बजट से बाहर क्यों हो रहे हैं बजट स्मार्टफोन? Samsung से Realme तक सब ने बढ़ाये दाम

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 29 May 2026 6:19 PM

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स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ीं / एआई-जेनरेटेड रिप्रेजेंटेशनल इलस्ट्रेशन

भारत में बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन तेजी से महंगे हो रहे हैं. AI बूम, मेमोरी चिप्स की कमी और बढ़ती शिपिंग लागत ने Samsung, Xiaomi और Realme जैसे ब्रांड्स की कीमतें बढ़ा दी हैं.

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अगर आपको लग रहा है कि पिछले कुछ महीनों में स्मार्टफोन अचानक महंगे हो गए हैं, तो यह सिर्फ आपका भ्रम नहीं है. भारत में बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. Samsung, Vivo, Oppo, Xiaomi, Realme और Nothing जैसे बड़े ब्रांड धीरे-धीरे अपने कई लोकप्रिय मॉडलों के दाम बढ़ा चुके हैं. जो फोन पहले 18 से 20 हजार रुपये में आसानी से मिल जाते थे, वे अब 25 हजार रुपये के करीब पहुंच रहे हैं. सबसे ज्यादा दबाव उन ग्राहकों पर पड़ा है जो सीमित बजट में बेहतर फोन खरीदना चाहते हैं.

AI बूम बना स्मार्टफोन महंगे होने की बड़ी वजह

स्मार्टफोन की कीमत बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण AI इंडस्ट्री का तेजी से बढ़ना माना जा रहा है. आज AI सर्वर और डेटा सेंटर्स को हाई-परफॉर्मेंस मेमोरी चिप्स की भारी जरूरत पड़ रही है. Nvidia जैसी कंपनियों की बढ़ती मांग के कारण Samsung, Micron और SK Hynix जैसे मेमोरी चिप निर्माता अब अपना ज्यादा फोकस AI सेक्टर पर कर रहे हैं.

इसका असर सीधे स्मार्टफोन इंडस्ट्री पर पड़ा है. फोन में इस्तेमाल होने वाले DRAM (Dynamic Random Access Memory) और NAND (NOT-AND) मेमोरी चिप्स की सप्लाई कम हो गई है और उनकी कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं. कई मामलों में इन चिप्स के दाम 50 से 60 प्रतिशत तक बढ़े बताए जा रहे हैं. यही वजह है कि अब इंडस्ट्री में कुछ लोग इसे ‘AI टैक्स’ तक कहने लगे हैं.

बजट फोन खरीदने वालों पर सबसे ज्यादा असर

भारत में सबसे ज्यादा स्मार्टफोन बिक्री मिड-रेंज और बजट कैटेगरी में होती है. ऐसे में कीमत बढ़ने का सबसे बड़ा असर इसी सेगमेंट पर दिखाई दे रहा है. कंपनियां पहले जहां भारी डिस्काउंट और सेल ऑफर्स देती थीं, अब वहां कटौती देखने को मिल रही है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक Xiaomi के कई मॉडल करीब 32 प्रतिशत तक महंगे हुए हैं. Samsung के फोन लगभग 36 प्रतिशत, Vivo करीब 40 प्रतिशत और Realme के कुछ मॉडल 50 प्रतिशत से ज्यादा महंगे हो चुके हैं. यही वजह है कि ग्राहक अब नया फोन खरीदने से पहले कई बार सोच रहे हैं.

लोग नया फोन खरीदने की बजाय रिपेयर करवा रहे पुराने मोबाइल

स्मार्टफोन महंगे होने के बाद अब ग्राहकों का व्यवहार भी बदल रहा है. पहले जहां लोग हर 1-2 साल में नया फोन खरीद लेते थे, अब वे पुराने फोन को रिपेयर करवाकर इस्तेमाल जारी रखना पसंद कर रहे हैं.

2026 की शुरुआती रिपोर्ट्स बताती हैं कि स्मार्टफोन बिक्री में करीब 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. इसका मतलब साफ है कि ग्राहक अब खर्च को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए हैं. अगर पुराना फोन ठीक तरीके से काम कर रहा है, तो लोग नया फोन लेने की जल्दबाजी नहीं कर रहे.

सिर्फ मेमोरी चिप्स नहीं, शिपिंग लागत भी बढ़ी

सिर्फ AI सेक्टर ही नहीं, बल्कि ग्लोबल हालात भी स्मार्टफोन महंगे होने की वजह बन रहे हैं. वेस्ट एशिया में जारी तनाव और बढ़ती शिपिंग लागत ने इलेक्ट्रॉनिक्स इंपोर्ट को और महंगा कर दिया है. कंपनियों को अब फोन भारत लाने में ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है.

इसके अलावा रुपये की कमजोरी और कॉम्पोनेंट्स की सीमित सप्लाई भी कीमतों पर असर डाल रही है. कंपनियां लागत बढ़ने के बाद अब सीधे ग्राहकों पर उसका बोझ डाल रही हैं.

प्रीमियम स्मार्टफोन खरीदारों पर असर कम क्यों?

दिलचस्प बात यह है कि Apple iPhone और Samsung Galaxy S-Series जैसे प्रीमियम स्मार्टफोन्स पर इसका असर फिलहाल कम दिखाई दे रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि फ्लैगशिप फोन खरीदने वाले ग्राहक कीमत को लेकर उतने संवेदनशील नहीं होते.

साथ ही Apple और Samsung जैसी कंपनियों की सप्लाई चेन ज्यादा मजबूत मानी जाती है. इसलिए बजट और मिड-रेंज खरीदार जहां महंगाई का दबाव महसूस कर रहे हैं, वहीं प्रीमियम सेगमेंट फिलहाल थोड़ा सुरक्षित नजर आ रहा है.

आने वाले महीनों में और महंगे हो सकते हैं फोन

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर AI सेक्टर की मांग इसी तरह बढ़ती रही, तो आने वाले महीनों में स्मार्टफोन की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है. खासकर बजट और मिड-रेंज कैटेगरी के ग्राहकों को ज्यादा असर झेलना पड़ सकता है.

ऐसे में अगर आप नया फोन खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो लंबा इंतजार करना शायद ज्यादा फायदे का सौदा न हो.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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