इंसेफलाइटिस : मेडिकल में अव्यवस्था का आलम

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सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी सहित इसके आसपास के इलाकों में इंसेफलाइटिस की बीमारी ने गंभीर रूप धारण कर लिया है. हर दिन ही इस बीमारी से पीड़ित रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है. उत्तर बंगाल के विभिन्न इलाकों में भी इंसेफलाइटिस से पीड़ित मरीज पाये जा रहे हैं. प्राप्त जानकारी के अनुसार उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज […]

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सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी सहित इसके आसपास के इलाकों में इंसेफलाइटिस की बीमारी ने गंभीर रूप धारण कर लिया है. हर दिन ही इस बीमारी से पीड़ित रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है. उत्तर बंगाल के विभिन्न इलाकों में भी इंसेफलाइटिस से पीड़ित मरीज पाये जा रहे हैं. प्राप्त जानकारी के अनुसार उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज में इंसेफलाइटिस के लक्ष्ण को लेकर वर्तमान में 19 रोगी भर्ती हैं. उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज सिलीगुड़ी तथा इसके आसपास के इलाकों के लिए सबसे बड़ा अस्पताल है. आसपास के लोग बेहतर चिकित्सा के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं.

इंसेफलाइटिस के इतने गंभीर रूप धारण करने के बाद भी इस अस्पताल में अव्यवस्था का आलम कायम है. रोगियों के परिजनों ने उचित चिकित्सा नहीं मिलने का आरोप लगाया है. रोगियों के परिजनों का कहना है कि सीसीयू में तो बेडों की संख्या में कमी है ही, साथ ही जेनरल वार्ड में भी रोगियों को बेड उपलब्ध नहीं कराये जा रहे हैं. जमीन पर ही रोगियों की चिकित्सा की जा रही है. मेडिकल कॉलेज में रोगियों के कई परिजनों ने चिकित्सा में लापरवाही का भी आरोप लगाया और कहा कि रोगियों को जरूरी दवायें नहीं दी जा रही है.

परिजनों को काफी अधिक कीमत पर बाहर से दवा खरीदनी पड़ रही है. इसकी वजह से परिजन काफी परेशान हैं. यह आलम तब है जब शनिवार को उत्तर बंगाल विकास मंत्री तथा रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष गौतम देव ने यहां एक उच्च स्तरीय बैठक की थी. उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को सभी रोगियों की चिकित्सा उन्नत तथा मुफ्त में किये जाने के निर्देश दिये थे. रोगियों के परिजनों का कहना है कि मंत्री के निर्देश का कोई असर नहीं हो रहा है. बेहतर चिकित्सा पाने के लिए रोगी तथा उनके परिजन इधर से उधर भटक रहे हैं. इस बीच, मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्था के इस आलम को देखते हुए विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोरचा खोल दिया है. नॉर्थ बंगाल वोलंटियरी ब्लड डोनर फोरम के अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने मेडिकल कॉलेज में उचित संख्या में वेंटीलेटर मशीन उपलब्ध नहीं होने का आरोप लगाया है.

उन्होंने कहा है कि दो दिनों पहले इंसेफलाइटिस की बीमारी से जिस महिला की मौत हुई, उसे वेंटीलेटर पर नहीं रखा जा सका था. उन्होंने कहा कि जापानी इंसेफलाइटिस एक खतरनाक बीमारी है और यह सीधा रोगी के दिमाग पर असर करता है. ऐसे में पर्याप्त मात्र में ऑक्सीजन मिलने से ही रोगी की जान बच सकती है. वेंटीलेटर होने से रोगियों को ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्र कृत्रिम तरीके से दे पाना संभव है. उन्होंने सरकार से मेडिकल कॉलेज में पर्याप्त संख्या में वेंटीलेटर उपलब्ध कराने की भी मांग की. उन्होंने कहा कि इस तरह की खतरनाक बीमारी से निपटने के लिए मेडिकल कॉलेज में जो ढांचागत सुविधाएं होनी चाहिए, उसका पूरी तरह से अभाव है. पिछले दो वर्षो से इंसेफलाइटिस इस इलाके में महामारी का रूप लेते रहा है. उसके बाद भी मेडिकल कॉलेज सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में ढांचागत सुविधाओं की विकास की कोशिश नहीं की गई. इसके साथ ही उन्होंने इस बीमारी से निपटने के लिए टीकाकरण अभियान भी शुरू करने की मांग की. उन्होंने कहा कि सिलीगुड़ी नगर निगम के सभी 47 वाडरे में कैम्प लगाकर हर उम्र वर्ग के लोगों का टीकाकरण होना चाहिए. उन्होंने इस बीमारी से निपटने के लिए जागरूकता अभियान शुरू करने की मांग की.

सोमनाथ चटर्जी ने कहा है कि जिस तरह से इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है, उससे साफ है कि यह बीमारी आने वाले दिनों में और भी खतरनाक रूप धारण करेगा. ऐसी परिस्थिति के बाद भी न तो राज्य सरकार ने और न ही सिलीगुड़ी नगर निगम ने अब तक किसी प्रकार के जागरूकता अभियान की शुरूआत की है. इस बीमारी की सबसे बड़ी वजह जल जमाव के कारण मच्छरों का पनपना है. आम लोग अपने घर के आसपास जल जमाव न होने दें, इसके लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान शुरू करने की जरूरत है.

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