सिर्फ दिसंबर महीने में हुई 17 नवजात की मौत
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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रोगी और परिजन परेशान, इलाज कराने से लगता है डर सिलीगुड़ी : 26 दिसंबर को उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की गलती से प्रसूता की मौत के बाद अब वहां चार नवजात बच्चे की मौत का मामला सामने आया है. हांलाकि कर्मचारियों की गलती से हो रही मौतों को लेकर कोइ भी मुंह खोलने को […]
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रोगी और परिजन परेशान, इलाज कराने से लगता है डर
सिलीगुड़ी : 26 दिसंबर को उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की गलती से प्रसूता की मौत के बाद अब वहां चार नवजात बच्चे की मौत का मामला सामने आया है. हांलाकि कर्मचारियों की गलती से हो रही मौतों को लेकर कोइ भी मुंह खोलने को तैयार नहीं है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार सिर्फ दिसंबर महीने में ही 17 नवजात की मौत चिकित्सा कर्मचारियों की गलती से हो चुकी है. ऐसे भी समय समय पर मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं. लेकिन अब इस समस्या ने एक विकराल रूप धारण कर लिया है. मरीजों के मन में उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज का नाम सुनने से ही भय लगने लगा है. मेडिकल कॉलेज में अच्छी चिकित्सा के लिये मरीजों को लाया जाता था़
अब मरीज के साथ ही परिजन भी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में इलाज कराने से कतरा रहे है. उलेलखनीय है कि 26 दिसंबर को मेडिकल कॉलेज की एक नर्स की गलती से एक प्रसूता की मौत हो गयी थी. मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने इस मामले को दबाने की पूरी कोशिश की एवं बिना पोस्टमार्टम किये ही प्रसूता के शव को परिवार को सौंप दिया था. मृतका के परिवार की ओर से शव को कब्र से निकाल कर पोस्टमार्टम कराने की मांग की गयी है.
इस घटना के बाद से चार नवजात की भी यहां मौत हो जाने का आरोप सामने आ रहा है़ इसबीच मारे गए नवजातों के परिजनों ने आरोप लगाया है कि मेडिकल कॉलेज व अस्पताल की नर्स गर्भवती महिलाओं का ठीक से ध्यान नहीं रखती है. पैसा देकर निजी नर्स ना रखने पर गर्भवती महिला एक लावारिस की तरह वार्ड में पड़ी रहती है़
देखने वाला कोई नहीं होता. किसी प्रकार की असुविधा होने पर नर्स को बुलाने पर वह नहीं आती. परिजनो का कहना है कि कभी वार्ड में ही गर्भवती का प्रसव स्वयं हो जाता है तो कभी प्रसव पीड़ा के दौरान गर्भवती बेड से नीचे गिर जाती है,तो कभी ऑपरेशन करने के काफी देर बाद सिलाई की जाती है.
परिजनों का आरोप है कि दहलाने वाले इन आंकड़ो के बाद भी मेडिकल प्रबंधन की ओर से कोइ कदम नहीं उठाया जा रहा है. इस मामले में दार्जिलिंग जिला मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डा. असित विश्वास से संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज का मामला मेडिकल कॉलेज के प्राध्यापक व मेडिकल अधीक्षक का है. मेडिकल कॉलेज पूरी तरह से इनकी निगरानी है एवं बिना किसी तथ्य के वे इस विषय पर कुछ नहीं बोलेंगे. उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डा. समीर घोष राय से इस विषय पर बात करने पर उन्होंने मामले को मेडिकल अधीक्षक के सिर पर फेंकते हुये इसको टाल गये.
उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज अधीक्षक डा. निर्मल बेरा ने कहा कि इस तरह के मामले उनके समक्ष नहीं आयें है. अगर इस तरह का कोई मामला उनके पास आता है तो वे अवश्य ही उस मामले की पूरी जांच कराते. उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के प्रसूता विभाग के विभाग प्रमुख डा. मृदुला चटर्जी ने बताया कि विभाग के कर्मचारी काफी साहसी व मरीजों की सठिक इलाज के लिये तत्पर है. प्रसूता विभाग चिकित्सा करने में पूरी तरह से सक्षम है.
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