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बड़े चाय बागानों को टक्कर दे रहे लघु चाय बागान

Updated at : 01 Jul 2019 2:07 AM (IST)
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बड़े चाय बागानों को टक्कर दे रहे लघु चाय बागान

नागराकाटा : चाय बागानों के लिये विख्यात उत्तर बंगाल के लिये लघु चाय बागानों ने इस क्षेत्र को राष्ट्रीय मानचित्र में ला खड़ा किया है. वैसे तो पूरे देश में लघु चाय बागानों की चाय उत्पादन में हिस्सेदारी महत्वपूर्ण हो गयी है और वह बड़े बागानों से आगे निकलने की होड़ में हैं. वहीं, तराई […]

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नागराकाटा : चाय बागानों के लिये विख्यात उत्तर बंगाल के लिये लघु चाय बागानों ने इस क्षेत्र को राष्ट्रीय मानचित्र में ला खड़ा किया है. वैसे तो पूरे देश में लघु चाय बागानों की चाय उत्पादन में हिस्सेदारी महत्वपूर्ण हो गयी है और वह बड़े बागानों से आगे निकलने की होड़ में हैं. वहीं, तराई क्षेत्र संपूर्ण देश के लघु चाय बागानों में एक नंबर पर है. ये तथ्य भारतीय चाय बोर्ड द्वारा हाल में प्रकाशित नवीनतम सर्वे में सामने आया है.

भारतीय चाय बोर्ड के अनुसार इस वर्ष मई में पूरे देश में चाय का उत्पादन 650.63 लाख किलोग्राम रहा. इनमें से लघु चाय उत्पादकों द्वारा तैयार चायपत्ती की हिस्सेदारी 690.16 लाख किलोग्राम है.
बड़े चाय बागानों की हिस्सेदारी 650.63 लाख किलोग्राम है. उत्तरबंगाल के पहाड़, तराई और डुआर्स को मिलाकर लघु चाय बागानों का उत्पादन 250.54 लाख किलोग्राम है. वहीं, इस क्षेत्र के बड़े 300 चाय बागानों का कुल उत्पादन 170.81 लाख किलोग्राम है.
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018-19 के दौरान देश में लघु चाय बागानों की हिस्सेदारी 48.41 फीसद रही. उत्तरबंगाल तो पिछले साल से ही लघु चाय बागान एक नंबर पर है. यहां इनका कुल उत्पादन 54.68 फीसद रहा. टी बोर्ड के अनुसार लघु चाय उत्पादन के क्षेत्र में तराई क्षेत्र देश में एक नंबर पर है. वर्ष 2018-19 में तराई क्षेत्र की हिस्सेदारी कुल लघु चाय उत्पादन के मामले में 73.56 फीसदी रही. यह वाकई उत्तर बंगाल और खासतौर पर तराई क्षेत्र के लिये गौरव की बात है.
चाय बागानों के संगठन टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (टाई) के डुआर्स शाखा सचिव राम अवतार शर्मा ने बताया कि लघु चाय बागानों को कई तरह की सुविधा है. उन्हें बड़े बागानों की तरह सामाजिक सुरक्षा का भार वहन नहीं करना होता है. चाय उत्पादन की उनकी लागत भी बड़े बागानों से कम पड़ती है. वहीं, बड़े चाय बागान अब अधिक मजदूरी और कड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्द्धा के चलते लाभजनक नहीं रह गये हैं.
वहीं, लघु चाय उत्पादकों के संगठन कॉनफेडरेशन ऑफ इंडियन स्मॉल अी एसोसिएशन (सिस्टा) के अध्यक्ष विजय गोपाल चक्रवर्ती ने बताया कि आगामी 2020 तक लघु चाय बागानों का उत्पादन 50 फीसदी तक होने की उम्मीद है. केंद्रीय उद्योग-वाणिज्य मंत्रालय से उनकी गुजारिश है कि कच्ची चायपत्ती के उत्पादक से लघु चाय उत्पादकों को चाय के विपणनकारी में विकसित करने की दिशा में पहल की जाये.
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