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सिंगूर से TATA परियोजना को हटाने के लिए TMC नहीं, CPM जिम्मेवार, उत्तर बंगाल में बोलीं ममता बनर्जी

Updated at : 19 Oct 2022 9:24 PM (IST)
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सिंगूर से TATA परियोजना को हटाने के लिए TMC नहीं, CPM जिम्मेवार, उत्तर बंगाल में बोलीं ममता बनर्जी

ममता बनर्जी ने सरकारी समारोह में कहा कि ऐसे लोग हैं, जो अफवाह फैला रहे हैं कि मैंने टाटा को पश्चिम बंगाल (West Bengal) से भगा दिया है. मैंने उन्हें जाने के लिए मजबूर नहीं किया, बल्कि यह माकपा थी, जिसने उन्हें भगाया.

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने दावा किया है कि राज्य के सिंगूर से टाटा (TATA) कंपनी की परियोजना को उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने नहीं, बल्कि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) ने भगाया था. मुख्यमंत्री ने बुधवार को उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी में विजया सम्मिलनी (Vijaya Sammilani in Siliguri) को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं. उन्होंने कहा कि सिंगूर से टाटा कंपनी हमारी वजह से नहीं गयी.

मैंने सिर्फ किसानों की जमीनें लौटायी थी- ममता बनर्जी

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने केवल किसानों की वे जमीनें लौटायीं थीं, जिन्हें हुगली जिले के सिंगूर में टाटा मोटर्स (TATA Motors) की नैनो कार (Nano Car) फैक्टरी के लिए पूर्व की वाम मोर्चा सरकार ने जबरन अधिग्रहीत किया था. उन्होंने सरकारी समारोह में कहा कि ऐसे लोग हैं, जो अफवाह फैला रहे हैं कि मैंने टाटा को पश्चिम बंगाल (West Bengal) से भगा दिया है. मैंने उन्हें जाने के लिए मजबूर नहीं किया, बल्कि यह माकपा थी, जिसने उन्हें भगाया.

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माकपा ने टाटा के लिए जबरन जमीन ली थी

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने इस कार्यक्रम में कोई राजनीतिक बयान न देने के बारे में सोचा था. उन्होंने कहा कि आपने (माकपा ने) परियोजना के लिए लोगों से जबरन जमीन ली थी, हमने वह जमीन लोगों को लौटा दी. हमने बहुत सारी परियोजनाएं की हैं, लेकिन कभी किसी से जबरन जमीन नहीं ली. हम जबरन जमीन क्यों लें? यहां जमीन की कोई कमी नहीं है.

ममता बनर्जी के आंदोलन की विरोधी करते हैं निंदा

सिंगूर में वर्ष 2000 के दशक के मध्य में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन के लिए ममता बनर्जी की अक्सर उनके विरोधियों, विशेष रूप से माकपा द्वारा आलोचना की जाती है, जिसकी वजह से टाटा समूह को अपनी महत्वाकांक्षी नैनो कार निर्माण परियोजना को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा, जबकि इस परियोजना का कुछ काम पूरा भी हो चुका था. इस परियोजना से हजारों नौजवानों को नौकरियां मिलती. इस आंदोलन ने राज्य में ममता बनर्जी को सत्ता के द्वार तक पहुंचाया था और उन्होंने वर्ष 2011 में 34 साल की वाम मोर्चा सरकार को शिकस्त दी थी.

बंगाल में कोई भेदभाव नहीं

अडाणी समूह की ताजपुर बंदरगाह परियोजना और देउचा पचामी कोयला खदान परियोजना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाल में कोई भेदभाव नहीं है. हम चाहते हैं कि हर उद्योगपति यहां निवेश करें. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हमारी सरकार का लक्ष्य नये उद्योग स्थापित करना है. फिर भी वह किसी भी परियोजना के लिए जबरन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ हैं. मुख्यमंत्री ने दावा किया कि वर्ष 2011 में हमारे सत्ता में आने के बाद से कई औद्योगिक परियोजनाएं शुरू की गयी हैं. लेकिन, किसी भी परियोजना के लिए जबरन भूमि अधिग्रहण नहीं हुआ है.

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लोगों को रोजगार देना नहीं करेंगे बंद

महानगर में स्कूली नौकरियों के लिए चल रहे आंदोलन की ओर इशारा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार लोगों को रोजगार देना जारी रखेगी. हालांकि, ऐसी ताकतें हैं, जो बाधा पैदा करती हैं. ममता बनर्जी ने कहा कि मैं यहां बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना चाहती हूं. ऐसी ताकतें हैं, जो नहीं चाहतीं कि लोगों को रोजगार मिले. वे उनके लिए बाधा उत्पन्न कर रहे हैं. हम लोगों को रोजगार देना बंद नहीं करेंगे. हम उन्हें नियमित रूप से रोजगार देंगे और नौकरी नहीं छीनेंगे.

दुर्गा पूजा से पहले रतन टाटा ने की थी परियोजना वापस लेने की घोषणा

गौरतलब है कि वर्ष 2008 में दुर्गा पूजा से ठीक दो दिन पहले टाटा समूह के अध्यक्ष रतन टाटा ने हुगली जिले के सिंगूर से महत्वाकांक्षी नैनो छोटी कार परियोजना को वापस लेने की घोषणा की थी, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस के बड़े आंदोलन के कारण माकपा के नेतृत्व वाली तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ फैसला लिया था. माना जाता है कि 14 साल पहले की इस घटना से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के सामने पश्चिम बंगाल की छवि को तगड़ा झटका लगा था. इसके बाद तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद सरकार ने परियोजना के लिए किसानों से ली गयी जमीन को वापस कर दिया था.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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