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सीमांत क्षेत्र के कंटीले तार के अंदर 11 गांवों में चुनावी शोर नहीं

Updated at : 15 Apr 2019 6:09 AM (IST)
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सीमांत क्षेत्र के कंटीले तार के अंदर 11 गांवों में चुनावी शोर नहीं

बालुरघाट : लोकसभा चुनाव में अब कुछ ही दिन रह गये है. विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशी दिनरात प्रचार में व्यस्त हैं.दलीय प्रत्याशियों के समर्थन के लिये इलाके में हेविवेट नेता व मंत्रियों का पहुंचना जारी है. लेकिन भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र पर लगे कंटीले तार के उसपर रहने वाले 11 गावों के लोगों के बीच […]

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बालुरघाट : लोकसभा चुनाव में अब कुछ ही दिन रह गये है. विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशी दिनरात प्रचार में व्यस्त हैं.दलीय प्रत्याशियों के समर्थन के लिये इलाके में हेविवेट नेता व मंत्रियों का पहुंचना जारी है. लेकिन भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र पर लगे कंटीले तार के उसपर रहने वाले 11 गावों के लोगों के बीच चुनावी शोर की कोई चहल-पहल नहीं है.
इन गांवों की तस्वीर ही औरों से जुदा है. इन गांवों में चुनाव का कोई शोर नहीं है. काटांतार के उसपार भारतीय भूखंड में 11 गांव हैं. जहां अभी तक किसी भी प्रत्याशी ने कदम नहीं रखा.
दक्षिण दिनाजपुर जिले के 252 किलोमीटर इलाके में भारत-बांग्लादेश की सीमा लगती है. सीमांत के लगभग 32 किलोमीटर इलाके में कांटातार नहीं लगा है. कहीं बांस के फट्टे लगे हैं तो कहीं सीमा पूरी तरह से खुली है.
इधर, हिली थाना के बीच कांटातार के उसपार हाड़ीपुकुर, उडाल, ऊंचा गोविंदपुर, श्रीकृष्णपुर सहित कुल 11 भारतीय गांव है. इन गांवों में 10 हजार से भी ज्यादा मतदाता निवास करते है. 11 गांव के लिए श्रीकृष्णपुर में मात्र एक बूथ है.
कांटातार के उसपार रहने के कारण इन गांवों में कई समस्यायें है. अंतरराष्ट्रीय जटिल कानून के कारण समस्यायों का जल्द निपटारा संभव नहीं हो पाता है. इधर देश में चुनाव की घोषणा के बाद मतदान शुरू हो चुका है. लेकिन इन गांवो में आजतक कोई प्रत्याशी वोट मांगने नहीं पहुंचा. कुछ इलाकों में कार्यकर्ता प्रचार के लिए पहुंचे है.
दो गांव में दीवार लेखन किया गया है. कुछ एक फ्लेक्स भी लगे है. हालांकि चुनाव आते जाते रहते है लेकिन इन गांवो की समस्या का समाधान नहीं होता है. फिर भी ग्रामीण विभिन्न पार्टियों के प्रत्यशियों की राह देख रहे है.
ताकी उनके सामने अपनी समस्या रख सके. इलाकों में सड़क से लेकर पेयजल हो या बिजली समस्या ही समस्या है. समाधान एक भी नहीं. बिजली की समस्या का कुछ हद तक समधान हुआ है. दूसरी ओर वाम, भाजपा व तृणमूल प्रत्याशियों ने बताया कि वे जल्द ही कांटातार के उसपार भारतीय गांव में प्रचार करेंगे.
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