Kodarma : काम के बदले 10-10 हजार देने के एवज में बालश्रम के लिए दिल्ली भेजे जा रहे तीन बाल श्रमिक मुक्त
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 29 May 2022 10:36 AM
बालश्रम के लिए दिल्ली ले जाये जा रहे बाल श्रमिकों को चाइल्ड लाइन व डोमचांच पुलिस की टीम ने मुक्त कराया है. इन सभी को पुरुषोत्तम एक्सप्रेस से दिल्ली ले जाने की तैयारी थी. पूर्व में मिली सूचना के आधार पर टीम ने इनका रेस्क्यू किया.
Kodarma News : बालश्रम के लिए दिल्ली ले जाये जा रहे बाल श्रमिकों को चाइल्ड लाइन व डोमचांच पुलिस की टीम ने मुक्त कराया है़ इन सभी को पुरुषोत्तम एक्सप्रेस से दिल्ली ले जाने की तैयारी थी. पूर्व में मिली सूचना के आधार पर टीम ने इनका रेस्क्यू किया. इस कार्रवाई के दौरान कोई तस्कर हाथ नहीं आया. संदेह होने पर बच्चों के साथ काम करने जा रहे तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गयी, पर इनकी भूमिका नहीं होने पर छोड़ दिया गया. बताते चलें कि इस बालश्रमिकों को काम के बदले 10-10 हजार रुपये देने की बात कही गयी थी.
मिली जानकारी के अनुसार गिरिडीह जिला के तिसरी प्रखंड के विभिन्न गांवों से एक तस्कर द्वारा 10 बच्चों को कोडरमा स्टेशन के रास्ते दिल्ली ले जाए जाने की सूचनाचाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर मिली. चाइल्ड लाइन को अज्ञात कॉलर ने बताया कि तिसरी से खुलने वाली बस नितेश में 10 बच्चों को बैठाकर कोडरमा स्टेशन ले जाया जा रहा है. इन सभी को पुरुषोत्तम एक्सप्रेस पकड़ना है.
सूचना के आधार पर कोडरमा की चाइल्डलाइन टीम ने डोमचांच थाना के सहयोग से नितेश बस को डोमचांच थाना के पास रुकवाया और तलाशी अभियान शुरू किया. इस दौरान तीन बच्चे नाबालिग पाये गये. बच्चों के साथ उसी गांव के तीन अन्य लोगों को भी थाना लाया गया. पूछताछ में उन्होंने बताया कि तिलैया स्टेशन पर एक व्यक्ति है, जिनके साथ हमलोगों को जाना है. हम सभी का टिकट भी उन्हीं के पास है. पुलिस ने बरामद तीन नाबालिग बच्चों को चाइल्डलाइन को सौंप दिया है. इस रेस्क्यू अभियान में चाइल्डलाइन के समन्वयक दीपक कुमार राणा, एएसआई दिलशाद कुमार, नीरज कुमार, चाइल्डलाइन टीम सदस्य मेरियन सोरेन, उमेश कुमार, मनीष लहेरी, शंकरलाल राणा, कुमारी ज्योति सिन्हा आदि शामिल थे़
लंबे समय से कोडरमा स्टेशन बाल तस्करी का हब बनता जा रहा है. यहां आसपास के आधा दर्जन से अधिक जिलों के यात्रियों का सीधा-सीधा आवागमन होता है. आए दिन बड़ी संख्या में मजदूरों का पलायन बड़े शहरों में हो रहा है. ऐसे मजदूरों के साथ बच्चे भी शामिल होते हैं. कई बार बाहरी तस्कर गांव में मजदूरों को बहला-फुसलाकर बड़े शहरों में काम दिलाने के नाम पर ले जाते हैं. इसमें मानव तस्करी का भी हिस्सा होने की पूरी संभावना होती है. इस प्रकरण में भी जिन नाबालिग को ले जाया जा रहा था उन्हें दलाल का नाम पता तक पता नहीं था. ऐसे में दिल्ली जाने के बाद इनका भविष्य क्या होता, यह किसी को नहीं पता. इस तरह पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं. अक्सर दलाल बच्चों के अभिभावकों को लालच देकर उन्हें अपने साथ ले जाते हैं. इस मामले में भी बताया जा रहा है कि सभी बच्चों को काम के बदले में दस-दस हजार रुपये दिए जाने की बात कही गई थी.
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