भूलकर भी ऑनलाइन न करें ये गलतियां, वरना रॉकेट की स्पीड से नीचे गिरेगा आपका सिबिल स्कोर

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5 ऑनलाइन गलतियों से मिनटों में घट जाता है सिबिल स्कोर / एआई फोटो

ऑनलाइन लोन या क्रेडिट कार्ड अप्लाई करते समय की गई कुछ डिजिटल आदतें आपके सिबिल स्कोर को बुरी तरह प्रभावित कर सकती हैं. फिनटेक ऐप्स का अंधाधुंध इस्तेमाल, क्रेडिट लिमिट पार करना, ऑटो-डेबिट फेल होना जैसी गलतियों से कैसे बचें, जानें.

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आजकल इंटरनेट के दौर में लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई करना बेहद आसान हो गया है. कई बार लोग सिर्फ उत्सुकता में या अलग-अलग ऑफर्स की तुलना करने के लिए कई मोबाइल ऐप्स और बैंकिंग पोर्टल्स पर एक साथ लोन के लिए आवेदन कर देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यही एक डिजिटल आदत आपके सिबिल स्कोर को पूरी तरह से तबाह कर सकती है? जब भी आप किसी प्लैटफॉर्म पर क्रेडेंशियल्स डालकर लोन पात्रता की जांच करते हैं, तो बैकएंड में बैंक आपकी हार्ड इंक्वायरी (Hard Inquiry) दर्ज करते हैं. इससे क्रेडिट ब्यूरो को लगता है कि आप पैसों के संकट से जूझ रहे हैं और लोन के लिए बेहद उत्सुक हैं, जिससे आपका क्रेडिट स्कोर तेजी से नीचे गिरने लगता है.

मल्टिपल लोन ऐप्स और क्रेडिट कार्ड का ऑनलाइन जाल

आजकल स्मार्टफोन यूजर्स के बीच फिनटेक और बाय नाउ पे लेटर (BNPL) ऐप्स का चलन तेजी से बढ़ा है. लोग बिना सोचे-समझे कई तरह के शॉर्ट-टर्म लोन ऐप्स डाउनलोड करते हैं और उन पर रजिस्ट्रेशन कर देते हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन ऐप्स पर की जाने वाली हर एक्टिविटी आपकी क्रेडिट हिस्ट्री पर एक गुप्त हार्ड पुल (Hidden Hard Pull) की तरह काम करती है. इसके अलावा, अलग-अलग बैंकों की वेबसाइट्स पर जाकर एक ही समय में कई इंस्टेंट क्रेडिट कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन करना भी आपके सिबिल प्रोफाइल को गंभीर नुकसान पहुंचाता है.

ई-कॉमर्स शॉपिंग और डिजिटल लिमिट पार करने का जोखिम

अक्सर ऑनलाइन शॉपिंग सेल के दौरान लोग अपने क्रेडिट कार्ड या डिजिटल क्रेडिट लिमिट का अंधाधुंध इस्तेमाल करते हैं. क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के नियमों के अनुसार, यदि आप अपनी कुल स्वीकृत डिजिटल क्रेडिट लिमिट का 30 फीसदी से अधिक हिस्सा खर्च कर देते हैं, तो यह आपकी वित्तीय स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डालता है. ई-कॉमर्स साइट्स पर अपनी लिमिट को पूरी तरह से समाप्त करना यानी मैक्सिंग आउट करना, क्रेडिट ब्यूरो को यह संकेत देता है कि आप पूरी तरह से कर्ज पर निर्भर हैं, जो अंततः आपके स्कोर को घटा देता है.

ऑटो-डेबिट फेलियर और नोटिफिकेशन बंद करने की लापरवाही

डिजिटल बैंकिंग को आसान बनाने के लिए लोग ई-मैंडेट (e-Mandate) या नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस (NACH) के जरिए ऑटो-डेबिट सेट कर देते हैं. लेकिन अपने बैंक अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस न रखना और इस वजह से ऑटो-डेबिट का फेल होना सीधे तौर पर एक डिफॉल्ट माना जाता है. इसके साथ ही, कई लोग बैंकिंग ऐप्स के नोटिफिकेशन्स को बंद कर देते हैं, जिससे उन्हें आखिरी तारीखों या डायनैमिक बिलिंग साइकिल का पता नहीं चलता और अनजाने में पेमेंट्स मिस हो जाती हैं. यदि आपका कोई ऑनलाइन बिल विवादित है, तब भी भुगतान रोकने की गलती न करें, क्योंकि ब्यूरो इसे लेट पेमेंट ही मानेगा.

डिजिटल को-साइनिंग और साइबर अनदेखी के खतरे

आजकल लोग अपने किसी दोस्त या रिश्तेदार के लोन आवेदन को ऑनलाइन पोर्टल्स के जरिए डिजिटल रूप से को-साइन (Co-sign) कर देते हैं. ऐसा करके आप कानूनी रूप से उस कर्ज के बराबर के भागीदार बन जाते हैं और यदि मुख्य कर्जदार ऑनलाइन भुगतान में चूक करता है, तो आपका सिबिल स्कोर भी डूब जाता है. इसके अलावा, ट्रांसयूनियन सिबिल के ऑफिशियल डैशबोर्ड पर जाकर समय-समय पर अपनी क्रेडिट रिपोर्ट की ऑनलाइन जांच न करना भी भारी पड़ सकता है, क्योंकि इससे कोई बैंकिंग एरर या आपके नाम पर हुआ साइबर फ्रॉड पकड़ में नहीं आ पाता.


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राजीव कुमार

लेखक के बारे में

By राजीव कुमार

राजीव, हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और प्रभातखबर डॉट कॉम में कार्यरत हैं. अपने 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारीय अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. आसान भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी कंटेंट राइटिंग की सबसे बड़ी पहचान है.

राजीव की एक्सपर्टीज स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग के साथ-साथ डिजिटल ट्रेंड्स जैसे टॉपिक्स में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, ऑफिशियल डेटा, कंपनी अपडेट्स और एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी यूजर्स तक पहुंचाते हैं.

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राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन, पॉजिटिव जर्नलिज्म और फीचर राइटिंग जैसे अलग-अलग बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई.

जमशेदपुर में जन्मे राजीव की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद उन्होंने भारतीय विद्या भवन, पुणे से जर्नलिज्म ऐंड मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उनको आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में यूजर्स तक पहुंचाने में मदद करती है.

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