गाजलडोबा में सबसे बड़े पर्यटन हब का सीएम ने किया उद्घाटन, अलग से थाना बनेगा, एसडीओ की भी होगी नियुक्ति
Updated at : 04 Oct 2018 2:20 AM (IST)
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सिलीगुड़ी : सूर्यास्त के समय राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सिलीगुड़ी से सटे जलपाईगुड़ी जिला अंतर्गत गाजलडोबा में सपनों की परियोजना ‘भोरेर आलो’ का उद्घाटन किया. भोरेर आलो परियोजना को विश्व मानचित्र पर पर्यटन हब के रूप में उभारने का उन्होंने संकल्प लिया है. परियोजना के साथ-साथ इलाके की आर्थिक उन्नति विकसित करने के […]
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सिलीगुड़ी : सूर्यास्त के समय राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सिलीगुड़ी से सटे जलपाईगुड़ी जिला अंतर्गत गाजलडोबा में सपनों की परियोजना ‘भोरेर आलो’ का उद्घाटन किया. भोरेर आलो परियोजना को विश्व मानचित्र पर पर्यटन हब के रूप में उभारने का उन्होंने संकल्प लिया है. परियोजना के साथ-साथ इलाके की आर्थिक उन्नति विकसित करने के लिए भी उन्होंने अहम घोषणाएं की.
परियोजना के साथ इलाके की निगरानी के लिए एक पुलिस स्टेशन बनाने व एसडीओ की नियुक्ति का निर्देश उन्होंने दिया है. भोरेर आलो परियोजना व उससे सटे इलाके एक विशेष क्षेत्र घोषित करने का निर्देश भी उन्होंने राज्य सचिव को दिया है. यह पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा पर्यटन हब है.
बुधवार शाम करीब पांच बजे राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गाजलडोबा में निर्माणाधीन परियोजना भोरेर आलो का उद्घाटन किया. परियोजना का उद्घाटन करने के बाद उन्होंने कहा कि जलाशय, नदी, जंगल व पहाड़ के साथ विभिन्न तरह के पक्षियों का बसेरा व उनका चहचहाने का आनंद लेने के लिए विश्व भर के पर्यटकों को भोरेर आलो में आना ही होगा.
यह दृश्य अन्यत्र कहीं नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि भोरेर आलो परियोजना का नाम भोरेर आलो काफी सोच-विचार कर रखा गया है. कंचनजंघा पर पड़ने वाली सूर्य की पहली किरण, तीस्ता नदी से सूर्य का उदय व अस्त का नजारा यहां से देखा जा सकता है. भोरेर आलो से निकल कर वैकुंठपुर जंगल के होकर बंगाल सफारी तक का लुफ्त उठाया जा सकता है.
अब तक 320 करोड़ रुपये खर्च
सुश्री बनर्जी ने बताया भोरेर आलो परियोजना 210 एकड़ जमीन पर है. इस परियोजना में अब तक 320 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं. कुछ कॉटेज का निर्माण हुआ है. यूथ हॉस्टल का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है. 64 एकड़ जमीन गोल्फ कोर्स के लिए रखी गयी है. मुक्त मंच, पाखी वितान, म्यूजियम, ऑर्किड पार्क आदि का कार्य किया जाना है. इस परियोजना में बंगाल के साथ देश के विभिन्न हिस्सों व विदेशों के पूंजीपतियों को भी उन्होंने आमंत्रित किया है.
एक साल के अंदर ही बदली तस्वीर
उन्होंने आगे कहा कि यह गाजलडोबा एक वर्ष पहले क्या था और क्या बनकर खड़ा हो गया है. इस परियोजना के जरिए यहां काफी रोजगार का सृजन होगा. परियोजना के साथ-साथ इलाके की आर्थिक स्थिति का भी विकास होगा. स्थानीय कलाकारों व कारीगरों के लिए उन्होंने एक बांग्ला हाट व विश्व बांग्ला की दुकान खोलने का भी निर्देश दिया है.
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