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Ashadha Month 2023: आषाढ़ माह की होने वाली है शुरूआत, चातुर्मास में इन कार्यों को करने से मिलते हैं अशुभ फल

Updated at : 04 Jun 2023 1:31 PM (IST)
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Ashadha Month 2023: आषाढ़ माह की होने वाली है शुरूआत, चातुर्मास में इन कार्यों को करने से मिलते हैं अशुभ फल

Ashadha Month 2023:  हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि समाप्त होने के साथ आषाढ़ मास आरंभ हो जाएगा. आषाढ़ 5 जून से 3 जुलाई 2023 तक चलेगा. आषाढ़ का महीना इच्छाओं को पूरी करने वाला माना गया है.

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Ashadha Month 2023:   ज्येष्ठ के बाद आषाढ़ का महीना आता है. यह हिंदू कैलेंडर के अनुसार वर्ष का चौथा महीना है. इस महीने शिव और विष्णु की पूजा करना बहुत शुभ होता है. आषाढ़ 5 जून से 3 जुलाई 2023 तक चलेगा. आषाढ़ का महीना इच्छाओं को पूरी करने वाला माना गया है.

आषाढ़ माह में मनाए जाएंगे कई व्रत त्योहार

आषाढ़ माह कई बड़े व्रत और त्यौहार पड़ते हैं जैसे योगिनी एकादशी, प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि, हलहारिणी अमावस्या, आषाढ़ अमावस्या, गुप्त नवरात्रि जगन्नाथ रथ यात्रा आदि.

आषाढ़ मास कब से हो रहा है शुरू?

हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि समाप्त होने के साथ आषाढ़ मास आरंभ हो जाएगा. आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 4 जून को सुबह 9 बजकर 11 मिनट से आरंभ होकर 5 जून सुबह 6 बजकर 39 मिनट से है. ऐसे में आषाढ़ मास का आरंभ 5 जून 2023 से हो रहा है. इसके साथ ही समापन गुरु पूर्णिमा को 3 जुलाई 2023 को समाप्त हो जाएगा.

इन कार्यों को करने से मिलते हैं अशुभ फल!

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं. इस तरह चातुर्मास शुरू हो जाता है. इन दिनों विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि सभी शुभ कार्यक्रमों पर रोक लगा दी जाती है क्योंकि इस समय इन कार्यों को करने से अशुभ फल मिलते हैं और जीवन में कठिनाइयां बढ़ने लगती हैं. पंचांग के अनुसार इस साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी 29 जून 2023 को है, इसी दिन से चातुर्मास की शुरुआत हो रही है. चातुर्मास की समाप्ति कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी पर होती है. ऐसे में 23 नवंबर 2023 को चातुर्मास खत्म होंगे.

इस दौरान ना करें इन चीजों का सेवन

मान्यता है कि इस व्रत में दूध, तेल, बैंगन, पत्तेदार सब्जियां, नमकीन या मसालेदार भोजन का त्याग कर देना चाहिए. साथ ही इस व्रत में सुपारी, मांस और मदिरा का सेवन नहीं किया जाता है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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