हबीबपुर से चार और आदिवासी किशोरी लापता दो साल से नहीं है कोइ खबर

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 10 Jan 2017 2:04 AM

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मालदा. हबीबपुर की निर्भया की दिल्ली में अत्याचार से मौत की घटना ने यहां कई आदिवासी परिवारों की आंखें खोल दी है. इसके साथ ही उन आदिवासी परिवारों की चिंता भी काफी बढ़ गई है, जिनकी बच्चियां मेहनत-मजदूरी करने के लिए दिल्ली गई हुई हैं. इस बीच, मालदा से दिल्ली काम करने गई चार बच्चियों […]

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मालदा. हबीबपुर की निर्भया की दिल्ली में अत्याचार से मौत की घटना ने यहां कई आदिवासी परिवारों की आंखें खोल दी है. इसके साथ ही उन आदिवासी परिवारों की चिंता भी काफी बढ़ गई है, जिनकी बच्चियां मेहनत-मजदूरी करने के लिए दिल्ली गई हुई हैं. इस बीच, मालदा से दिल्ली काम करने गई चार बच्चियों का कोई अता-पता पिछले दो साल से नहीं है. आदिवासी बहुल इलाका हबीबपुर थाना के अकतेल ग्राम पंचायत के अधीन पलाश तथा कन्याडूबी गांव की रहने वाली इन चार किशोरियों का कोई अता-पता नहीं है. अब परिवार वालों ने पुलिस प्रशासन तथा एक स्वयंसेवी संगठन शक्तिवाहिनी की शरण ली है.

शक्तिवाहिनी के सदस्यों का कहना है कि इस इलाके में नारी तस्कर गिरोह सक्रिय है. काम का लोभ देकर बच्चियों को बाहर ले जाकर बेच दिया जाता है. इधर, मालदा के जिला अधिकारी शरद द्विवेदी ने कहा है कि यदि किसी इलाके से कोई बच्ची गायब हुई है, तो शिकायत दर्ज होते ही पुलिस जांच करेगी. उल्लेखनीय है कि शक्तिवाहिनी के सदस्यों ने पलाश गांव की रहने वाली किशोरी को दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके से आशंकाजनक स्थिति में 19 दिसंबर को बरामद किया था. 17 दिनों की चिकित्सा के बाद भी डॉक्टर उसे नहीं बचा पाये. 4 जनवरी को उसकी मौत हो गई. रविवार को ही किशोरी के शव को मालदा के पलाश गांव में लाया गया है. शव के साथ शक्तिवाहिनी के कुछ लोग भी आये हुए हैं. इन्हीं लोगों को गांव वालों ने बताया कि दो साल के दौरान इस इलाके की चार नाबालिग बच्चियां गायब है. उसके बाद शक्तिवाहिनी के सदस्यों ने इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज करायी है. शक्तिवाहिनी के मालदा जिले के इंचार्ज सईदुल इस्लाम ने बताया है कि रविवार को उन लोगों को पता चला कि पलाश तथा कन्याडूबी की चार बच्चियां गायब हैं. दो साल पहले यह सभी दिल्ली काम करने गई थी. उसके बाद वापस नहीं लौटी. उन्होंने कहा कि पलाश गांव की मनमनी मार्डी (16) तथा सोनाली मार्डी दो साल पहले घरेलू काम के लिए दिल्ली गई थी.

दोनों के माता-पिता नहीं हैं. अपने भाई सुजीत मार्डी के पास दोनों रहती थी. दिल्ली जाने के बाद से ही दोनों का कोई पता नहीं चल रहा है. सुजीत मार्डी ने संगठन के लोगों को बताया है कि एक रिश्तेदार के साथ दोनों दिल्ली कमाने के लिए गई थी. रिश्तेदार का भी पता नहीं है.

इसी तरह से कन्याडूबी गांव की रहने वाली नाबालिग वंदना हेमब्रम (15) तथा नीलमणि टुडू (17) का भी पता-ठिकाना नहीं है. उसके भाई तुलाराम हेमब्रम ने बताया है कि परिवार में गरीबी की वजह से बहन मेहनत-मजदूरी के लिए दिल्ली गई थी. नाबालिग नीलमणि के पिता लक्ष्मीराम टुडू ने भी कहा है कि बूढापे में रोग की वजह से कोई काम नहीं कर पाते हैं. गरीबी को देखकर ही बेटी काम करने के लिए दिल्ली गई थी. अब बेटी जिंदा भी है या नहीं, कुछ कह नहीं सकते. शक्तिवाहिनी के सईदुल इस्लाम ने कहा है कि दिल्ली में मृत किशोरी का शव जिला प्रशासन की मदद से यहां ले आये हैं. अब गांव वालों को भी ऐसा लग रहा है कि बेटियों को काम के लिए दिल्ली नहीं भेजना चाहिए. इस घटना के बाद यहां के आदिवासी परिवारों में आतंक है. इधर, हबीबपुर थाना के आइसी अत्रेयी सेन ने बताया है कि चार किशोरियों के लापता होने की खबर उन्हें भी स्वयंसेवी संगठन के द्वारा मिली है. परिवार के लोगों को थाने में शिकायत दर्ज कराने के लिए कहा गया है. एक बार शिकायत दर्ज होने के साथ ही पुलिस जांच में जुट जायेगी.

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