माइक्रोसॉफ्ट वाले Bill Gates को इस डर से करना पड़ा था हफ्ते में 80 घंटे काम, जानिए आखिर क्या था वह

Published by : Ankit Anand Updated At : 11 Feb 2025 10:00 AM

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Bill Gates

Bill Gates: बिल गेट्स ने खुलासा किया कि वह नियमित रूप से 80 घंटे प्रति सप्ताह काम करते थे, और इस चिंता में डूबे रहते कि कोई भी गलती माइक्रोसॉफ्ट की पर्सनल कंप्यूटर बाजार में बढ़ती पकड़ को खतरे में डाल सकती है.

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Bill Gates: सोशल मीडिया पर आए दिन इस बात पर बेहेस छिड़ी रहती है कि एक आदमी को अमूमन हफ्ते में कितने घंटे काम करनी चाहिए. इस विषय पर कई बड़े बड़े उद्योगपतियों की टिपणी भी वायरल होती रहती है जो कहते है कम से कम 80-90 घंटे हफ्ते में काम करना ही चाहिए. अब माइक्रोसॉफ्ट के को फाउंडर और दुनिया के शीर्ष धनि यक्ति में शामिल बिल गेट्स का नाम भी इस सूची में जुड़ गया है. उन्होंने बताया कि अपने करियर के शुरुआती दिनों में वह भी सप्ताह में 80 घंटे तक काम कर चुके हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इतना अधिक काम करने के पीछे एक उनका डर था, जिसने उन्हें ऐसा करने के लिए प्रेरित किया.

क्या था Bill Gates का डर?

CNBC से बातचीत में गेट्स ने खुलासा किया कि कंपनी के सार्वजनिक होने के दसकों बीत जाने के बाद भी उन्हें Microsoft की सफलता को लेकर 1998 तक संतुष्टि महसूस नहीं होती थी. अपार संपत्ति के बावजूद, वह Microsoft को प्रतिस्पर्धियों से आगे बनाए रखने को लेकर बेहद सतर्क थे. उन्हें हमेशा यह डर लगा रहता था की छोटी सी गलती कंपनी पर्सनल कंप्यूटर क्रांति में अपनी अग्रणी स्थिति खो सकती है. इसीलिए वो उस समय नियमित रूप से हर हफ्ते 80 घंटे सॉफ्टवेयर कोडिंग करते थे. उस समय Microsoft की वैल्यू 250 अरब डॉलर से अधिक थी, और गेट्स खुद 58 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति थे.

उन्होंने स्वीकार किया कि 1990 के दशक के अंत तक, वह लगातार इस सोच में रहते थे कि किसी भी गलती से माइक्रोसॉफ्ट का अंत हो सकता है. गेट्स ने एक बार कहा था, “मुझे लगता था कि मैं सिर्फ एक गलती दूर हूं अपनी मौत से.” उनका यह “सर्वाइवल मेंटैलिटी” माइक्रोसॉफ्ट को लगातार आगे बढ़ाने का कारण बनी, भले ही कंपनी उस समय पहले से ही ग्लोबल लीडर बन चुकी थी. हालांकि, 90 के दशक के अंत तक गेट्स को भरोसा होने लगा कि कंपनी अब एक मजबूत स्थिति में है. उन्होंने महसूस किया कि इतनी बड़ी सफलताओं के बाद, माइक्रोसॉफ्ट कुछ गलतियां झेल सकता है.

माइक्रोसॉफ्ट की वर्तमान स्थिति 

वर्तमान में माइक्रोसॉफ्ट 3 ट्रिलियन डॉलर की कंपनी बन चुकी है, और ब्लूमबर्ग के अनुसार, बिल गेट्स की कुल संपत्ति अनुमानित 165 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई है. हालांकि गेट्स ने माइक्रोसॉफ्ट के रोजमर्रा के संचालन से दूरी बना ली है, लेकिन वे अब भी परोपकार के क्षेत्र में सक्रिय हैं. बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के जरिए वे वैश्विक स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और शिक्षा जैसे अहम मुद्दों पर काम कर रहे हैं.

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अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.

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