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उत्तर बंगाल में बढ़ रही है ओटिज्म रोगियों की संख्या

Updated at : 10 May 2019 1:40 AM (IST)
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उत्तर बंगाल में बढ़ रही है ओटिज्म रोगियों की संख्या

सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी सहित पूरे उत्तर बंगाल में ओटिज्म तथा तंत्रिका संबंधी रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. ऐसे रोगियों के लिए विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों की ओर से देखरेख की व्यवस्था तो की जाती है,लेकिन यह काफी नहीं है.ऐसे रोगियों के परिवार वाले भी काफी परेशान रहते हैं. दरअसल जागरूकता की कमी के कारण […]

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सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी सहित पूरे उत्तर बंगाल में ओटिज्म तथा तंत्रिका संबंधी रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. ऐसे रोगियों के लिए विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों की ओर से देखरेख की व्यवस्था तो की जाती है,लेकिन यह काफी नहीं है.ऐसे रोगियों के परिवार वाले भी काफी परेशान रहते हैं. दरअसल जागरूकता की कमी के कारण ही ऐसे रोगियों की संख्या बढ़ रही है.

क्योंकि उनकी उचित चिकित्सा नहीं करायी जाती है. लोग मानकर चलते हैं कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है. यह बातें न्यूरोजेन ब्रेन एंड स्पाइन इंस्टीट्यूट की उप निदेशक डॉ नंदिनी गोकुलचंद्रन ने कही. वह ओटिज्म बृहस्पतिवार को सिलीगुड़ी में संवाददाताओं से बात कर रही थीं. उन्होंने कहा कि स्टेम सेल थेरेपी (एससीटी) से इस बीमारी की चिकित्सा संभव है.

यह एक बहुत ही सरल और सुरक्षित प्रक्रिया है. एक सुई की मदद से मरीज की अपने ही बोन मैरो से स्टेम सेल लिए जाते हैं और प्रसंस्करण के बाद उनके स्पाइनल फ्लुइड में वापस इंजेक्ट किया जाता है. चूंकि उन्हें मरीज के स्वयं के शरीर से लिया जाता है ऐसे में रिजेक्शन और साइड इफेक्ट (दुष्प्रभाव) का खतरा नहीं रहता है. एससीटी को पूरी तरह एक सुरक्षित प्रक्रिया बनाता है.इसी चिकित्सा पद्दति की मददम से सिलीगुड़ी की श्रबना बंदोपाध्याय (21) को नयी जिंदगी मिली है.

श्रीमती गोकुलचंद्रन ने बताया कि श्रबना का जन्म एक पूर्ण कालिक सिजेरियन डिलीवरी के तहत हुआ.जन्म के दौरान उसका वजन कम था, लगभग 1.8 किलोग्राम वजन मापा गया और जन्म के तुरंत बाद वह रोई भी नहीं.जागरूकता की कमी के कारण इस दौरान कोई उचित चिकित्सीय सलाह नहीं ली गई. डेढ़ वर्ष की आयु के दौरान, जब श्रबना उचित मुद्रा में उठ-बैठ सकने में असक्षम दिखी तब इस बारे में बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श किया गया.उसे सेरिब्रल पाल्सी से पीड़ित घोषित किया गया.

उसकी लगातार चिकित्सा करायी गयी,लेकिन वह ठीक नहीं हुयी. अब जाकर उसकी चिकित्सा स्टेम सेल थेरेपी से हुयी और वह काफी हद तक ठीक हो चुकी.श्रीमती गोकुलचंद्रन ने कि उसकी जैसी समस्या उत्तर बंगाल में और भी कई रोगियों की है. स्टेम सेल थेरेपी चिकित्सा की जानकारी के अभाव में उनकी चिकित्सा नहीं हो पाती है.

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