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मदर एंड चाइल्ड हब ‘मातृमा’ शुरू

Updated at : 16 May 2019 5:17 AM (IST)
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मदर एंड चाइल्ड हब ‘मातृमा’ शुरू

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुसार आया-मासियों को हब में काम करने की अनुमति नहीं कूचबिहार : कूचबिहार सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बुधवार से मदर एंड चाइल्ड हब (मातृमा) शुरू हो गया. शुरुआत के पहले दिन ही अस्पताल में काम करने की मांग को लेकर अस्थायी तौर पर काम करनेवाली आया-मासी द्वारा जमकर विरोध […]

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मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुसार आया-मासियों को हब में काम करने की अनुमति नहीं

कूचबिहार : कूचबिहार सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बुधवार से मदर एंड चाइल्ड हब (मातृमा) शुरू हो गया. शुरुआत के पहले दिन ही अस्पताल में काम करने की मांग को लेकर अस्थायी तौर पर काम करनेवाली आया-मासी द्वारा जमकर विरोध प्रदर्शन किया गया. इसके साथ ही सुबह में कूचबिहार सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एमएसवीपी राजीव प्रसाद के घर के सामने धरना दिया गया.
मासी का कहना है कि अगर उन्हें काम करने नहीं दिया जायेगा तो वे बेरोजगार हो जायेंगी. जिससे उनके परिवार का दिन गुजारना मुश्किल हो जाएगा. वहीं अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमानुसार वहां आया-मासियों को प्रवेश करने की अनुमति नहीं है.
मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक कूचबिहार मदर एंड चाइल्ड हब का उद्घाटन करीब दो माह पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किया था. लेकिन बुधवार से मदर एंड चाईल्ड हब का काम शुरू हुआ है. कामकाज शुरू होते ही सुबह से मदर एंड चइल्ड हब के सामने विरोध-प्रदर्शन किया गया. इसके बाद कूचबिहार सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एमएसवीपी राजीव प्रसाद के घर के सामने विरोध-प्रदर्शन किया गया.
आया-मासी का संगठन, कूचबिहार सरकारी मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल के अस्थायी कर्मी समन्वय कमिटी के अध्यक्ष गंगन गोस्वामी ने कहा कि मदर एंड चाइल्ड हब में आया मासियों को काम करने नहीं दिया जा रहा है. ये लोग करीब 20 से 30 वर्षों से काम कर रहे हैं. इस तरह से काम नहीं मिलने के कारण इनका परिवार परेशानी में पड़ जायेगा. इसको लेकर एमएसवीपी को बोला गया है. इस कारण विरोध-प्रदर्शन किया गया.
इस विषय में कूचबिहार मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के एमएसवीपी राजीव प्रसाद ने कहा कि मरीज को परिसेवा देना हमारा पहला लक्ष्य है. वहीं मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा इस पर प्रतिबंध लगाया गया है. पूरे राज्य में यही नियम है. इसलिए कुछ नहीं किया जा सकता.
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