बीमार-असहाय लोगों की देवदूत अमीना हुसेन

Updated at :16 Apr 2017 9:45 AM
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बीमार-असहाय लोगों की देवदूत अमीना हुसेन

मालदा. रास्ते में कोई बीमार दिख जाये या फिर कोई बच्चा असहाय अवस्था में मिल जाये, तो वह तुरंत मदद के लिए सामने आती हैं. मुसीबत में फंसे अनेक लोगों के लिए वह देवदूत बनकर पहुंची हैं. 20 साल से इसी तरह मानव सेवा में लगी हैं अमीना हुसेन उर्फ सीमा जोगी. लेकिन वह किसी […]

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मालदा. रास्ते में कोई बीमार दिख जाये या फिर कोई बच्चा असहाय अवस्था में मिल जाये, तो वह तुरंत मदद के लिए सामने आती हैं. मुसीबत में फंसे अनेक लोगों के लिए वह देवदूत बनकर पहुंची हैं. 20 साल से इसी तरह मानव सेवा में लगी हैं अमीना हुसेन उर्फ सीमा जोगी. लेकिन वह किसी भी तरह के प्रचार से दूर रहना चाहती हैं. इसके बावजूद नेक काम की चरचा तो फैल ही जाती है. मालदा के कई ग्रामीण इलाकों में लोग उन्हें मदर टेरेसा के दूत के रूप में देखते हैं. लोगों का कहना है कि उनके स्पर्श मात्र से लोगों को दुख-दर्द दूर होने का आश्वास मिल जाता है.

मालदा शहर के रवींद्र एवेन्यू इलाके में अपने सरकारी कर्मचारी पति एकराम हुसेन के साथ रहती हैं अमीना. दिन हो या रात, मानव सेवा ही उनका धर्म है. मानव-मानव के बीच किसी भेद के लिए उनके पास कोई जगह नहीं है. अमीना हुसेन को कोई सीमा ताई, तो कोई सीमा जोगी कह कर बुलाता है. उनका अपना कोई आश्रम नहीं है. यहां तक कि वह किसी स्वयंसेवी संगठन के साथ भी वह जुड़ी नहीं हैं. सुबह होते ही वह घर-परिवार का काम निपटा कर बेघर बच्चों, विकलांगों व अन्य असहाय लोगों की मदद के लिए निकल पड़ती हैं.

यह संवाददाता अमीना हुसेन से बात कर ही रहा था कि एक अनजान नंबर से उनके पास फोन आया. वह तुरंत गाड़ी लेकर निकल पड़ीं. उन्हें मालदा शहर के मकदूमपुर बाजार मोड़ इलाके में जाना था. वहां पहुंचने पर पाया कि काफी भीड़ जमा थी. भीड़ में घुसकर देखा कि एक मां अपने बच्चे को गोद में लिये रो रही थी. भीड़ बहुत थी, लेकिन कोई उसकी मदद के लिए आगे नहीं आ रहा था. लोग केवल तमाशबीन बने हुए थे. इसी बीच, अमीना हुसेन ने बच्चे को गोद में लिया और उसकी मां को गाड़ी में बिठाकर मालदा मेडिकल कॉलेज पहुंचीं.

रास्ते में बातचीत के दौरान पता चला कि बच्चे की मां आशरीफा बीबी का घर रतुआ इलाके में है. उसके बेटे को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. वह डॉक्टर को दिखाने आयी थी, लेकिन अचानक बच्चे की स्थिति बिगड़ गयी. इसकी वजह से घबराकर वह रोने लगी. मेडिकल कॉलेज पहुंचते ही अमीना हुसेन तीन साल के बच्चे को लिये डॉक्टर के पास गयीं. डॉक्टरों ने कहा कि अगर बच्चे को लाने में और देरी होती तो उसे बचाना मुश्किल हो जाता. सांस में तकलीफ की वजह से ही बच्चा बेहोश हो गया था. अमीना हुसेन ने चिकित्सकों से बातचीत करके इलाज का समुचित प्रबंध करवाया.

सरकारी संस्था डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी के एक अधिकारी अकीलुर रहमान ने कहा कि दीदी अमीना हुसेन आम लोगों के लिए मदर टेरेसा का दूत बन गयी हैं. लेकिन वह प्रचार में नहीं आना चाहतीं. हमलोगों को अपने काम-काज के दौरान जब भी कोई असहाय व्यक्ति दिखता है, तो हम दीदी को खबर कर देते हैं. वह बिना देरी किये पहुंचती हैं. रात हो या दिन, मानव सेवा के काम से वह कभी पीछे नहीं हटतीं. ऐसे लोगों को ईश्वर-अल्लाह का दूत ही कहा जा सकता है.
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