आंधी-बारिश व तेज ठंड के बीच पढ़ाई करते हैं छात्र

Updated at : 22 Sep 2018 3:31 AM (IST)
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आंधी-बारिश व तेज ठंड के बीच पढ़ाई करते हैं छात्र

मालदा : एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय पिछले 15 सालों से पोलिथीन शीट के नीचे चल रहा है. आंधी-बारिश हो या तेज ठंड, बच्चों को ऐसे ही पढ़ना पड़ता है. राज्य सरकार के शिक्षा क्षेत्र में तमाम विकास के दावों के बावजूद इस विद्यालय की किस्मत नहीं बदली है. अभी तक इसके लिए अपना भवन नहीं […]

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मालदा : एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय पिछले 15 सालों से पोलिथीन शीट के नीचे चल रहा है. आंधी-बारिश हो या तेज ठंड, बच्चों को ऐसे ही पढ़ना पड़ता है. राज्य सरकार के शिक्षा क्षेत्र में तमाम विकास के दावों के बावजूद इस विद्यालय की किस्मत नहीं बदली है. अभी तक इसके लिए अपना भवन नहीं बन पाया है. यह कहानी है चांचल महकमा के रतुआ-2 ब्लॉक की अढ़ाईडांगा ग्राम पंचायत के गौरीपुर गांव स्थित गौरीपुर प्राथमिक स्कूल की. शिक्षक अपना पैसा खर्च करके धूप और बारिश से बचाव के लिए प्लास्टिक शीट और नीचे बिछाने के लिए चादर खरीदते हैं.
गौरीपुर प्राथमिक विद्यालय के प्रभावी प्रधान शिक्षक संजीत चौधरी ने बताया कि नौ जनवरी 2002 को यह स्कूल शुरू हुआ था. अभी इस स्कूल में 37 छात्र-छात्राएं और तीन शिक्षक हैं. स्कूल का भवन नहीं होने की वजह से यहां विद्यार्थी दाखिला लेना नहीं चाहते हैं. इसलिए उनकी संख्या भी नहीं बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि स्कूल भवन निर्माण के लिए वह भूमि एवं भूमि राजस्व विभाग से लेकर प्राथमिकि शिक्षा संसद के कार्यालय का वर्षों से चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ.
उन्होंने बताया कि जहां पर स्कूल चल रहा है, वह सरकारी जमीन है. इसके बावजूद जिला शिक्षा विभाग हमसे कहता है कि इलाके में जगह नहीं मिलने के कारण भवन तैयार करना संभव नहीं हो पा रहा है. जबकि इसी इलाके में 2017 में सरकार की ओर से आंगनबाड़ी केन्द्र और किसानों के लिए एक अतिथि निवास बनवाया जा चुका है. यदि इन भवनों के लिए रास्ता मिल सकता है, तो फिर प्राथमिक स्कूल के भवन के लिए क्यों नहीं. शिक्षा विभाग इस सवाल का कोई समुचित जवाब देने की स्थिति में नहीं है.
अढाईडांगा ग्राम पंचायत के पूर्व पंचायत सदस्य हृदयचन्द्र घोष ने बताया कि गौरीपुर प्राथमिक स्कूल गांव का एकमात्र शिक्षा केन्द्र है. फिर भी अभिभावक अपने बच्चों को खुले आकाश के नीचे पढ़ने के लिए नहीं भेजते. स्कूल के भवन के लिए उन्होंने काफी भाग-दौड़ की लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ. इस मामले में प्राथमिक शिक्षा संसद के चेयरमैन आशीष कुंडू ने बताया कि उस इलाके में जमीन को लेकर कुछ समस्या थी. इस समस्या को मिटाकर स्कूल को जमीन हस्तांतरित करने के लिए भूमि एवं भूमि विकास विभाग को चिट्ठी भेजी गई है. उम्मीद है कि पूजा के बाद काम शुरू हो जायेगा.
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