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रेल हादसे में गंवाया दाहिना पैर, नहीं मिली सरकारी मदद

Updated at : 18 Aug 2019 3:50 AM (IST)
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रेल हादसे में गंवाया दाहिना पैर, नहीं मिली सरकारी मदद

कालचीनी के चिंचुला चाय बागान निवासी युवक की जिंदगी बेहाल दिव्यांग प्रमाणपत्र भी नहीं बन पा रहा, प्रशासन व समाज से मदद की लगा रहा गुहार कालचीनी :ट्रेन के चपेट में एक पैर खोने के बावजूद आज तक सरकारी मदद से वंचित है चाय श्रमिक परिवार का युवा बेटा. मामला अलीपुरद्वार जिला के कालचीनी ब्लॉक […]

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कालचीनी के चिंचुला चाय बागान निवासी युवक की जिंदगी बेहाल

दिव्यांग प्रमाणपत्र भी नहीं बन पा रहा, प्रशासन व समाज से मदद की लगा रहा गुहार
कालचीनी :ट्रेन के चपेट में एक पैर खोने के बावजूद आज तक सरकारी मदद से वंचित है चाय श्रमिक परिवार का युवा बेटा. मामला अलीपुरद्वार जिला के कालचीनी ब्लॉक के अंतर्गत चिंचुला चाय बागान इलाके की है. जुलाई 2018 को इस बागान के निवासी जयप्रकाश सुरीन (20) ट्रेन से बिन्नागुड़ी जा रहे थे. उसी दौरान ट्रेन से गिरकर उनका दाहिना पैर कट गया. घटना को एक वर्ष से ज्यादा बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें दिव्यांगों को मिलनेवाला कोई सरकारी लाभ प्राप्त नहीं हुआ है. यहां तक कि दिव्यांग प्रमाण पत्र भी उन्हें नहीं मिल सका है.
रेलवे प्रशासन के आश्वासन खोखले साबित होने के बाद अब दिव्यांग जयप्रकाश ने राज्य प्रशासन व समाजसेवी संगठनों से मदद की गुहार लगायी है. जयप्रकाश ने बताया कि उसने सोचा था कि बड़ा होकर अपने पिता व भैया का सहारा बनेगा, लेकिन वह खुद उन पर बोझ बन बैठा है. उस हादसे ने उसके सपनों को चकनाचूर कर दिया है. पीड़ित युवक ने बताया, ‘हादसे के बाद रेलवे प्रशासन से कुछ लोग मेरे पास आये थे और मुझे आश्वासन देकर गये थे कि मुझे नियमानुसार सरकारी मदद मिलेगी. लेकिन आज तक मुझे रेलवे से किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं मिल पाया.’
जयप्रकाश ने बताया कि आधार कार्ड ना होने के कारण उसका दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने से मना कर दिया गया. उसका कहना है, ‘मैं घर में बैठकर घुट-घुट कर जी रहा हूं. मैं चाहता हूं कि कोई समाजसेवी संगठन या प्रशासन आकर मेरा सहायता करे, ताकि मैं अपने बुजुर्ग पिता का सहारा बन पाऊं.’ इस बारे में इलाके के समाजसेवी गोविंदा मरांडी ने कहा कि उस युवक के परिवार में कुल तीन लोग हैं.
दोनों भाई शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं, जबकि पिता काफी बुजुर्ग हो चुके हैं. बड़ा भाई मनोहर सुरीन किसी तरह चाय बागान में काम करके परिवार चला रहा है. दोनों भाइयों ने दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने का प्रयास किया, लेकिन प्रमाण पत्र नहीं बन पाया. गोविंदा मरांडी ने भी इस परिवार की मदद की गुहार लगायी है.
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