जीटीए को मिला वन बस्तियों का अधिकार
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जमीन का पट्टा एवं अन्य दस्तावेजों का होगा निदान दार्जिलिंग : जीटीए क्षेत्र की वन बस्तियों में रहते आ रहे लोगों के घर एवं जमीन के कागज-पत्रों की समस्याओं का समाधान अब जीटीए ही करेगी. जीटीए के सभासद विनय तामांग द्वारा हस्ताक्षरित किये गये प्रेस विज्ञप्ति में इस बात का उल्लेख किया गया है. जमीन […]
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जमीन का पट्टा एवं अन्य दस्तावेजों का होगा निदान
दार्जिलिंग : जीटीए क्षेत्र की वन बस्तियों में रहते आ रहे लोगों के घर एवं जमीन के कागज-पत्रों की समस्याओं का समाधान अब जीटीए ही करेगी. जीटीए के सभासद विनय तामांग द्वारा हस्ताक्षरित किये गये प्रेस विज्ञप्ति में इस बात का उल्लेख किया गया है. जमीन होने के बावजूद संबंधित कागजात नहीं होने के कारण वन बस्तियों के लोग काफी परेशानी में थे.
गांव-बस्तियों की समस्याओं के समाधान के लिए जीटीए ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से लेकर मंत्रालयों तक कइ बार बातचीत की . इसके बाद जनजाति मंत्रालय ने कुछ दिनों पहले जीटीए को एक पत्र जारी किया है जिस में वन बस्तियों के निवासियों को घर एवं जमीन के पट्टा सहित अन्य समस्याओं के समाधान का अधिकार जीटीए को दिया गया है. मंत्रालय द्वारा जारी पत्र के आधार पर जीटीए ने निर्वाचित सभासदों को लेकर महकमा स्तरीय कमेटी, जिला स्तरीय कमेटी का गठन किया है.
जिला स्तरीय कमेटी में विनय तामांग, डॉ राम बहादुर भुजेल और रतन थापा शामिल हैं. वहीं महकमा स्तरीय कमेटी में कालिम्पोंग के गोपाल रूचाल, काजिम भुटिया और दावा लेप्चा शामिल हैं.
सदर महकमा कमेटी में रमेश लामा, नर्बुजी लामा और पीटी ओला हैं. कर्सियांग महकमा स्तरीय कमेटी में रोशन गिरी, अनित थापा और योगेन राई शामिल किये गये हैं जो इन समस्याओं को देखेंगे.
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