नया मिक्सर ग्राइंडर लेने का बना रहे हैं प्लान? तो खरीदते समय ये 5 चीजें चेक करना न भूलें

दुकान में सेल्समैन कस्टमर्स को मिक्सर ग्राइंडर के फीचर्स समझाते हुए (Photo: AI Generated)
Mixer Grinder Buying Guide: बढ़िया मिक्सर ग्राइंडर खरीदना आसान नहीं होता. छोटी-सी गलती आपको बार-बार खर्च करा सकती है. इसलिए आइए जानते हैं एक सही मिक्सर ग्राइंडर खरीदते समय किन 5 बातों को चेक करना जरूरी होता है.
Mixer Grinder Buying Guide: एक बढ़िया मिक्सर ग्राइंडर चुनना थोड़ा मुश्किल काम हो सकता है. अगर गलत मॉडल चुन लिया तो वही मिक्सर बार-बार आपकी जेब ढीली करवा सकता है. मार्केट में इतने सारे ऑप्शन, हाई वाटेज के दावे और एक जैसे दिखने वाले जार होते हैं कि लोग अक्सर कन्फ्यूज हो जाते हैं. इसलिए आज हम आपको बताएंगे कि मिक्सर ग्राइंडर खरीदते समय किन बातों पर आपको जरूर ध्यान देना चाहिए.
मोटर पावर चेक करें
भारतीय किचन के हिसाब से देखें तो रोजमर्रा के कामों में जैसे मसाले पीसना, चटनी बनाना या बैटर तैयार करने के लिए आमतौर पर 500-750W का मोटर सही होता है. असल में सिर्फ ज्यादा वॉटेज ही मायने नहीं रखता, बल्कि यह ज्यादा जरूरी है कि मोटर बिना ओवरहीट हुए लगातार और स्मूद तरीके से काम करे.
जार साइज और मटेरियल चेक करें
लंबे समय तक चलने के लिए स्टेनलेस स्टील के जार सबसे बेहतर माने जाते हैं. खासकर वे जिनकी दीवारें मोटी हों, हैंडल मजबूत हो और ढक्कन अच्छी तरह फिट होता हो. अगर आप समझदारी से चुनें, तो ढेर सारे कमजोर जार लेने से बढ़िया है कि एक छोटा चटनी जार और एक मीडियम वेट-ग्राइंडिंग जार का कॉम्बिनेशन रखें. रोजमर्रा के काम में यही सेट ज्यादा काम आते हैं.
सेफ्टी फीचर्स को नजरअंदाज न करें
अगर आप बजट मिक्सर ग्राइंडर खरीद रहे हैं, तो कुछ सेफ्टी फीचर्स ध्यान रखें. सबसे जरूरी है ओवरलोड प्रोटेक्शन, क्योंकि ये सख्त चीजें पीसते समय मोटर को खराब होने से बचाता है. इसके अलावा मजबूत ढक्कन लॉक और स्टेबल जार फिटिंग भी बहुत जरूरी हैं, ताकि रोजमर्रा के इस्तेमाल में न तो सामग्री छलके और न ही किसी तरह का हादसा हो.
शोर और स्टेबिलिटी का ध्यान रखें
ये बात तो तय है कि बजट मिक्सर ग्राइंडर आमतौर पर पूरी तरह साइलेंट नहीं होते. लेकिन अगर मशीन बहुत ज्यादा शोर करे या ज्यादा हिले-डुले, तो रोजाना इस्तेमाल करना परेशान करने वाला हो सकता है. इसलिए ऐसा मिक्सर चुनना बेहतर रहता है जिसकी बेस मजबूत और बैलेंसिंग ठीक हो. इससे मशीन कम हिलती है और यूज करते समय ज्यादा परेशानी नहीं होती.
वारंटी और आफ्टर सेल्स भी चेक करें
बजट सेगमेंट में वारंटी और आफ्टर-सेल्स सर्विस को बिल्कुल हल्के में नहीं लेना चाहिए. अगर आप ऐसी ब्रांड चुनते हैं जिसके सर्विस सेंटर आसानी से मिल जाते हों और जिसकी वारंटी शर्तें साफ-साफ हों, तो आगे चलकर आपका समय, पैसा और बेवजह की परेशान तीनों बच सकते हैं.
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लेखक के बारे में
By Ankit Anand
अंकित आनंद, प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वह पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं. टेक जर्नलिस्ट के तौर पर अंकित स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) न्यूज, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी खबरें कवर करते हैं. इसके अलावा, वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी अहम खबरों पर भी लिखते हैं. अंकित ने GGSIP यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन की है.
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