1857 की क्रांति से संबंधित है Augharnath Mandir, देश के सबसे पुराने शिव मंदिरों में है ये धार्मिक स्थान

Published by : Shaurya Punj Updated At : 28 Aug 2023 5:59 PM

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Augharnath Mandir: मेरठ में औघड़नाथ मंदिर, जिसे काली पलटन मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, शहर का सबसे पुराना शिव मंदिर है और सबसे अधिक बार देखा जाने वाला मंदिर भी है. इस मंदिर में शिव लिंग को स्वयंभू माना जाता है, जो इसे भगवान शिव के भक्तों के बीच एक लोकप्रिय आकर्षण बनाता है.

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Augharnath Mandir: मेरठ महानगर में श्री बाबा औघड़नाथ शिव मंदिर एक प्राचीन सिद्धिपीठ है. इस मन्दिर में स्थापित लधुकाय शिवलिंग स्वयंभू, फलप्रदाता तथा मनोकामनायें पूर्ण करने वाले औघड़दानी शिवस्वरूप हैं. इसी कारण इसका नाम औघड़नाथ शिव मन्दिर पड़ गया.

1857 के स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित है इस मंदिर का इतिहास

मंदिर का ऐतिहासिक महत्व इस तथ्य से है कि इसने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. मंदिर में शिव लिंग के अलावा, राधा कृष्ण और देवी दुर्गा के मंदिर भी हैं. मुख्य रूप से शिव मंदिर होने के कारण, औघड़नाथ मंदिर में महाशिवरात्रि और पूर्णिमा जैसे अवसरों पर सैकड़ों भक्तों की भीड़ उमड़ती है.

यहीं फूंका गया था 1857 की क्रांति का बिगुल

इसी मंदिर से 1857 की क्रांति का बिगुल फूंका गया था. जानकारों की मानें तो बंदूक की कारतूस में गाय की चर्बी का इस्तेमाल होने के बाद सिपाही उसे मुंह से खोलकर इस्तेमाल करने लगे थे. तब मंदिर के पुजारी ने उन जवानों को मंदिर में पानी पिलाने से मना कर दिया. ऐसे में पुजारी की बात सेना के जवानों को दिल पर लग गई. उन्होंने उत्तेजित होकर 10 मई 1857 को यहां क्रांति का बिगुल बजा दिया. जानकारों के मुताबिक औघड़नाथ शिव मंदिर में कुएं पर सेना के जवान आकर पानी पीते थे. इसी ऐतिहासिक कुएँ पर बांग्लादेश के विजेता तत्कालीन मेजर जनरल श्री जगजीत सिंह अरोड़ा के कर कमलों द्वारा स्थापित शहीद स्मारक क्रान्ति के गौरवमय अतीत का ज्वलन्त प्रतीक है, जहाँ आज भी प्रति वर्ष 10 मई को भारत वर्ष स्वतंत्रता सेनानी इकटठे होकर शहीदो को अपनी पुष्पंजली अर्पित करते है. तथा सम्मेलन करते है.

पुराने लोग जानते है कि 1944 तक प्रशिक्षण केन्द्र से लगा हुआ वृक्षो के जंगल में छोटा-साफ शिव मन्दिर व उसके पास में कुआं (प्याऊ के रूप) विद्यमान था धीरे-धीरे मन्दिर के उत्थान के विचार से देवधिदेव महादेव प्रलयंकर भगवान शकर की इच्छा एवं प्रेरणा जानकर अक्तूबर 1968 को सायं 5 बजे नवीन मन्दिर का शिलन्यास वैद मंत्रो की तुमुल ध्वनि के मध्य ब्रह्मलीन ज्योतिषीठाधीशवर अनन्तश्री विभूषित जगत गुरू शंकराचार्य कृष्णबोधाश्रम जी के कर कमलो द्वारा सम्पन्न हुआ प्रगति क्रम-परम्परा मे चार वर्ष पश्चात् 13 फरवरी 72 मे नई देव प्रतिमाओं का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव हुआ.

औघड़नाथ मंदिर का समय

औघड़नाथ का मंदिर सप्ताह के सभी दिन खुला रहता है. कोई भी व्यक्ति किसी भी दिन सुबह 5 बजे से शाम 10 बजे तक दर्शन कर सकता है.

औघड़नाथ मंदिर कहां स्थित है

औघरनाथ मंदिर मेरठ कैंट, मेरठ, उत्तर प्रदेश 250001, भारत पर स्थित है.

औघड़नाथ मंदिर के बारे में रोचक तथ्य

परिसर में हाल ही में निर्मित कृष्ण मंदिर के साथ-साथ धार्मिक कार्यों, भजनों आदि के लिए एक बड़ा हॉल भी शामिल है.

औघड़नाथ मंदिर कहानियों और आख्यानों का खजाना है जिसने भारत के ताने-बाने को आकार दिया है.

मंदिर में 1857 के विद्रोह के शहीदों के सम्मान में एक स्मारक भी बनाया गया है.

औघड़नाथ मंदिर मेरठ में एक स्वयंभू शिवलिंग मौजूद है. इसे एक आधुनिक संस्करण द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है.

भक्तों का मानना है कि उनकी पूजा से शिव को प्रसन्न करके वे आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं और मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं.

औघड़नाथ मंदिर के आसपास घूमने की जगह

  • सरकारी स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय

  • पारिस्थितिक पार्क

  • भगत चौराहा

  • मुस्तफा महल

औघड़नाथ मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय

मेरठ के अधिकांश पर्यटन स्थलों की तरह औघड़नाथ मंदिर में भी साल भर जाया जा सकता है. हालांकि, सर्दियों के मौसम को मंदिर में जाने का सबसे अच्छा समय माना जाता है. अक्टूबर के महीने में शुरू होने वाली, मेरठ में गर्मियाँ और मानसून की तुलना में सर्दियाँ अधिक सुहावनी होती हैं. इस समय के दौरान, सुहावना मौसम यात्रियों को शहर का पूरी तरह से पता लगाने की अनुमति देता है. फरवरी के महीने में सीजन खत्म हो जाता है.

औघड़नाथ मंदिर कैसे पहुंचे

मंदिर बसों या ऑटो-रिक्शा द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है क्योंकि यह मेरठ शहर के केंद्र के करीब है.

हवाई जहाज द्वारा

इस क्षेत्र का निकटतम हवाई अड्डा इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है जो लगभग 100 किमी दूर है.

ट्रेन से

आप मेरठ कैंट रेलवे स्टेशन पहुंच सकते हैं जो मंदिर से सिर्फ 2.5 किमी दूर है.

सड़क द्वारा

2 मुख्य बस टर्मिनल हैं, अर्थात् भैंसाली बस टर्मिनल और सोहराब गेट बस टर्मिनल, जहाँ से उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की बसें पूरे राज्य और आसपास के शहरों के लिए चलती हैं.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

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शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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