इन 4 लुभावने और आसान तरीकों से स्कैमर्स लगा रहे आपको चूना, फिर न कहना- बताया नहीं था
Published by : Ankit Anand Updated At : 02 Jun 2025 6:08 AM
Hacking Tactics
Hacking Tactics: हैकर्स अक्सर हैकिंग के लिए हाई-टेक तकनीक का इस्तेमाल नहीं करते बल्कि वो लोगों की कमजोरियों का फायदा उठाकर कीमती जानकारियां चुरा लेते हैं. आज हम आपको 4 ऐसे सामान्य तरीके बताने जा रहे हैं जिनसे लोग अक्सर धोखा खा जाते हैं और साइबर हमलों या ऑनलाइन स्कैम के शिकार बन जाते हैं.
Hacking Tactics: लोगों को अक्सर लगता है की स्मार्टफोन हैकिंग अक्सर हाई-टेक तकनीक से किया जाता है, लेकिन असलियत में ज्यादातर साइबर हमले बेहद साधारण तरीकों से की जाती हैं. हैकर्स अब किसी मुश्किल कोड या खतरनाक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कम ही करते हैं, बल्कि वो हमारी रोजमर्रा की आदतों और चाल चलन को निशाना बनाते हैं. उनका मकसद भरोसे, दिनचर्या और तुरंत रिएक्शन का फायदा उठाकर आपकी पर्सनल जानकारियां तक पहुंच बनाना होता है.
ऐसे में यह जरूरी हो जाता है की हम हमेशा सतर्क रहें क्यूंकि साइबर अपराधी कुछ आम तरकीबों को अपना कर ही आसानी से लोगों को अपने जाल में फंसा लेते हैं. आइए जानते हैं चार ऐसे सामान्य तरीके, जिनसे लोग अक्सर धोखा खा जाते हैं और साइबर हमलों या ऑनलाइन स्कैम के शिकार बन जाते हैं.
Hacking Tactics: फर्जी QR कोड से पेमेंट स्कैम
पेमेंट सिस्टम में QR कोड के आ जाने से पेमेंट करना तो आसान हो गया है लेकिन इसी का फायदा स्कैमर्स उठाते हैं. स्कैमर्स असली QR कोड के जगह पर नकली स्टिकर चिपका देते हैं. जब आप कोड को स्कैन करके पेमेंट करते हैं, तो पैसा उनके खाते में चला जाता है. इस जाल में लोग आसानी से फस जाते हैं क्यूंकि यह पेमेंट करने का प्रोसेस काफी आसान है और हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन गई है.
Hacking Tactics: भरोसेमंद दिखने वाले खतरनाक ऐप्स
कई बार लोग ऐसे ऐप्स डाउनलोड कर लेते हैं जिनमें मेलवेयर छुपे होते हैं. फाइल क्लीनर, फ्लैशलाइट या बैटरी सेविंग जैसे ऐप्स कई बार भरोसेमंद प्लेटफॉर्म जैसे प्ले स्टोर पर भी उपलब्ध होते हैं, जिससे यूजर्स बिना ज्यादा सोच-विचार के इन्हें इंस्टॉल कर लेते हैं. एक बार अगर ये ऐप्स मोबाइल में इंस्टॉल हो गए उसके बाद ये चुपके से आपकी लोकेशन, मैसेज और निजी जानकारियां तक पहुंच जाते हैं.
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Hacking Tactics: फर्जी डिलीवरी या बैंक से जुड़े मैसेज
अक्सर हमें SMS या WhatsApp मैसेज मिलता है जिसमें लिखा होता है कि हमारी कोई पार्सल डिलीवरी मिस हो गई या बैंक से जुड़ा कोई वेरिफिकेशन अधूरा रह गया है. यह मैसेज लिंक के रूप में आते है जो एकदम असली लगते हैं. चूंकि आज के समय में लगभग हर किसी के पास कोई न कोई डिलीवरी या बैंक अकाउंट होता ही है, इसलिए यह जाल ज्यादातर लोगों को सच लगता है और उस लिंक पे क्लिक कर देते हैं. SMS और WhatsApp जैसे निजी प्लेटफॉर्म्स से आए मैसेज अक्सर भरोसेमंद लगते हैं, और यही इस धोखे की सबसे बड़ी खासियत है.
Hacking Tactics: बैंक की तरफ से आने वाले फर्जी कॉल्स
फर्जी कॉल्स करने वाले अक्सर खुद को किसी बैंक या सरकारी संस्था का अधिकारी बताता है. वो आपसे बहुत प्रोफेशनल तरीके से बात करते हैं धीरे धीरे आपकी निजी जानकारियां जैसे नाम या मोबाइल नंबर हासिल करते हैं. बातचीत के दौरान अक्सर डराने वाला माहौल बनाते हैं जैसे, “आपका खाता बंद हो सकता है,” या “संदिग्ध लेन देन हुआ है.” इनका मकसद डर नहीं, आपका जल्दी रिएक्शन लेना होता है, ताकि आप बिना सोचे समझे अपनी गोपनीय जानकारी साझा कर दें.
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अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.
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