क्या दिमाग को सुस्त बना रहा है ChatGPT? MIT की नयी रिपोर्ट पढ़कर हिल जाएंगे आप

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 20 Oct 2025 3:08 PM

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ChatGPT का दिमाग पर प्रभाव, MIT की नयी रिपोर्ट

MIT ChatGPT brain study: MIT की नयी स्टडी में पाया गया कि लंबे समय तक ChatGPT इस्तेमाल करने से दिमाग की एक्टिविटी 47% तक घट जाती है. जानिए कैसे AI आपकी सोचने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है

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MIT का खुलासा- ChatGPT यूज करने से घट रही है दिमाग की एक्टिविटी: Massachusetts Institute of Technology (MIT) ने हाल ही में ChatGPT यूजर्स पर पहला ब्रेन स्कैन स्टडी (MIT ChatGPT brain study) पूरा किया है और इसके नतीजे काफी चौंकाने वाले हैं. रिपोर्ट में पाया गया कि जो लोग लंबे समय तक ChatGPT का इस्तेमाल करते हैं, उनका दिमाग धीरे-धीरे कम एक्टिव हो जाता है. यानी वे जल्दी काम तो कर लेते हैं, लेकिन उनका सोचने और याद रखने का स्तर घटने लगता है.

स्टडी में कैसे हुआ परीक्षण?

चार महीनों तक चली इस रिसर्च में, MIT के वैज्ञानिकों ने ChatGPT यूज करने वाले लोगों के ब्रेन स्कैन और कॉग्निटिव परफॉर्मेंस (यानी सोचने-समझने की क्षमता) को मापा. जब प्रतिभागी ChatGPT से मदद लेकर लिख रहे थे, तो उनके दिमाग में एक्टिविटी पॉइंट्स 79 से गिरकर सिर्फ 42 रह गए. यानी लगभग 47% की कमी आई, यह सबसे कम ब्रेन एंगेजमेंट था.

सबसे चौंकाने वाला हिस्सा

स्टडी में यह भी सामने आया कि ChatGPT यूज करने वाले 83.3% लोग कुछ ही मिनट बाद अपनी लिखी लाइनें याद नहीं रख पाए. जबकि जिन्होंने बिना AI के लिखा, उन्हें याददाश्त में कोई दिक्कत नहीं हुई. यह दिखाता है कि AI काम तो आसान करता है, पर याददाश्त और दिमाग की भागीदारी कम कर देता है.

AI छोड़ने के बाद भी असर जारी रहा

MIT की रिपोर्ट बताती है कि जिन लोगों ने बाद में ChatGPT यूज करना बंद किया, उनका ब्रेन एंगेजमेंट फिर भी पहले जैसा नहीं हुआ. उनका प्रदर्शन उन लोगों से कम रहा जिन्होंने कभी AI का उपयोग नहीं किया था. इससे साफ है कि यह सिर्फ आदत नहीं, बल्कि कॉग्निटिव (सोचने की) कमजोरी बन सकती है.

AI से लिखे कंटेंट पर टीचर्स शिक्षकों की राय

रिसर्च के दौरान विशेषज्ञों ने ChatGPT से लिखे निबंधों को पढ़ा. उन्होंने कहा कि ये टेक्स्ट तकनीकी रूप से सही थे, लेकिन उनमें जज्बात, गहराई और रचनात्मकता की कमी थी. यानी इंसानी टच गायब था, जो किसी भी असली लेखन की आत्मा होती है.

ChatGPT तेज तो बनाता है, पर सोच घटाता है

MIT की स्टडी के अनुसार, ChatGPT से काम 60% तेजी से होता है, लेकिन सीखने और सोचने की कोशिश 32% तक घट जाता है. सबसे अच्छा प्रदर्शन उन लोगों का था जिन्होंने पहले खुद लिखा और बाद में AI की मदद ली. उन्होंने बेहतर याददाश्त, एक्टिव दिमाग और ज्यादा स्कोर हासिल किया.

असली सबक क्या है?

AI को सोच का शॉर्टकट नहीं, बल्कि सहायक बनाकर इस्तेमाल करें. ChatGPT से मदद लें, लेकिन अपनी क्रिएटिव और एनालिटिकल सोच को बंद न करें. जितना आप खुद सोचेंगे, उतना आपका दिमाग मजबूत रहेगा.

क्या ChatGPT का इस्तेमाल करना नुकसानदायक है?

जरूरी नहीं, लेकिन अगर आप पूरी तरह उस पर निर्भर हो जाएं तो आपकी सोचने और याद रखने की क्षमता कमजोर हो सकती है.

क्या ChatGPT यूज करने से सीखने की क्षमता घटती है?

हां, MIT की रिपोर्ट के मुताबिक लगातार AI इस्तेमाल से दिमाग की एक्टिविटी कम होती है और सीखने का स्तर घट सकता है.

क्या ChatGPT का सीमित इस्तेमाल ठीक है?

बिलकुल. अगर आप इसे सहायक टूल की तरह इस्तेमाल करते हैं और खुद से सोचते हैं, तो यह उपयोगी साबित होगा.

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Rajeev Kumar

लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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