Digital Arrest: पुलिस, CBI, कोर्ट सब नकली, 75 साल के बुजुर्ग को 3 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट कर ठगे 23.5 लाख रुपये

Published by : Ankit Anand Updated At : 01 Jun 2025 8:34 AM

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Digital Arrest

Digital Arrest: जयपुर के 75 वर्षीय व्यक्ति एक भयानक ऑनलाइन घोटाले का शिकार हो गए, जिसमें साइबर अपराधियों ने पुलिस और CBI अधिकारी बनकर उन पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया. जालसाजों ने बुर्जुग को तीन दिनों तक "डिजिटल अरेस्ट" में रखा, वीडियो कॉल के जरिए धमकाया, फर्जी कोर्ट सीन दिखाया और बहुत कुछ किया.

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Digital Arrest: आए दिन साइबर हमलों की घटनाएं सुनने को मिल रही हैं. इसी से जुड़ा जयपुर के मानसरोवर इलाके से साइबर क्राइम का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां संतोष कुमार नाम के 75 वर्षीय व्यक्ति से 23.56 लाख रुपये ठगे गए हैं. साइबर अपराधियों ने उन पर मनी लॉन्ड्रिंग का झूठा आरोप लगाया और उन्हें तीन दिनों तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया.

Digital Arrest: क्या था पूरा मामला

इस घटना की शुरुआत 23 मई को सुबह 9:44 बजे हुई, जब संतोष को अज्ञात नंबरों से दो फोन कॉल आए. उन्होंने कॉल रिसीव की, जिसमें से एक ने खुद को मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन से संजय कुमार बताया. उसने दावा किया कि संतोष का मोबाइल नंबर मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी आपराधिक जांच से जुड़ा है, जिसकी कीमत 2.8 करोड़ रुपये है. इसके साथ ही साइबर अपराधियों ने उनसे यह भी कहा कि उनके नाम पर गैर-जमानती वारंट जारी हो चुका है.

नकली CBI अधिकारी और कोर्ट ने बढ़ाई टेंशन

इस झूठी केस को असलियत में बदलने के लिए कॉल करने वाले (घोटालेबाज) ने संतोष के साथ एक अन्य व्यक्ति से संपर्क करवाया, जिसने खुद को सीबीआई अधिकारी रोहित कुमार गुप्ता बताया. साथ मिलकर, संतोष को यह विश्वास दिलाया कि आरोप सच थे. इसके अलावा, और अधिक दहशत पैदा करने के लिए, घोटालेबाजों ने एक चौंकाने वाला कदम उठाया, जिसमें उन्होंने एक वीडियो कॉल के माध्यम से एक फर्जी कोर्ट रूम दिखाया, जिसमें एक न्यायाधीश अपने सभी बैंक खातों को फ्रीज करने का आदेश पढ़ रहा था.

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डर और भ्रम की वजह से कर दिए पैसे ट्रांसफर

गंभीर बीमारी से जूझ रहे संतोष ये सब देख के डर और भ्रम में आ गए और मानसिक दवाब में आके उन्होंने विभिन्न बैंक खातों में कई लेनदेन के माध्यम से 23.56 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए. जब ​​उसने जालसाजों को बताया कि उसके पास और पैसे नहीं हैं, तो उन्होंने उसे 20 लाख रुपये की FD तोड़ने के लिए राजी कर लिया.

ऐसे हुआ खुलासा

जब संतोष FD तोड़ने के लिए बैंक गए, तो मैनेजर को लगा कि कुछ गड़बड़ है. पूरी कहानी सुनने के बाद, बैंक ने तुरंत अधिकारियों को सूचित किया. 26 मई को शिप्रापथ पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक शिकायत दर्ज की गई, और साइबर क्राइम यूनिट ने जांच शुरू कर दी है.

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By Ankit Anand

अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.

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