लीची के वायरस का रहस्य जानने की कवायद

कोलकाता: कच्चे लीची खाने से मालदा में बच्चों की मौत की घटना के बाद लीची के वायरस का रहस्य जानने के लिए राज्य सरकार अब कोई भी कदम उठाने को तैयार है. मालदा जिले में फैली इस अज्ञात बीमारी की वजह से अब तक 14 बच्चों की मौत हो चुकी है. हालांकि राज्य के स्वास्थ्य […]
कोलकाता: कच्चे लीची खाने से मालदा में बच्चों की मौत की घटना के बाद लीची के वायरस का रहस्य जानने के लिए राज्य सरकार अब कोई भी कदम उठाने को तैयार है. मालदा जिले में फैली इस अज्ञात बीमारी की वजह से अब तक 14 बच्चों की मौत हो चुकी है.
हालांकि राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने प्राथमिक जांच के बाद बताया है कि कच्च लीची खाने से यह बीमारी फैली है, क्योंकि कच्च लीची में पाये जानेवाला टॉक्सिन ही बच्चों के रक्त में मिला है और टॉक्सिन के कारण इनकी मौत हुई है. लेकिन स्वास्थ्य विभाग को अब तक इस वायरस के बारे में संपूर्ण जानकारी नहीं मिल पायी है, इसलिए वायरस का रहस्य जानने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने यहां के कच्च लीची व बीमारी से ग्रसित बच्चों के रक्त के नमूनों को अटलांटा भेजने का फैसला किया है. अटलांटा के रिसर्च सेंटर को इस वायरस के रहस्य को दूर करने को कहा गया है.
गौरतलब है कि लीची के बारे में राज्य की स्वास्थ्य राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य द्वारा दिये गये बयान के बाद इसकी मांग और कीमत दोनों में काफी गिरावट आयी है. हालांकि मंत्री ने कच्च लीची से बच्चों को दूर रखने की हिदायत दी थी, लेकिन लोगों ने पक्का लीची खाना भी कम कर दिया है. लीची की कीमत भी पहले की अपेक्षा कम हुई है. पहले यह 100-120 रुपये प्रति किलो की दर से बेची जाती थी, जो अब यह कम होकर 50-60 रुपये प्रति किलो हो गया है. लेकिन उसके बावजूद लीची के लिए खरीदार नहीं मिल रहे हैं.
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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