Safety Gadgets: महिलाओं की सुरक्षा में मददगार हैं ये गैजेट्स, हमेशा रखें साथ

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 20 Sep 2024 9:49 AM

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Women Safety Gadgets

Safety Gadgets: आज महिलाएं बाहर ही नहीं, घर के अंदर भी सुरक्षित नहीं हैं. आये दिन होने वाले हादसे इनकी सुरक्षा पर सवाल खड़े करते हैं. ऐसे में महिलाओं को अपनी सुरक्षा का ध्यान खुद रखने की आवश्यकता है.

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Safety Gadgets: कोलकाता डॉक्टर रेप-मर्डर केस के बाद देशभर में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गयी है. देशभर के अलग-अलग हिस्सों में रोजाना न जाने कितनी मासूम बच्चियां और महिलाएं छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न की शिकार होती हैं. भले ही सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए ढेरों कानून बना रखे हैं, बावजूद इसके देश में अपराध थमने का नाम नहीं ले रहा है. थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन द्वारा किये गये एक सर्वे में महिलाओं के प्रति होने वाली यौन हिंसा, सांस्कृतिक विसंगति और मानव तस्करी की घटना के आधार पर भारत को खतरनाक देशों की सूची में सबसे ऊपर रखा है. आज महिलाएं बाहर ही नहीं, घर के अंदर भी सुरक्षित नहीं हैं. आये दिन होने वाले हादसे इनकी सुरक्षा पर सवाल खड़े करते हैं. ऐसे में महिलाओं को अपनी सुरक्षा का ध्यान खुद रखने की आवश्यकता है. जैसे-जैसे तकनीक का विकास हो रहा है, मॉर्डन गैजेट्स जन्म ले रहे हैं. महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए कुछ खास गैजेट्स बनाये गये हैं, जो घर के अंदर और बाहर दोनों जगह काम कर सकते हैं. इन गैजेट्स का इस्तेमाल कर आप भी सुरक्षित महसूस कर सकती हैं.

सेफ्टी शॉक टॉर्च

महिलाओं की आत्मरक्षा के लिए सेफ्टी शॉक टॉर्च बहुत जरूरी है, क्योंकि आपात स्थिति में महिलाएं इसका इस्तेमाल कर सकती हैं. इसलिए अपनी सुरक्षा के लिहाज से महिलाओं को शॉक इफेक्ट वाली रिचार्जेबल सेफ्टी टॉर्च अपने साथ जरूर कैरी करनी चाहिए.

सेफलेट

यदि कोई महिला किसी मुश्किल में है, तो सेफलेट का इस्तेमाल कर वह अपने दोस्त को मैसेज कर सकती है या फिर अपने गार्जियन से मदद के लिए संपर्क कर सकती है. ये गैजेट यूजर के मोबाइल से कनेक्ट हो जाती है और अपने आप ऑडियो रिकॉर्डिंग भी शुरू कर देती है.

पेपर स्प्रे पिस्तौल

आत्मरक्षा के लिए महिलाएं पेपर स्प्रे पिस्टल यूज कर सकती हैं. इसे आंखों पर स्प्रे करने की जरूरत नहीं होती. हमलावर के चेहरे पर निशाना लगाते हुए ट्रिगर दबाना होता है. चेहरे-आंखों पर स्प्रे पड़ने से हमलावर को तेज दर्द होता है. इस दौरान महिला को बचकर निकलने का समय मिल जाता है.

सोनाटा वॉच एसीटी

सोनाटा वॉच एसीटी में एक मोबाइल एप्लिकेशन है. इसे यूजर के स्मार्टफोन में डाउनलोड किया जाता है. ब्लूटूथ का इस्तेमाल कर यह खतरा होने पर परिजनों को अलर्ट मैसेज भेज देता है. यह यूजर की लोकेशन भी भेजता है. इसकी कीमत करीब 3 हजार रुपये है.

फ्लैशलाइट

लिपस्टिक जैसा दिखनेवाले इस सेफ्टी गैजेट की लंबाई पांच इंच है. यह देखने में आम लिपस्टिक जैसा है, इसलिए इसे छिपाकर ले जाना आसान है. इसमें एक रिचार्जेबल बैटरी लगी है. इस फ्लैशलाइट से 180 लुमेन का प्रकाश निकलता है, जिसकी कीमत करीब 800 रुपये है.

सेफ्टी रॉड

कई बार अपनी जान बचाने के लिए हमलावर के साथ दो-दो हाथ करने की जरूरत होती है. सेफ्टी रॉड इसी काम के लिए बना है. इसे फोल्ड कर बैग में रखा जा सकता है. जरूरत पड़ने पर रॉड को खींचकर बड़ा किया जा सकता है. इससे मारे जाने पर हमलावर को दर्द होता है.

रिवोलर

रिवोलर छोटा-सा गैजेट है. इसे आसानी से जींस की जेब या स्पोर्ट्स ब्रा में रखा जा सकता है. दो बार दबाने पर यह परिजनों और दोस्तों तक यलो अलर्ट मैसेज भेजता है. तीन बार क्लिक करने पर यह रेड मैसेज भेजता है.

सेफर स्मार्ट पेंडेंट

सेफर स्मार्ट पेंडेंट सामान्य पेंडेंट नहीं है. इसमें एक छोटा गोलाकार गैजेट होता है, जिसे सेफर के नाम से जाना जाता है. जब भी आप असुरक्षित महसूस करें, पेंडेंट से जुड़े सेफ्टी उपकरण पर बस डबल क्लिक करें. आपके परिवार या दोस्तों को अलर्ट चला जायेगा.

पर्सनल अलार्म रिस्टलेट

यह गैजेट दिखने में किसी की-चेन जैसा लगता है. इसमें अलार्म लगा होता है. यह इतना छोटा है कि इसे महिलाएं अपने हाथ में छिपाकर रख सकती हैं. पिन खींचे जाने पर अलार्म बजने लगता है. इसके साथ ही इसमें एलइडी लाइट भी दिया गया है.

साउंड ग्रेनेड

साउंड ग्रेनेड एक स्मार्ट गैजेट है. इसके इस्तेमाल से 120 डेसिबल की आवाज निकलती है, जो 100 मीटर तक सुनाई देती है. इसकी मदद से महिलाएं चोरी, दुष्कर्म, लूटपाट या किसी अन्य जोखिम भरी स्थिति से बच सकती हैं.

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By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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