चाय श्रमिकों की मौत के मामले ने पकड़ा तूल, भाजपा ने मंत्री गौतम देव का मांगा इस्तीफा

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सिलीगुड़ी. डुवार्स के बागराकोट चाय बागान में भूख तथा बीमारी की वजह से चाय श्रमिकों की मौत के मामले ने यहां काफी तूल पकड़ लिया है. बागराकोट चाय बागान में पिछले कुछ दिनों के दौरान भूख तथा बीमारी की वजह से छह चाय श्रमिकों की मौत हो चुकी है. बागराकोट चाय बागान सहित डंकन्स समूह […]

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सिलीगुड़ी. डुवार्स के बागराकोट चाय बागान में भूख तथा बीमारी की वजह से चाय श्रमिकों की मौत के मामले ने यहां काफी तूल पकड़ लिया है. बागराकोट चाय बागान में पिछले कुछ दिनों के दौरान भूख तथा बीमारी की वजह से छह चाय श्रमिकों की मौत हो चुकी है. बागराकोट चाय बागान सहित डंकन्स समूह के तमाम चाय बागानों की स्थिति यहां काफी दयनीय है.

तराई तथा डुवार्स में स्थित डंकन्स समूह के सभी 16 चाय बागान खस्ताहाल पड़े हुए हैं. इन चाय बागानों में काम कर रहे चाय श्रमिक वेतन तथा राशन से महरूम हैं. इस कंपनी के नागेश्वरी चाय बागान से श्रमिकों की मौत का जो सिलसिला शुरू हुआ था, वह अब तक जारी है. जून महीने में नागेश्वरी चाय बागान में भूख तथा बीमारी की वजह से तीन चाय श्रमिकों की मौत हुई थी और अब बागराकोट चाय बागान में श्रमिकों की मौत का जुलूस निकल रहा है.

यह सबकुछ ऐसे समय पर हो रहा है जब राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उत्तर बंगाल दौरे पर हैं. मुख्यमंत्री के बागराकोट चाय बागान का दौरा नहीं किये जाने को लेकर विपक्ष ने उन पर निशाना साधा है. विपक्ष के निशाने पर उत्तर बंगाल विकास मंत्री गौतम देव भी हैं. भाजपा ने तो इस मुद्दे पर गौतम देव से इस्तीफे की मांग की है. भाजपा के जिला महासचिव नंदन दास का कहना है कि आज के जमाने में भूख से किसी की मौत होना राज्य के लिए कलंक है. चाहे वह चाय श्रमिक हों या अन्य किसी उद्योग से जुड़े मजदूर.

श्री दास ने उत्तर बंगाल विकास मंत्री गौतम देव पर निशाना साधते हुए कहा कि वह उत्तर बंगाल के अघोषित मुख्यमंत्री हैं. वह बार-बार सिर्फ चाय बागानों का दौरा कर रहे हैं. श्रमिकों के कल्याण की कोई कोशिश नहीं की जा रही है. राज्य की तृणमूल सरकार ने सत्ता में आने के बाद सिलीगुड़ी में मिनी सचिवालय उत्तरकन्या का गठन किया. तमाम दावे किये जा रहे थे कि उत्तरकन्या के बन जाने के बाद उत्तर बंगाल की सभी समस्याएं दूर हो जायेंगी. वास्तविक रूप में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तरकन्या तृणमूल नेताओं के आरामगाह के अलावा और कुछ भी नहीं है. श्री दास ने आगे कहा कि उत्तर बंगाल विकास मंत्री होने के कारण गौतम देव की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने पद से इस्तीफा दें. उन्होंने गौतम देव पर राज्य सरकार तथा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं देने का आरोप लगाया. श्री दास ने कहा कि केन्द्र सरकार चाय श्रमिकों की मदद करना चाहती है, लेकिन राज्य सरकार के अड़ियल रवैये के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा है.

राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर अब तक केन्द्र सरकार से बातचीत तक नहीं की है. हाल ही में केन्द्रीय जनजाति मंत्री जुएल उरांव चाय बागानों के दौरे पर आये थे. तब उन्होंने साफ-साफ कह दिया था कि राज्य सरकार ने चाय बागानों तथा चाय श्रमिकों की स्थिति सुधारने के लिए केन्द्र सरकार से कोई मदद नहीं मांगी है. इससे साफ जाहिर है कि मंत्री गौतम देव तथा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केन्द्र सरकार को अंधेरे में रखा है. उन्होंने मुख्यमंत्री के उत्तर बंगाल दौरे पर भी सवालिया निशान लगाया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उत्तर बंगाल में रहते बागराकोट चाय बागान का दौरा करना चाहिए था. उनके बागान दौरे से प्रशासनिक तत्परता बढ़ती और चाय श्रमिकों को कुछ न कुछ लाभ होता. बागराकोट के चाय श्रमिक मुख्यमंत्री के आने का बस इंतजार करते भर रह गये.

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