चाय श्रमिक यूनियनों के संयुक्त फोरम में दो-फाड़

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जलपाईगुड़ी. बंद चाय बागानों को खोलने तथा डंकन्स समूह के चाय बागानों की स्थिति स्वाभाविक करने को लेकर गठित विभिन्न चाय श्रमिक यूनियनों के संयुक्त फोरम में दोफाड़ हो गया है. संयुक्त मंच में शामिल सीटू ने एक दिसंबर को चाय उद्योग में हड़ताल के साथ धरने का आह्वान किया है. इस बात को लेकर […]

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जलपाईगुड़ी. बंद चाय बागानों को खोलने तथा डंकन्स समूह के चाय बागानों की स्थिति स्वाभाविक करने को लेकर गठित विभिन्न चाय श्रमिक यूनियनों के संयुक्त फोरम में दोफाड़ हो गया है. संयुक्त मंच में शामिल सीटू ने एक दिसंबर को चाय उद्योग में हड़ताल के साथ धरने का आह्वान किया है. इस बात को लेकर नागराकाटा के आदिवासी चर्चा केन्द्र में संयुक्त फोरम की एक आवश्यक बैठक हुई. इस बैठक में शामिल अन्य संगठनों के नेताओं ने बंद का विरोध किया.

यहां उल्लेखनीय है कि हाल ही में सिलीगुड़ी में संयुक्त फोरम की एक बैठक हुई थी. इसी बैठक में चाय उद्योग की स्थिति सुधारने की मांग को लेकर एक दिसंबर को बंद का निर्णय लिया गया था. बंद को सफल बनाने के लिए 27 से 30 नवंबर तक चाय बागानों के सामने धरना आदि देने का भी निर्णय लिया गया था. श्रमिकों की मुख्य मांग बंद चाय बागानों को खोलने के साथ-साथ डंकन्स के 16 चाय बागानों की स्थिति सामान्य करने तथा चाय श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी निर्धारित करने आदि की मांग शामिल है. मंगलवार को इस मुद्दे को लेकर जब नागराकाटा में संयुक्त फोरम की बैठक हुई, तो उसमें संगठन के सह-संयोजक जॉन बारला ने विद्रोह की घोषणा कर दी.

उन्होंने कहा कि बंद को लेकर सिलीगुड़ी में संयुक्त फोरम की जो बैठक हुई थी, उसमें वह शामिल नहीं हुए थे. उसके बाद भी संयुक्त फोरम द्वारा पास प्रस्ताव में उनके नाम को भी शामिल कर दिया गया. श्री बारला ने कहा कि एक दिन के बंद से चाय श्रमिकों को कोई लाभ नहीं होगा. उल्टे चाय श्रमिकों को एक दिन के वेतन से हाथ धोना पड़ेगा. इसीलिए वह इस बंद का विरोध कर रहे हैं. दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस के चाय श्रमिक यूनियन तृणमूल टी प्लांटेशन वर्कर्स यूनियन के नेता जोवाकिम बाकला और मनोज कार्की ने बताया कि सीटू ने बंद बुलाने का एकतरफा निर्णय लिया है. संयुक्त फोरम इस निर्णय के साथ नहीं है. राज्य सरकार चाय बागानों की समस्या दूर करने के लिए कई कोशिशें कर रही है. स्वयं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस समस्या के समाधान के लिए काम कर रही हैं. ऐसे में वह लोग बंद का समर्थन नहीं कर सकते.

दूसरी तरफ संयुक्त फोरम के कन्वेनर तथा सीटू नेता जिआउल आलम ने साफ-साफ कहा है कि मंगलवार को नागराकाटा में संयुक्त फोरम की कोई बैठक ही नहीं थी. तृणमूल के चाय श्रमिक संगठन ने इस बैठक का आह्वान किया था. सिलीगुड़ी में जो बैठक हुई थी, उसी में एक दिसंबर को बंद का निर्णय लिया गया था. इतना ही नहीं, 19 नवंबर को डुवार्स के चालसा में एक बार फिर से संयुक्त फोरम की बैठक हो रही है. उसी बैठक में बंद के साथ-साथ आगे की रणनीति पर विचार किया जायेगा.

इस बीच, सबसे आश्चर्य की बात है कि कांग्रेस नेता तथा चाय श्रमिक यूनियन के डिफेंस कमेटी के संयोजक समीर राय ने भी बंद का विरोध किया है. वह नागराकाटा की बैठक में शामिल भी हुए. इससे पहले सिलीगुड़ी में जो बैठक हुई थी, उसमें भी श्री राय शामिल हुए थे और तब उन्होंने बंद का समर्थन किया था. अब बंद का विरोध कर उन्होंने एक तरह से तृणमूल कांग्रेस का समर्थन किया है. इस मुद्दे पर श्री राय संवाददाताओं से कुछ भी कहना नहीं चाहते. आदिवासी नेता जॉन बारला का रूख भी साफ नहीं है. पिछले दिनों उन्होंने डंकन्स समूह के चाय बागानों को लेकर आंदोलन का भी ऐलान किया था. अचानक वह भी अपने निर्णय से बदल गये हैं. चाय श्रमिकों के हित के लिए गठित संयुक्त फोरम में मची इस उठा-पटक के बाद एक दिसंबर के बंद को लेकर भी संशय की स्थिति बनी हुई है.
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