Dhanteras 2023 Kab Hai: दो दिन बाद धनतेरस, जानें तिथि मुहूर्त और धनतेरस पूजा का समय
Published by : Shaurya Punj Updated At : 08 Nov 2023 7:00 AM
Dhanteras 2023 Kab Hai: कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 10 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर शुरू होगी और 11 नवंबर को दोपहर 01 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगी.धनतेरस तिथि पर प्रदोष काल में पूजा की जाती है.अतः 10 नवंबर को धनतेरस मनाया जाएगा.
Dhanteras 2023 Kab Hai: धनतेरस कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाने वाला त्यौहार है.धन तेरस को धन त्रयोदशी व धन्वंतरि जंयती के नाम से भी जाना जाता है.मान्यता है कि इस दिन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के जनक धन्वंतरि देव समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. इसलिए धन तेरस को धन्वंतरि जयंती भी कहा जाता है.धन्वंतरि देव जब समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे उस समय उनके हाथ में अमृत से भरा कलश था.इसी वजह से धन तेरस के दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है.धनतेरस पर्व से ही दीपावली की शुरुआत हो जाती है.
Dhanteras 2023: शुभ मुहूर्त
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 10 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर शुरू होगी और 11 नवंबर को दोपहर 01 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगी.धनतेरस तिथि पर प्रदोष काल में पूजा की जाती है.अतः 10 नवंबर को धनतेरस मनाया जाएगा.
Dhanteras 2023: प्रदोष काल
पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष काल संध्याकाल 05 बजकर 30 मिनट से शुरू होगा और शाम 08 बजकर 08 मिनट पर समाप्त होगा.वहीं, वृषभ काल भी संध्याकाल 05 बजकर 47 मिनट से लेकर 07 बजकर 34 मिनट तक है.धनतेरस तिथि पर दोनों ही काल में पूजा कर सकते हैं.
Dhanteras 2023: धनतेरस की पूजा विधि और धार्मिक कर्म
मानव जीवन का सबसे बड़ा धन उत्तम स्वास्थ है, इसलिए आयुर्वेद के देव धन्वंतरि के अवतरण दिवस यानि धन तेरस पर स्वास्थ्य रूपी धन की प्राप्ति के लिए यह त्यौहार मनाया जाना चाहिए.
1. धनतेरस पर धन्वंतरि देव की षोडशोपचार पूजा का विधान है.षोडशोपचार यानि विधिवत 16 क्रियाओं से पूजा संपन्न करना.इनमें आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन (सुगंधित पेय जल), स्नान, वस्त्र, आभूषण, गंध (केसर-चंदन), पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, आचमन (शुद्ध जल), दक्षिणायुक्त तांबूल, आरती, परिक्रमा आदि है.
2. धनतेरस पर पीतल और चांदी के बर्तन खरीदने की परंपरा है.मान्यता है कि बर्तन खरीदने से धन समृद्धि होती है.इसी आधार पर इसे धन त्रयोदशी या धनतेरस कहते हैं.
3. इस दिन शाम के समय घर के मुख्य द्वार और आंगन में दीये जलाने चाहिए.क्योंकि धनतेरस से ही दीपावली के त्यौहार की शुरुआत होती है.
4. धनतेरस के दिन शाम के समय यम देव के निमित्त दीपदान किया जाता है.मान्यता है कि ऐसा करने से मृत्यु के देवता यमराज के भय से मुक्ति मिलती है.
धनतेरस पर क्या खरीदें
ऐसी मान्यता है कि धनतेरस के दिन खरीदी गई चीजों में 13 गुना बढ़ोतरी होती है.इसी वजह से लोग इस दिन बर्तनों के खरीदारी के अलावा सोने-चांदी की चीज भी खरीदते हैं.भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना करने से जीवन में धन धन की संपन्नता बनी रहती है, वही इस दिन सोना चांदी या कोई बर्तन खरीदना बेहद शुभ माना जाता है.
धनतेरस पर खरीदें ये चीजें
धनतेरस के दिन सोना-चांदी के अलावा बर्तन, वाहन और कुबेर यंत्र खरीदना शुभ होता है. इसके अलावा झाड़ू खरीदना भी अच्छा माना जाता है. मान्यता है इस दिन झाड़ू खरीदने से मां लक्ष्मी मेहरबान रहती हैं.
धनतेरस 2023 की पूजा विधि
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धनतेरस के दिन शाम के वक्त यानी प्रदोष के दौरान काल शुभ मुहूर्त में उत्तर की ओर कुबेर और धन्वंतरि देव की प्रतिमा स्थापित करें.
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साथ ही मां लक्ष्मी व गणेश जी की भी प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. फिर दीप प्रज्वलित करें और विधिवत पूजी शुरू करें.
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सभी देवों को तिलक लगाएं. इसके बाद पुष्प, फल आदि चीजें अर्पित करें.
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कुबेर देवता को सफेद मिष्ठान और धन्वंतरि देव को पीले मिष्ठान का भोग लगाएं.
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पूजा के दौरान ‘ऊँ ह्रीं कुबेराय नमः’ इस मंत्र का जाप करते रहें.
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भगवान धन्वंतरि को प्रसन्न करने के लिए इस दिन धन्वंतरि स्तोत्र का पाठ जरूर करें.
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By Shaurya Punj
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