तेंदुए के तांडव से परेशान हैं डुवार्सवासी

Updated at : 10 Jun 2014 2:53 AM (IST)
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तेंदुए के तांडव से परेशान हैं डुवार्सवासी

जलपाईगुड़ी: बार बार तेंदुए के उपद्रव से डुवार्स के चाय बागान क्षेत्र के लोग परेशान हैं. यहां के चाय श्रमिकों को तेंदुए के हमले का शिकार होना पड़ रहा है. तेंदुए के उपद्रव के चलते चाय बागान में चाय पत्ती तोड़ने का काम बाधित हो रहा है. चाय श्रमिकों में आतंक बना हुआ है. वन […]

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जलपाईगुड़ी: बार बार तेंदुए के उपद्रव से डुवार्स के चाय बागान क्षेत्र के लोग परेशान हैं. यहां के चाय श्रमिकों को तेंदुए के हमले का शिकार होना पड़ रहा है. तेंदुए के उपद्रव के चलते चाय बागान में चाय पत्ती तोड़ने का काम बाधित हो रहा है.

चाय श्रमिकों में आतंक बना हुआ है. वन विभाग की ओर से जाल बिछा कर तेंदुए को पकड़े जाने का सिलसिला जारी रहने के बावजूद तेंदुए का उत्पात कम नहीं हो रहा है. सवाल उठ रहा है कि तेंदुए को पकड़े जाने के बाद जंगल में छोड़ दिये जाने के बावजूद वह तेंदुआ फिर से चाय बागान में प्रवेश कर रहा है या नहीं वन विभाग की ओर से इस बारे में जानकारी लेने की कोई कोशिश नहीं की जा रही है.

गुरुवार को डुवार्स के माल बाजार स्थित गुडहोप चाय बागान के तीन/चार नंबर सेक्शन से एक तेंदुए के पकड़े जाने के बाद उसे रेडिओ कॉलर पहनाने की मांग पर्यावरण प्रेमी संगठनों की ओर से की जा रही है. विगत एक हफ्ते में इस चाय बागान से दो तेंदुए को पकड़ कर गोरूमारा जंगल में छोड़ दिया गया. माल वन्यप्राणी स्क्वाड के रेंज अफसर आलोक बसु ने कहा कि चाय बागान के इस सेक्शन में फिर से जाल बिछाया जायेगा. विगत एक हफ्ते में डुवार्स के गुरजांगझोरा, वाशाबाड़ी, निदाम समेत कई चाय बागानों से पांच से सात तेंदुए को जाल में कैद किया गया है.

जलपाईगुड़ी जिला वन विभाग सूत्रों के अनुसार, तेंदुआ प्रजनन के वक्त चाय बागान में प्रवेश करता है. पर्यावरण प्रेमी संगठन नेचर एडवांटेज के को-ऑर्डिनेटर सुजीत दास ने कहा कि वन विभाग द्वारा जंगल में छोड़े जाने वाले तेंदुए रेडिओ कॉलर पहनाना चाहिए ताकि उसको चिन्हित किया जा सके. उन्होंने यह भी कहा कि डुवार्स के जंगलों में कितता तेंदुआ हैं, इससे भी वन विभाग अज्ञात है. जिला वन्यप्राणी विभाग की अधिकारी सुमिता घटक ने रेडियो कॉलर के बारे में कुछ भी नहीं कहा. दूसरी ओर, वन विभाग के उत्तर बंगाल शाखा के एक अधिकारी ने कहा कि तेंदुए को रेडियो कॉलर पहानाने पर विचार-विमर्श किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य स्तर पर अनुमोदन की आवश्यकता है.

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