डंकन्स को लौटाये जा रहे हैं सात चाय बागान

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 Oct 2016 12:53 AM

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जलपाईगुड़ी. कलकत्ता हाइकोर्ट के निर्देश पर अलीपुरद्वार जिले में स्थित डंकन्स के सात ठप पड़े चाय बागानों को नौ महीने के बाद इंडियन टी बोर्ड डंकन्स को वापस लौटा दे रहा है. हालांकि टी बोर्ड इन बागानों की निगरानी करेगा. बुधवार को जलपाईगुड़ी में छोटे चाय किसानों के वर्कशॉप में शामिल होने आये टी बोर्ड […]

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जलपाईगुड़ी. कलकत्ता हाइकोर्ट के निर्देश पर अलीपुरद्वार जिले में स्थित डंकन्स के सात ठप पड़े चाय बागानों को नौ महीने के बाद इंडियन टी बोर्ड डंकन्स को वापस लौटा दे रहा है. हालांकि टी बोर्ड इन बागानों की निगरानी करेगा. बुधवार को जलपाईगुड़ी में छोटे चाय किसानों के वर्कशॉप में शामिल होने आये टी बोर्ड के उत्तर बंगाल के उप-निदेशक रमेश कुजूर ने एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी. वर्कशॉप का आयोजन चाय नीलामी केंद्र में किया गया था.
रमेश कुजूर ने बताया कि बीते साल केंद्रीय वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमन डंकन्स के इन चाय बागानों का मुआयना करने खुद आयी थीं. इसके बाद इस साल 24 जनवरी को केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय की ओर से टी बोर्ड को इन सात चाय बागानों का अधिग्रहण करने का निर्देश दिया गया. इस निर्देश के मुताबिक टी बोर्ड ने सात चाय बागानों के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की. लेकिन तभी डंकन्स समूह ने इसके खिलाफ हाइकोर्ट में मामला दायर कर दिया.
टी बोर्ड ने इस साल 21 मार्च को इन चाय बागानों की बिक्री के लिए बोली मंगवायी. डंकन्स के धुमचीपाड़ा, बीरपाड़ा, तुलसीपाड़ा और चार अन्य बागानों को खरीदने के लिए गुडरिक, एंडयूल जैसे बड़े चाय उद्योग समूहों ने इन बागानों का मुआयना किया. लेकिन इस फायदे का सौदा नहीं महसूस करते हुए दोनों समूह बोली लगाने से पीछे हट गये. इसके बाद टी बोर्ड ने नये सिरे से नीलामी की सूचना नहीं निकाली.
टी बोर्ड की हाल में कोलकाता में हुई बैठक में निर्णय हुआ कि डंकन्स के इन सात चाय बागानों का टी बोर्ड न तो अधिग्रहण करेगा और न ही नये मालिक को बेचेगा. रमेश कुजूर ने बताया कि इन बागानों को वापस डंकन्स को लौटाने का निर्णय लिया गया है. मालूम चला है कि डंकन्स के बीरपाड़ा बागान में 3937 श्रमिक, ग्यारगेंडा में 1777 श्रमिक, लंकापाड़ा में 2919 श्रमिक, हांटापाड़ा में 2295 श्रमिक, धुमचीपाड़ा में 2306 श्रमिक और डिमडिमा में 2306 श्रमिक है. इस तरह इन सात बागानों में कुल 17 हजार 555 श्रमिक हैं.
रमेश कुजूर ने बताया कि इन बागानों को डंकन्स को लौटाने के बावजूद इनके श्रमिकों के बकाये के भुगतान के लिए टी बोर्ड डंकन्स समूह के साथ चर्चा करेगा. इन सात चाय बागानों में क्या हालात हैं, इसे लेकर बागान हर 15 दिन पर डंकन्स को रिपोर्ट देंगे. टी बोर्ड भी अलग से रिपोर्ट लेगा. बागानों का डंकन्स परिचालन करेगा, पर टी बोर्ड भी अपनी ओर से इस पर नजर रखेगा. इन सातों बागानों के ठप होने के बाद, साल 2014 के अंत में इनके श्रमिकों को लेकर चाय बागान बचाओ कमिटी गठित हुई थी. इस कमिटी के संयोजक विष्णु घातानी ने बताया कि हम लोग किस कष्ट में रह रहे हैं, यह बागान में आने से ही समझ में आ जायेगा.
चूंकि ये बागान बंद घोषित नहीं हुए हैं, इसलिए श्रमिकों को सरकारी सुविधा भी नहीं मिल रही है. जो बागान बंद घोषित हो गये हैं, उनके श्रमिकों को मासिक फाउलाइ मिल रहा है. 1500 रुपये पूजा बोनस भी उन्हें मिला. लेकिन इन सात बागानों के श्रमिकों को कुछ नहीं मिल रहा. अगर इन सात बागानों को फिर से डंकन्स चलाना चाहता है, तो उसे आनेवाले दिनों में सारा पुराना बकाया चुकाना होगा. सभी श्रमिक यही चाहते हैं कि बागान खुलें.
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