Prepaid vs. Postpaid: आज हर स्मार्टफोन यूजर के मन में यही सवाल घूमता है- क्या प्रीपेड बेहतर है या पोस्टपेड? मोबाइल कंपनियां दोनों तरह के प्लान देती हैं, लेकिन असली खेल यूजर की जरूरतों और खर्च करने की आदतों पर टिका है. एक तरफ प्रीपेड आपको पूरी आजादी और खर्च पर कंट्रोल देता है, वहीं पोस्टपेड बिना रुके नेटवर्क और प्रीमियम फायदे का वादा करता है. आइए समझते हैं कि किस प्लान में छुपा है आपके लिए सही चुनाव.
प्रीपेड: खर्च पर पूरा कंट्रोल
प्रीपेड प्लान में यूजर पहले से रिचार्ज करता है और उतना ही डेटा या कॉलिंग इस्तेमाल कर सकता है. इसका सबसे बड़ा फायदा है कि बिल का डर नहीं रहता और खर्च आपके हाथ में रहता है. ऑफर बदलने या ऑपरेटर स्विच करने की पूरी आजादी भी मिलती है. यही वजह है कि भारत में लगभग 90% लोग प्रीपेड कनेक्शन चुनते हैं.
प्रीपेड की कमजोरी
हालांकि प्रीपेड में एक बड़ी दिक्कत है- अगर रिचार्ज भूल गए तो नेटवर्क तुरंत बंद हो जाता है. ऐसे में अचानक इंटरनेट या कॉलिंग की जरूरत पड़ने पर परेशानी हो सकती है.
पोस्टपेड: बिना रुके नेटवर्क
पोस्टपेड यूजर्स को हर महीने बिल चुकाना होता है. इसका सबसे बड़ा फायदा है कि नेटवर्क कभी बंद नहीं होता. दफ्तर के काम, बिजनेस कॉल्स या लगातार डेटा इस्तेमाल करने वालों के लिए यह प्लान बेहद सुविधाजनक है.
पोस्टपेड के एक्स्ट्रा फायदे
पोस्टपेड प्लान्स में अक्सर OTTसब्सक्रिप्शन (Netflix, Amazon Prime, Disney+ Hotstar), फैमिली डेटा शेयरिंग और प्रायोरिटी कस्टमर सपोर्ट जैसे बोनस मिलते हैं. तय मासिक बिल से खर्च का अंदाजा लगाना आसान हो जाता है, लेकिन कभी-कभी टैक्स और हिडन चार्जेस बिल को भारी बना देते हैं.
किसे क्या चुनना चाहिए?
अगर आप स्टूडेंट हैं या मोबाइल का इस्तेमाल सीमित है तो प्रीपेड आपके लिए सही है. वहीं अगर आप हेवी डेटा यूजर हैं, कॉलिंग जरूरी है और OTT का मजा लेना चाहते हैं तो पोस्टपेड बेहतर साबित होगा. असलियत यही है कि दोनों प्लान्स अपने-अपने यूजर्स के लिए फायदेमंद हैं- प्रीपेड देता है कंट्रोल, पोस्टपेड देता है सुविधा और प्रीमियम फीचर्स.
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