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शादी से पहले लड़कियां करती हैं विषधर सांप की पूजा

Updated at : 18 Jul 2019 1:00 AM (IST)
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शादी से पहले लड़कियां करती हैं विषधर सांप की पूजा

आस्थाl मालदा के देवकुंड की है रोचक कहानी राजवंशियों के इस तीर्थस्थान में हर घर में पूजे जाते हैं सांप रायगंज : मां काली या सत्यनारायण पूजा नहीं, इस गांव में लड़कियां शादी से पहले विषधर सांप की पूजा करती हैं. प्राचीन पंरपरा को मानते हुए इस गांव के लोग आज भी सांप की पूजा […]

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आस्थाl मालदा के देवकुंड की है रोचक कहानी

राजवंशियों के इस तीर्थस्थान में हर घर में पूजे जाते हैं सांप
रायगंज : मां काली या सत्यनारायण पूजा नहीं, इस गांव में लड़कियां शादी से पहले विषधर सांप की पूजा करती हैं. प्राचीन पंरपरा को मानते हुए इस गांव के लोग आज भी सांप की पूजा कर रहे हैं. क्योंकि गांव में कथित है कि सांप की पूजा किये बिना लड़कियों की शादी करवाने से उसके पति की सांप के काटने से मौत हो जाती है. यह कहानी ओल्ड मालदा के देवकुंड व आसपास के कई गांवो की है. जहां एक ओर जहां पूरा देश डिजीटल युवग में जा रहा है, वहीं यहां के कई पिछड़े गांवो में आज भी ऐसी रोचक कहानियां प्रचलित हैं.
उत्तर बंगाल के सभी जिलों की अपनी अलग विशेषता है. इनमें मालदा के अलग अलग क्षेत्रों में अलग अलग कहानिंया प्रचलित हैं. वैसे तो इन गांवो में साल भर सुबह शाम द्वीप आरती के साथ सांप व सांप की मूर्ति की पूजा की जाती है. स्थानीय लोगों का मानना है कि नाग देवी के आशीर्वाद से विषैले सांपों से गांव के लोगों को नुकसान नहीं पहुंचता है. हर साल इस देवकुंड व आसपास के गांव में पूरे धूमधाम व निष्ठा के साथ नाग देवी की पूजा की जाती है. इन गांवो में किसी भी घर में अन्य किसी देवी देवता की मूर्ति तक नहीं है.
कथित है कि 500 साल पहले मालदा के देवकुंड इलाके में बेहुला नदी से पौराणिक कथाओं की बेहुला ने अपने मृत पति लखिंदर को लेकर इस गांव से गुजरी थी. लखिंदर की भी मौत सांप के काटने से ही हुई थी. वह अपने मृत पति को लेकर नाग देवी से मिलने केले के पेड़ से बने नाव में सवार होकर गांव की इस नदी से गुजर रही थी. उस दौरान गांव की कुछ महिलाओं ने उसे देखकर मजाक उड़ाया. उस समय बेहुला ने पूरे गांव को अभीशाप दिया.
इलाकावासियों की धारना है कि इस गांव में अन्य इलाकों की तुलना में विधवाओं की संख्या ज्यादा है. इसलिए गांव की लड़कियों की शादी से पहले नाग देवी की पूजा का प्रावधान है. हर साल यहां बुद्ध पूर्णिमा के दिन वार्षिक पूजा के दौरान मेला लगता है. यह राजवंशी समुदाय के लोगों का तीर्थ स्थान भी है. ग्रामीणों का कहना है कि यहां की लड़कियों को शादी से पहले नाग देवी को संतुष्ट करना अनिवार्य है.
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