लकड़ी तस्करों पर नकेल कसने की तैयारी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 13 Jun 2016 1:42 AM
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जलपाईगुड़ी. उत्तर बंगाल के विभिन्न जंगलों से लकड़ी तस्करी की घटनाओं में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है. वन विभाग भले ही लकड़ी तस्करी को रोकने के दावे करे,लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि इस प्रकार की घटना में कोई कमी नहीं हो रही है. माना जा रहा है कि तस्करी की बढ़ती घटनाओं से राज्य […]
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जलपाईगुड़ी. उत्तर बंगाल के विभिन्न जंगलों से लकड़ी तस्करी की घटनाओं में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है. वन विभाग भले ही लकड़ी तस्करी को रोकने के दावे करे,लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि इस प्रकार की घटना में कोई कमी नहीं हो रही है. माना जा रहा है कि तस्करी की बढ़ती घटनाओं से राज्य के नये उत्तर बंगाल विकास मंत्री रवींद्रनाथ घोष भी चिंतित हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अब उत्तर बंगाल विकास मंत्रालय लकड़ी की तस्करी पर नकले कसने की तैयारी में है. इस मामले को लेकर मंत्री रवींद्रनाथ घोष ने जिला प्रशासन को निर्देश भी दिया है.
डुवार्स के जंगलो से साल, शीशम और टीक जैसी मूल्यवान लकड़ियों की तस्करी धड़ल्ले से हो रही है. लकड़ियों की तस्करी को लेकर अब पर्यावरण प्रेमी संस्थाओं ने प्रशासन को घेरना शुरू कर दिया है. दिन व रात तस्करों के लिये कोई मायने नहीं रखता है वे लगातार पेड़ काटते जा रहे हैं. पर्यावरण प्रेमी संस्थाओं का आरोप है कि जगलों की अबाध कटाई का एक भयंकर परिणाम देखने को मिल सकता है. इस कदर पेड़ों की कटाई जारी रहने से एक दिन पेड़ों का नामो निशान मिट जायेगा. जंगलों की कटाई से जानवरों को भी काफी परेशानी होती है. राह भटकने की वजह से लगातार जंगली जानवर बस्ती इलाकों में प्रवेश कर उत्पात मचाते हैं. वन मंत्री विनय कृष्ण वर्मन ने भी शनिवार को लकड़ियों की तस्करी पर नकेल कसने का भरोसा दिया है. उन्होंने शनिवार का सुकना में हुई बैठक के दौरान इस मुद्दे पर काफी देर तक वन विभाग के अधिकारियों से बातचीत की.
पर्यावरण प्रेमी संस्थाओं का आरोप है कि गोरूमारा, चंपरामारी और नागराकाटा के जंगलों से लगातार पेड़ो की कटाई की जा रही है. जंगल डुवार्स के गौरव हैं. इन जंगलों में काफी मूल्यवान पेड़ों के अलावा जंगली जानवर भी हैं. जंगली जानवर के साथ ही इंसानों की रक्षा हेतु भी जंगलों का होना आवश्यक है. दिन तो दिन रातों में भी पेड़ों को काट कर तस्करी की जा रही है. सब कुछ जानकर भी वन विभाग ने चुप्पी साध रखी है. इधर, वन विभाग सूत्रों का कहना है कि वन क्षेत्र में निगरानी करने वाले गार्डों की संख्या काफी कम है. गोरूमारा जैसे इतने बड़े जंगल की निगरानी की जिम्मदारी मात्र सात से आठ लोगों पर है. इसमें आधे लोग दिन में रखवाली करते हैं और बांकी रात में. इसके अलावा गश्ती के लिये गाड़ी भी मुहैया नहीं करायी गयी है. एक पहरेदार पैदल कब तक और कितनी दूरी तक निगरानी रख सकता है.
इस संबंध में उत्तर बंगाल विकास मंत्रालय ने भी कड़े कदम उठाने का निर्देश जिला शासकों को दिया है. हाल में उत्तरकन्या में हुई एक बैठक में मंत्री रवींद्रनाथ घोष ने कहा कि जंगल की संपत्तियों की बड़े पैमाने पर तस्करी हो रही है. इस पर लगाम लगाना आवश्यक है. तस्करों को गिरफ्त में लेने के लिये सरकार की ओर से सभी सुविधाएं मुहैया करायी जायेगी. इधर वन मंत्री विनय कृष्ण वर्मन ने कर्मचारी कम होने की बात को स्वीकार किया है. उन्होंने कहा कि वन विभाग में कर्मचारियों की नियुक्ति आवश्यक है. इस संबंध में मुख्यमंत्री से विचार-विमर्श किया जायेगा.
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