स्पेसएक्स ने लॉन्च किया सबसे ताकतवर स्टारशिप रॉकेट, नासा भी करेगा इस्तेमाल

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स्पेसएक्स स्टारशिप / फोटो स्पेसएक्स के एक्स हैंडल से

एलन मस्क की स्पेसएक्स ने अब तक का सबसे बड़ा स्टारशिप रॉकेट टेस्ट फ्लाइट पर लॉन्च किया. नासा भी इसी तकनीक से भविष्य में चंद्रमा मिशन की तैयारी कर रहा है.

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अमेरिका की प्राइवेट स्पेस कंपनी स्पेसएक्स ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है. कंपनी ने अपने सबसे बड़े और सबसे ताकतवर स्टारशिप रॉकेट को सफलतापूर्वक टेस्ट फ्लाइट पर लॉन्च किया. यह वही सुपर हेवी रॉकेट सिस्टम है, जिसके जरिए एलन मस्क भविष्य में इंसानों को मंगल ग्रह तक भेजने का सपना देख रहे हैं. खास बात यह है कि नासा भी इसी स्टारशिप के नए वर्जन का इस्तेमाल आने वाले वर्षों में चंद्रमा मिशन के लिए करने की तैयारी कर रहा है. टेक्सास से हुई इस लॉन्चिंग के बाद अंतरिक्ष तकनीक की रेस में स्पेसएक्स ने एक बार फिर बड़ा संदेश दे दिया है.

पहले आखिरी मिनट में रुका था लॉन्च, फिर मिली सफलता

स्टारशिप की यह 12वीं टेस्ट फ्लाइट थी. इससे पहले कंपनी गुरुवार को लॉन्च करने वाली थी, लेकिन काउंटडाउन खत्म होने से कुछ सेकंड पहले तकनीकी समस्या सामने आ गई थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक लॉन्च टावर पर लगा हाइड्रोलिक पिन समय पर हट नहीं पाया, जिसके कारण उलटी गिनती रोकनी पड़ी. बाद में एलन मस्क ने खुद इस समस्या की जानकारी दी थी और कहा था कि तकनीकी दिक्कत दूर होते ही दोबारा प्रयास किया जाएगा. आखिरकार शुक्रवार को स्पेसएक्स ने सफल लॉन्च कर लिया.

अब तक का सबसे बड़ा और एडवांस स्टारशिप

स्पेसएक्स का नया स्टारशिप मॉडल करीब 124 मीटर लंबा बताया जा रहा है. यह पुराने मॉडल्स की तुलना में ज्यादा लंबा और ज्यादा शक्तिशाली है. इसमें अपग्रेडेड इंजन लगाए गए हैं, जो भारी पेलोड को अंतरिक्ष तक पहुंचाने में सक्षम माने जा रहे हैं. इस टेस्ट मिशन में 20 स्टारलिंक सैटेलाइट्स के प्रोटोटाइप भी शामिल थे.

स्पेसएक्स लगातार स्टारशिप को ऐसे सिस्टम के रूप में तैयार कर रही है, जो भविष्य में बड़े स्पेस मिशन, कार्गो ट्रांसपोर्ट और इंसानी यात्रा को आसान बना सके. यही वजह है कि इस प्रोजेक्ट पर दुनियाभर की स्पेस एजेंसियों की नजर बनी हुई है.

नासा के मून मिशन में भी बड़ी भूमिका

स्टारशिप सिर्फ स्पेसएक्स का निजी प्रोजेक्ट नहीं रह गया है. अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा भी इसे अपने आर्टेमिस मिशन के लिए अहम मान रही है. आने वाले वर्षों में इसी तकनीक की मदद से अंतरिक्ष यात्रियों को दोबारा चंद्रमा पर भेजने की योजना बनाई जा रही है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर स्टारशिप लगातार सफल टेस्ट पास करती रही, तो यह अंतरिक्ष यात्रा की पूरी तस्वीर बदल सकती है. भारी वजन ले जाने की क्षमता और दोबारा इस्तेमाल होने वाला डिजाइन इसे मौजूदा रॉकेट्स से अलग बनाता है.

मंगल मिशन के सपने के पीछे एलन मस्क की सबसे बड़ी उम्मीद

एलन मस्क कई बार कह चुके हैं कि उनका अंतिम लक्ष्य इंसानों को मल्टी-प्लैनेटरी स्पीशीज बनाना है. आसान भाषा में कहें तो वे चाहते हैं कि भविष्य में इंसान पृथ्वी के अलावा मंगल ग्रह पर भी रह सके. स्टारशिप उसी विजन का सबसे बड़ा हिस्सा है.

हालांकि अभी यह केवल टेस्टिंग स्टेज में है, लेकिन हर नई उड़ान स्पेसएक्स को उस लक्ष्य के थोड़ा और करीब ले जा रही है. दुनिया की नजर अब इस बात पर रहेगी कि अगली टेस्ट फ्लाइट में कंपनी कौन सा नया रिकॉर्ड बनाती है.

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Rajeev Kumar

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By Rajeev Kumar

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