लोहा या प्लास्टिक कूलर, कौन देगा ज्यादा ठंडी हवा? खरीदने से पहले जानें

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Iron vs Plastic Cooler

लोहा या प्लास्टिक कौन सा कूलर देता है अच्छी हवा? एआई इमेज

गर्मियों में कूलर खरीदते समय सबसे बड़ा सवाल यही होता है, कि लोहा या प्लास्टिक कौन सा कूलर ज्यादा ठंडी और बेहतर हवा देता है? दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं. यहां जानिए दोनों में किसे खरीदना फायदेमंद है.

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गर्मी बढ़ते ही कूलर खरीदने का प्लान तो बन जाता है, लेकिन सबसे बड़ा कन्फ्यूजन यहीं होता है, कि कूलर लोहा वाला लें या प्लास्टिक वाला? देखा जाए तो दोनों ही कूलर का काम ठंडी हवा देना है, लेकिन दोनों के डिजाइन, कीमत और काम करने के तरीके में थोड़ा फर्क है. ऐसे में सही कूलर खरीदना जरूरी है, ताकि पैसा भी वसूल हो और ठंडी हवा भी भरपूर मिले.

लोहे वाले कूलर की खासियत और कमी

सबसे पहले बात करते हैं लोहे वाले कूलर की. ये कूलर आमतौर पर ज्यादा मजबूत और टिकाऊ होते हैं. इनकी बॉडी हीट को जल्दी ट्रांसफर करती है, जिससे कुछ मामलों में कूलिंग बेहतर महसूस होती है. बड़े कमरे या खुले एरिया में लोहे वाला कूलर ज्यादा असरदार साबित होते हैं. इसमें ज्यादा कैपेसिटी वाले पंखे और मोटर लगे होते हैं, जिससे ज्यादा अच्छी और ठंडी हवा आती है और कमरा भी जल्दी ठंडा हो जाता है. साथ ही इस कूलर में पानी की कैपेसिटी भी ज्यादा होती है. यानी कि एक बार पानी डालने के बाद दिन भर ठंडी हवा मिलेगी.

हालांकि, इनका वजन ज्यादा होता है जिससे इसे एक कमरे से दूसरे कमरे में शिफ्ट करना थोड़ा मेहनत वाला काम हो जाता है. इतना ही नहीं, इसे चलाने के बाद बिजली की खपत भी ज्यादा होती है और समय के साथ इनमें जंग (रस्ट) लगने का खतरा भी रहता है. साथ इनकी मेंटेनेंस थोड़ी ज्यादा होती है.

प्लास्टिक वाले कूलर की खासियत और कमी

अब बात करें प्लास्टिक कूलर की, तो ये आजकल काफी पॉपुलर हो चुके हैं और कई डिजाइन, साइज और क्वालिटी के मिल जाते हैं. ये हल्के होते हैं, आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाए जा सकते हैं और इनमें जंग लगने की समस्या भी नहीं होती. प्लास्टिक कूलर दिखने में भी मॉडर्न और स्टाइलिश होते हैं और इनकी बॉडी हीट को कम एब्जॉर्ब करती है, जिससे कूलिंग लंबे समय तक बनी रहती है. ये कम बिजली की खपत करते हैं और सही तरीके से रखने पर कई सालों तक इस्तेमाल में आ जाते हैं.

हालांकि, प्लास्टिक कूलर्स लोहे वाले कूलर्स के मुकाबले उतनी स्पीड हवा नहीं फेंकते. यानी कि बड़े कमरे में अगर इसे रखा जाए तो कमरा ठंडा होने में ज्यादा समय लेगा. साथ ही इनमें ज्यादा कैपेसिटी वाले मोटर और पंखे भी नहीं होते, जिससे एयर फ्लो भी कम होता है. वहीं, बहुत ज्यादा धूप या खराब क्वालिटी प्लास्टिक होने पर इनकी मजबूती थोड़ी कम हो सकती है.

कूलिंग के लिहाज से कौन बेहतर है?

अगर केवल ठंडी हवा की बात करें, तो असली फर्क कूलर की बॉडी से ज्यादा उसके मोटर, फैन और कूलिंग पैड पर डिपेंड करता है. यानी अच्छा पंप, हाई क्वालिटी हनीकॉम्ब पैड और पावरफुल एयर थ्रो हो तो प्लास्टिक और मेटल दोनों ही कूलर बेहतरीन कूलिंग दे सकते हैं. ऐसे में छोटे कमरे के लिए कूलर खरीदना चाहते हैं, तो प्लास्टिक वाला कूलर सही रहेगा. लेकिन ज्यादा ठंडी हवा के लिए लोहे वाला कूलर अच्छा ऑप्शन है.

खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?

कूलर लेते वक्त सिर्फ मेटेरियल पर फोकस न करें. कमरे का साइज, पानी की टैंक कैपेसिटी, एयर थ्रो, पावर कंजम्प्शन और कूलिंग पैड की क्वालिटी जरूर चेक करें. अगर आपको लंबे समय तक टिकाऊ और हैवी यूज के लिए कूलर चाहिए, तो मेटल बेहतर रहेगा. वहीं, घर के अंदर आसान इस्तेमाल और कम मेंटेनेंस के लिए प्लास्टिक कूलर अच्छा ऑप्शन है.

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Shivani Shah

लेखक के बारे में

By Shivani Shah

शिवानी शाह टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में वह कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह स्मार्टफोन्स, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), गैजेट्स, बायर्स गाइड और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करती हैं.

टेक्नोलॉजी सेक्टर में शिवानी शाह की मजबूत पकड़ स्मार्टफोन लॉन्च/रिव्यूज, गैजेट रिव्यूज, टिप्स एंड ट्रिक्स, बायर्स गाइड, टेलीकॉम अपडेट्स, AI टूल्स/फीचर्स और ट्रेंडिंग टेक टॉपिक्स से जुड़े विषयों में है. ऑटोमोबाइल सेक्टर में वह नई कार/बाइक/स्कूटर्स की लॉन्चिंग, गाड़ियों के फीचर्स, बायर्स गाइड, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), ट्रेंडिंग ऑटो टॉपिक्स और अपडेट्स पर रिसर्च-बेस्ड कंटेंट लिखती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर सिर्फ लॉन्च और फीचर्स की जानकारी तक सीमित न रहे, बल्कि पाठकों को यह भी समझ आए कि वह उनके लिए कितनी काम की है.

शिवानी शाह ने साल 2020 में करीम सिटी कॉलेज, जमशेदपुर से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन और साल 2024 में अपेक्स यूनिवर्सिटी, जयपुर से मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया.

अपने करियर की शुरुआत शिवानी शाह ने झारखंड के डिजिटल न्यूज पोर्टल Lagatar.com से की, जहां करीब एक साल तक उन्होंने काम किया. इसके बाद जयपुर में पढ़ाई के दौरान Hamara Samachar यूट्यूब चैनल में वह न्यूज एंकर रहीं. मास्टर्स पूरी करने के बाद उन्होंने झारखंड डिजिटल न्यूज पोर्टल The News Post में करीब एक साल तक काम किया. इन संस्थानों में काम करने के दौरान उन्होंने लोगों तक सही, भरोसेमंद और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाने का अनुभव हासिल किया.

शिवानी का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और खरीदारी के फैसलों को प्रभावित करती हैं. इसलिए वह हर खबर को अच्छी तरह रिसर्च करके, आसान भाषा में और सही जानकारी के साथ लिखती हैं, ताकि हर उम्र के पाठक उसे आसानी से समझ सकें.

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