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कूचबिहार : जमीन देनेवालों ने डीएलआरओ दफ्तर के सामने किया प्रदर्शन

Updated at : 15 Jan 2019 5:20 AM (IST)
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कूचबिहार : जमीन देनेवालों ने डीएलआरओ दफ्तर के सामने किया प्रदर्शन

कूचबिहार : फोरलेन के निर्माण के लिये मनमाने तरीके से भूमि अधिग्रहण करने के बाद मुआवजा देने का आरोप भूमिदाताओं ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के खिलाफ लगाया है. सोमवार को इन लोगों ने कूचबिहार जिला भूमि व भूमि सुधार विभाग के सामने प्रदर्शन कर अपना विरोध जताया. इस विरोध प्रदर्शन में भूमिदाताओं के परिवार के […]

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कूचबिहार : फोरलेन के निर्माण के लिये मनमाने तरीके से भूमि अधिग्रहण करने के बाद मुआवजा देने का आरोप भूमिदाताओं ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के खिलाफ लगाया है. सोमवार को इन लोगों ने कूचबिहार जिला भूमि व भूमि सुधार विभाग के सामने प्रदर्शन कर अपना विरोध जताया. इस विरोध प्रदर्शन में भूमिदाताओं के परिवार के सदस्य भी शामिल हुए.
इन भूमिदाताओं का आरोप है कि राजमार्ग प्राधिकरण मनमाने दर से जमीन का मुआवजा दे रहा है. इस संबंध में इन किसानों ने डीएलआरओ को अपनी मांगों से संबंधित 12सूत्री ज्ञापन भी सौंपा है. उल्लेखनीय है कि यह फोरलेन अलीपुरद्वार और कूचबिहार जिलों को आपस में जोड़ता है.
इन पीड़ित किसानों का आरोप है कि अधिगृहित जमीन का मुआवजा कहीं प्रति डेसीमिल एक लाख 59 हजार रुपए दिया जा रहा है तो कहीं, चार लाख 57 हजार रुपए की दर से. इस वजह से ये किसान ठगे जा रहे हैं.
खासतौर पर जिनके पास जमीन का पट्टा नहीं है वे मुआवजे से वंचित हो रहे हैं. आरोप यह भी है प्राधिकरण ने जमीन में लगे पेड़ों और अन्य सामग्रियों की कीमत तय नहीं की है.
जमीन के मालिक को लिखित सूचना दिये बिना ही उनकी जमीन में लगी फसलों को नष्ट कर काम शुरु किया जा रहा है. आरोप है कि खतियानी जमीन के मालिकों को कितना मुआवजा दिया जायेगा इसको लेकर किसी तरह की बातचीत नहीं कर मनमाने तरीके से मुआवजा तय किया जा रहा है.
उनके बैंक खाते में राशि जमा की जा रही है. आंदोलनकारियों का कहना है कि जमीन में लगे पेड़ों या फसलों को काटने का विरोध करने पर उनके साथ बल प्रयोग भी किया जा रहा है. उन्होंने जमीन के मुआवजे की रकम को सार्वजनिक किये जाने की मांग की.
ज्ञापन में आवासीय जमीन की कीमत अलग से निर्धारित किये जाने की मांग की गयी है. आंदोलनकारी अनुप कुमार माइती, परिमल सरकार और रामपद राय ने बताया कि अधिग्रहण की इस प्रक्रिया से सर्वाधिक प्रभावित वैसे लोग हुए हैं जो पिछले 20 साल से अधिक समय से रह रहे हैं लेकिन उनके पास पट्टा नहीं है.
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