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आनंद महिंद्रा ने एक बार फिर जीता दिल, इस महिला खिलाड़ी को कहा- जो कार चाहिए चुन लो!

Updated at : 29 Oct 2023 1:43 PM (IST)
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आनंद महिंद्रा ने एक बार फिर जीता दिल, इस महिला खिलाड़ी को कहा- जो कार चाहिए चुन लो!

हाल ही में संपन्न एशियाई पैरा गेम्स में अपनी प्रतिभा दिखाने वाली तीरंदाज शीतल देवी को भी एक विशेष कार भेंट की जाएगी. आनंद महिंद्रा ने अपनी कंपनी द्वारा पेश की गई कारों में से किसी एक को चुनने की पेशकश की. उन्होंने इसे उसकी विशेष ज़रूरतों के अनुरूप बनाने का वादा किया.

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महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा प्रतिभा की पहचान करने में सबसे आगे रहते हैं. एकबार फिर उन्होंने ये साबित कर दिया की वे भारत के सभी प्रतिभाशाली लोगों के साथ खड़े हैं. मालूम हो कि वह पहले भी कई बार एथलीटों और आम लोगों की प्रतिभा को पहचान चुके हैं और पुरस्कार दे चुके हैं. हाल ही में संपन्न एशियाई पैरा गेम्स में अपनी प्रतिभा दिखाने वाली तीरंदाज शीतल देवी को भी एक विशेष कार भेंट की जाएगी. उन्होंने उसे अपनी कंपनी द्वारा पेश की गई कारों में से किसी एक को चुनने की पेशकश की. उन्होंने इसे उसकी विशेष ज़रूरतों के अनुरूप बनाने का वादा किया.


एशियन पैरा गेम्स में तीरंदाज शीतल देवी ने 3 गोल्ड जीते 

एशियन पैरा गेम्स में तीरंदाज शीतल देवी ने तीरंदाजी की विभिन्न श्रेणियों में भारत के लिए तीन पदक (2 स्वर्ण, 1 रजत) जीते. उनके जज्बे और प्रतिभा से मंत्रमुग्ध होकर आनंद महिंद्रा (आनंद महिंद्रा) ने ‘एक्स’ पर शीतल की जिंदगी की कहानी बताते हुए एक खास वीडियो पोस्ट किया है. उन्होंने टिप्पणी की कि वह सभी के लिए एक शिक्षक हैं. उन्होंने कहा कि वह अब छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर शिकायत नहीं करेंगे. कहना न होगा कि उसकी बाधाओं के सामने हमारी समस्याएँ तुच्छ हैं. जिस तरह से उन्होंने आसानी से उन सभी पर काबू पाया और पदक जीते उससे महिंद्रा मंत्रमुग्ध हो गए.

शीतल देवी के दोनों हाथ नहीं 

तीरंदाज शीतल देवी ने एशियन पैरा गेम्स जीता. दोनों हाथ नहीं रखने वाले इस तीरंदाज ने इन खेलों में दो हरे पदक लेकर रिकॉर्ड बनाया है. महिला कंपाउंड व्यक्तिगत वर्ग के फाइनल में पसिडी ने अलीम शाहिदा (सिंगापुर) को हराया. मिश्रित टीम में स्वर्ण पदक जीता. जम्मू-कश्मीर की यह तीरंदाज एक ही खेल में दो पीले पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट बनीं. तीरंदाज शीतल देवी ने भी महिला युगल में रजत पदक जीता. हांग्जो में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में उन्होंने कुल मिलाकर तीन पदक जीते.

शीतल देवी ने एक दुर्घटना में दोनों हाथ खो दिया था 

शीतल देवी का जन्म किश्तवाड़, जम्मू कश्मीर में हुआ था. उन्होंने बचपन में एक दुर्घटना में अपने दोनों हाथ खो दिए थे. लेकिन उन्होंने तीरंदाजी में अपना करियर बनाने का फैसला किया. उन्होंने 2022 के पैरा विश्व तीरंदाजी चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीता था.

दोनों हाथों के बिना प्रतिस्पर्धा करने वाली दुनिया की एकमात्र तीरंदाज

तीरंदाजी में तीरंदाज एक हाथ से धनुष पकड़ते हैं और दूसरे हाथ से तीर चलाते हैं. ऐसा है बिना दो हाथों के तीर चलाना! वह कल्पना कठिन है न! लेकिन शीतल देवी (तीरंदाज शीतल देवी) ने इसे सच कर दिखाया. दो हाथ न होने के बावजूद जम्मू-कश्मीर की इस लड़की ने अपने पैरों को हाथों की तरह इस्तेमाल कर पदक जीते. तीरंदाज शीतल देवी वर्तमान में दोनों हाथों के बिना प्रतिस्पर्धा करने वाली दुनिया की एकमात्र तीरंदाज हैं. 16 साल की शीतल ने वास्तव में धनुष उठाया और यह बहुत अच्छी बात थी. एक गरीब परिवार में जन्मी फ़ोकोमेलिया नामक बीमारी के कारण उसके हाथ नहीं बढ़ सके. हालाँकि, उसने अपने पैरों से काम करना सीख लिया. भारतीय सेना द्वारा आयोजित एक खेल शिविर में भाग लेने से उनका जीवन बदल गया. खेलों में रुचि बढ़ाने वाली शीतल को तीरंदाजी पसंद आई.

शीतल का लक्ष्य 2024 पेरिस पैरालिंपिक में भी एडरागोटी मेडल जीतना है

कोच कुलदीप वेदवान के प्रशिक्षण में ओनामालु सीखने वाली तीरंदाज शीतल देवी ने दोनों हाथ न होने के बावजूद पैरों से तीर चलाने का अभ्यास किया. एक पैर से धनुष को पकड़ना.. दूसरे पैर से तीर उठाना.. मुंह से प्रत्यंचा खींचना और छोड़ना. वह धीरे-धीरे आम तीरंदाजों से प्रतिस्पर्धा करने लगीं और गुजरात में आयोजित अंडर-18 टूर्नामेंट में भाग लेकर अपनी ताकत दिखाई. चेक गणराज्य में यूरोपीय पैरा तीरंदाजी कप में रजत पदक जीतने से शीतल का आत्मविश्वास बढ़ा. इसी प्रयास से इस तीरंदाज ने पिल्सेन में आयोजित विश्व पैरा चैम्पियनशिप में रजत पदक जीता. 2012 पैरालिंपिक में दोनों हाथों के बिना तीरंदाजी में रजत पदक जीतने वाले मैट सुट्ज़मैन… तीरंदाज शीतल देवी ने अपनी तकनीक में सुधार किया है. हाल ही में नेग्गी शीतल ने एक बार फिर पैरा एशियन गेम्स में दो स्वर्ण सहित तीन पदक जीते हैं. शीतल का लक्ष्य 2024 पेरिस पैरालिंपिक में भी एडरागोटी मेडल जीतना है.

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Abhishek Anand

लेखक के बारे में

By Abhishek Anand

'हम वो जमात हैं जो खंजर नहीं, कलम से वार करते हैं'....टीवी और वेब जर्नलिज्म में अच्छी पकड़ के साथ 10 साल से ज्यादा का अनुभव. झारखंड की राजनीतिक और क्षेत्रीय रिपोर्टिंग के साथ-साथ विभिन्न विषयों और क्षेत्रों में रिपोर्टिंग. राजनीतिक और क्षेत्रीय पत्रकारिता का शौक.

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