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कमरहट्टी में माकपा-तृणमूल की सीधी लड़ाई में भाजपा की एंट्री से बढ़ा सस्पेंस, चौंका सकते हैं परिणाम

Updated at : 19 Apr 2021 6:11 PM (IST)
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कमरहट्टी में माकपा-तृणमूल की सीधी लड़ाई में भाजपा की एंट्री से बढ़ा सस्पेंस, चौंका सकते हैं परिणाम

उत्तर 24 परगना जिले की कमरहट्टी विधानसभा सीट बंगाल की महत्वपूर्ण सीटों में शामिल है, जहां 2016 में माकपा ने तृणमूल उम्मीदवार मदन मित्रा को हराकर जीत दर्ज की थी. यह सीट शुरू से ही माकपा की गढ़ मानी जाती है. इस बार परिणाम चौंका सकते हैं.

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कोलकाता : उत्तर 24 परगना जिले की कमरहट्टी विधानसभा सीट बंगाल की महत्वपूर्ण सीटों में शामिल है, जहां 2016 में माकपा ने तृणमूल उम्मीदवार मदन मित्रा को हराकर जीत दर्ज की थी. यह सीट शुरू से ही माकपा की गढ़ मानी जाती है.

पहले चुनाव से लेकर अब तक इस सीट पर मात्र एक बार कांग्रेस और एक बार तृणमूल जीती है, जबकि 11 बार माकपा ने अपना परचम लहराया है, लेकिन विगत कुछ वर्षों में इस सीट से वोटों के आंकड़ों में उतार-चढ़ावा की वजह से चुनावी मैदान में किसी भी पार्टी के लिए जीत हासिल करना आसान नहीं है.

इस बार के चुनावी दंगल में माकपा को हराने के लिए तृणमूल एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया. पिछले कुछ सालों में बंगाल की राजनीति में मजबूत होकर उभरी भाजपा ने भी अपना पूरा दम-खम दिखाया. उसने तृणमूल और माकपा की सीधी लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया. इस बार माकपा की राह में दो फूल (भाजपा-तृणमूल) कांटे बन गये. इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि यहां के परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं.

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कमरहट्टी विधानसभा सीट दमदम संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आती है और यहां के सांसद सौगत राय हैं, जो तृणमूल से हैं. उन्होंने भाजपा के शमिक भट्टाचार्य को 53,002 वोटों से हराया था. कमरहट्टी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत कमरहट्टी नगरपालिका के एक से लेकर 16 नंबर वार्ड और 21 से लेकर 35 नंबर वार्ड का क्षेत्र आता है.

कमरहट्टी विधानसभा सीट का इतिहास

इस सीट पर 1967 में सबसे पहले माकपा ने परचम लहराया था. 1969 में ही हुए चुनाव में फिर से माकपा की ही जीत हुई थी. इस तरह से तीन बार जीत हासिल कर 1972 तक माकपा का यहां कब्जा रहा. 1972 में एक बार कांग्रेस ने जीत हासिल की लेकिन फिर से 1977 से लेकर सात बार लगातार यहां से माकपा जीत हासिल की.

वर्ष 2011 तक इस सीट पर माकपा का कब्जा रहा, लेकिन 2011 में तृणमूल की लहर में यह दुर्ग भी माकपा नहीं बचा पायी थी. 2011 के चुनाव में तृणमूल से मदन मित्रा विजयी हुए थे, लेकिन माकपा ने वापस अपने गढ़ में 2016 में लाल परचम लहरा दिया. माकपा के मानस मुखर्जी ने तृणमूल उम्मीदवार मदन मित्रा को यहां पराजित कर दिया.

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Posted By : Mithilesh Jha

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