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मदद के लिए तरस रहे बड़ाइल अनाथ आश्रम के बच्चे

Updated at : 29 Aug 2019 1:24 AM (IST)
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मदद के लिए तरस रहे बड़ाइल अनाथ आश्रम के बच्चे

89 वर्षीय कर्णधार आश्रम चलाने में हैं असमर्थ आश्रम व बच्चों के लिए सरकारी मदद की लगायी गुहार बालुरघाट :बुनियादपुर के बड़ाइल गांव में बड़ाइल उपजाति कल्याण संघ नाम पर एक अनाथाश्रम है. इस आश्रम में 27 अनाथ बच्चे रहते हैं. इस आश्रम को अपने लंबे प्रयास से श्री सुकुमार राय चौधरी चला रहे हैं. […]

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89 वर्षीय कर्णधार आश्रम चलाने में हैं असमर्थ

आश्रम व बच्चों के लिए सरकारी मदद की लगायी गुहार
बालुरघाट :बुनियादपुर के बड़ाइल गांव में बड़ाइल उपजाति कल्याण संघ नाम पर एक अनाथाश्रम है. इस आश्रम में 27 अनाथ बच्चे रहते हैं. इस आश्रम को अपने लंबे प्रयास से श्री सुकुमार राय चौधरी चला रहे हैं. वह 1971 साल में बांग्लादेश के मुक्तियुद्ध के समय उस देश से आये शरणार्थियों की सेवा के लिए यादवपुर से उत्तर बंगाल आये थे.
उस समय भारत सेवाश्रम संघ के स्वर्गीय प्रज्ञानंद जी महाराज के सौजन्य से लोकसेवा में खुद को नियोजित कर दिया. 1995 साल में इलाके के बड़ाइल उपजाति कल्याण संघ की जिम्मेदारी ली. इसके बाद कभी घर नहीं लौट पाये. अब यह आश्रम ही उनका घर बन गया है. एक पिता की तरह अनाथाश्रम के बच्चों को संभालने में जिंदगी गुजार दी. शुरू के दिनों में भारत सेवाश्रम संघ सहित विभिन्न जगहों से अनुदान मिलता था. लेकिन अब सभी पीछे हट चुके है.
सुकुमार राय चौधरी अब 89 वर्ष के हो चुके हैं. आश्रम के बच्चे उन्हें मास्टर मोशाई बुलाते है. वह आज भी बच्चों को अच्छा इंसान बनने की सीख देते है. इसलिए यहां के बच्चे अर्धाहार में रहकर, अच्छे कपड़ों के लिए तरसते हुए भी अच्छा इंसान बनने का सपना पालते है. इसके लिए उन्हें कुछ सहयोग की जरुरत है. इस बारे में सुकुमार राय चौधरी कहते है कि वह अब बच्चों को पेटभर भोजन नहीं दे पाते है. पढ़ाई करने में भी उन्हें परेशानी हो रही है. अगर कोई मदद का हाथ बढ़ाये तो बच्चों की जिंदगी सुधरे. उन्होंने कहा कि उनकी काफी उम्र हो गयी है. उनके पीछे इस आश्रम व आश्रित बच्चों का क्या होगा यह चिंता उन्हें सताती है. कहते हुए उनकी आंखे छलक गयी. खुद को संभालते हुए उन्होंने कहा कि इस आश्रम के लिए कई बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा चुके है. लेकिन काम नहीं हुआ.
इस बारे में बंसीहारी के बीडीओ सुदेष्णा पाल ने बताया कि मामले की जानकारी नहीं थी. मीडिया के माध्यम से उन्हें पता चला है. वह इस बारे में छानबीन करने का आश्वासन दिया है. बुनियादपुर शहर निवासी सुशोभन सिंह ने कहा कि वह जब वहां जाते हैं अपनी क्षमता के अनुसार कुछ दान करते हैं. लेकिन यह काफी मामूली होती है. आश्रम व यहां के इन 27 अनाथ बच्चों की समग्र विकास के लिए सरकारी मदद की जरूरत है.
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