नियमित आहार से ही बच्चे सुरक्षित : डॉ सलुजा

सिलीगुड़ी: छह माह के शिशुओं में अल्पपोषण की रोकथाम एवं उनके संपूर्ण उन्नति और विकास सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों ने खान-पान की आदतों में एक स्वस्थ बदलाव की आवश्यकता की जोरदार वकालत की है. भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा फरवरी 2013 में जारी इन्फेंट एण्ड यंग चाइल्ड फिडिंग (आईवायसीएफ) […]
सिलीगुड़ी: छह माह के शिशुओं में अल्पपोषण की रोकथाम एवं उनके संपूर्ण उन्नति और विकास सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों ने खान-पान की आदतों में एक स्वस्थ बदलाव की आवश्यकता की जोरदार वकालत की है.
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा फरवरी 2013 में जारी इन्फेंट एण्ड यंग चाइल्ड फिडिंग (आईवायसीएफ) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की कुल मृत्यु दर में एक तिहाई से 50 प्रतिशत तक मौतों का कारण अपर्याप्त पोषण है. भारत में पांच वर्ष से कम आयु के 43 प्रतिशत बच्चों को अल्पभार एवं 48 प्रतिशत को अविकसित पाया गया है. उक्त मंतव्य सर गंगाराम अस्पताल के वरिष्ठ शिशु रोग चिकित्सक डॉ. सतीश सालुजा ने व्यक्त किया.
वह यहां एक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि मात्र ब्रेस्ट-फीडिंग से एक शिशु की छह माह की आयु तक पोषण की पर्याप्त आपूर्ति की जा सकती है. उन्होंने बताया कि जब बच्चे छह माह के हो जाते हैं तो उनके स्वस्थ उन्नति और विकास के लिए पोषण और ऊर्जा के अतिरिक्त स्नेतों की आवश्यकता होती है. यही वह समय है जब सभी माताओं को ब्रेस्ट-फीडिंग के साथ शिशुओं को अनिवार्य रूप से ठोस एवं अर्ध-ठोस आहार की नियमित मात्र पूरक के रूप में देनी चाहिए.
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