

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दुर्गा मां शक्ति, पराक्रम और सौंदर्य का प्रतीक हैं. देवी पार्वती और मां दुर्गा का योद्धा रूप ब्रह्मांड में शांति लाने के लिए और नकारात्मकता शक्तियों को दूर करने के लिए जाना जाता है. नवरात्रि के पावन अवसर पर लोग मां दुर्गा की आरती करते हैं. माना जाता है कि माता अम्बे गौरी की आरती करने से मनुष्य के सभी दुख दूर हो जाते हैं, साथ ही घर में धन, वैभव और सुख-समृद्धि का वास होता है.

Maa Durga Ji Ki Aarti: जय अम्बे गौरी . . .

जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी।

तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव री ॥1॥

मांग सिंदूर बिराजत टीको मृगमद को ।

उज्ज्वल से दोउ नैना चंद्रबदन नीको ॥2॥

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै।

रक्तपुष्प गल माला कंठन पर साजै ॥3॥

केहरि वाहन राजत खड्ग खप्परधारी ।

सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुःखहारी ॥4॥

कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती ।

कोटिक चंद्र दिवाकर राजत समज्योति ॥5॥

शुम्भ निशुम्भ बिडारे महिषासुर घाती ।

धूम्र विलोचन नैना निशिदिन मदमाती ॥6॥

चौंसठ योगिनि मंगल गावैं नृत्य करत भैरू।

बाजत ताल मृदंगा अरू बाजत डमरू ॥7॥

भुजा चार अति शोभित खड्ग खप्परधारी।

मनवांछित फल पावत सेवत नर नारी ॥8॥

कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती ।

श्री मालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योति ॥9॥

श्री अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै ।

कहत शिवानंद स्वामी सुख-सम्पत्ति पावै ॥10॥

दुर्गा मां के इन मंत्रों का करें जाप:

1. सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

2. ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

3. या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

Posted By: Shaurya Punj

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